नयी तकनीक से सडक़ की रिसर्फेसिंग में होगी 31 करोड़ की बचत

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नोएडा (चेतना मंच)। रांची तथा बंगलुरू में सफल प्रयोग के बाद अब नोएडा/ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर भी पुराने सडक़ के मैटेरियल से सडक़ की रिसर्फेसिंग कार्य शुरू होने जा रहा है। इस हॉट इन प्लेस रिसर्फेसिंग तकनीक से करीब 62 करोड़ रूपये का खर्च आएगा। जो पारंपरिक खर्चे से करीब 31 करोड़ रूपये कम है।
वर्क सर्किल-10 के प्रभारी व वरिष्ठ प्रबंधक एस.पी. सिंह ने बताया कि इस तकनीक के जरिए प्राधिकरण को करीब 31 करोड़ रूपये की बचत होगी। उन्होंने बताया कि आईआईटी को भेजे गये सैंपल की रिपोर्ट आ चुकी है। यह कार्य 8 माह में पूरा हो पाएगा। इसमें पुराने मैटेरियल का 30 फीसदी हिस्सा ही प्रयोग में लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक्सप्रेस-वे की प्रति किलोमीटर पर कोर कटिग कर सैंपल आईआईटी रूडक़ी को भेजे गए थे। इसमें यह पता लगाया जाना था कि पुराना मैटेरियल नए निर्माण में कितना कारगर साबित हो सकता है। इस आधार पर सबसे बेहतरीन मैटेरियल का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा उपयोग में लाया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार 30 प्रतिशत हिस्सा उपयोग में लाया जा सकता है। इस तकनीक से बनी सडक़ सात वर्ष तक नहीं टूटेगी। प्राधिकरण वर्क सर्किल-10 के वरिष्ठ प्रबंधक एसपी सिह ने बताया कि हॉट इन प्लेस रिसाइक्लिंग तकनीक से एक्सप्रेसवे की मरम्मत की जानी है। चयनित कंपनी सीएस इंफ्रा ने एक्सप्रेस-वे पर नोएडा ग्रेटरनोएडा बार्डर प्वाइंट के पास अपना प्लांट लगाया है। रि-सर्फेसिग शुरू होने के करीब छह माह में कार्य पूरा कर लिया जाएगा। एक्सप्रेसवे पर महामाया फ्लाईओवर स्थित जीरो माइल से नोएडा के हिस्से तक कायाकल्प करने की योजना है।