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International News: जानिए बाइडन युग में भारत और अमेरिका के संबंधों की केमेस्‍ट्री

नई दिल्‍ली | आनलाइन डेस्‍क। जो बाइडन के अमेरिकी राष्‍ट्रपति बनने के बाद यह सवाल उठने लगे थे कि अब बाइडन प्रशासन और भारत के बीच आखिर किस तरह के रिश्‍ते होंगे। यह बहस का मुद्दा इसलिए भी बन गया था क्‍योंकि पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच गहरी दोस्‍ती थी। इस दोस्‍ती का लाभ अमेरिका और भारत के संबंधों में भी दिखाई देता था। इसलिए ट्रंप के हटने के बाद यह सवाल उठना लाजमी भी था कि क्‍या भारत-अमेरिका के संबंध पूर्व की तरह मधुर बने रहेंगे। आज जब बाइडन और मोदी की पहली मुलाकात हुई तो यह सवाल उठ रहे हैं। आखिर दोनों देशों के संबंधों की बुनियाद कहां हैं? क्‍या आज भारत अमेरिका की जरूरत है? कैसे रहेंगे अमेरिका और भारत के रिश्‍ते? जानते हैं विशेषज्ञ की राय।

आपसी विश्‍वास और लाभों पर आधारित हैं दोनों के रिश्ते :

प्रो. हर्ष वी पंत का कहना है कि देश में उदारीकरण के बाद भारत-अमेरिका के संबंधों में बड़ा बदलाव आया है। दूसरे शब्दों में कहें तो 1990 के दशक के बाद दोनों देशों के संबंधों में एक नया आयाम जुड़ा है। अमेरिका और भारत के बीच संबंध मूल रूप से आपसी विश्‍वास और लाभों पर आधारित है। बाइडन काल में यह संबंध और भी बेहतर होंगे। उन्‍होंने कहा इसका संकेत बाइडन ने राष्‍ट्रपति चुनाव के दौरान ही दे दिया था। भारत के संदर्भ में बाइडन ट्रंप से ज्‍यादा उदार हैं। उन्‍होंने चुनाव प्रचार के दौरान स्‍पष्‍ट कर दिया था कि वह ट्रंप द्वारा लगाए गए एच-1 वीजा पर अस्‍थाई निलंबन को हटा देंगे। प्रो. पंत ने कहा कि यह इस बात के संकेत थे कि बाइडन अगर चुनाव जीत कर आते हैं तो भारत के साथ उनके रिश्‍ते बेहतर बने रहेंगे।

बाइडन के काम आएगा ओबामा के कार्यकाल का अनुभव :

प्रो. पंत ने कहा राष्‍ट्रपति बाइडन व्यक्तिगत संबंधों को की बजाए दो देशों के संबंधों को ज्‍यादा तरजीह देते हैं। उनकी दृष्टि में सरकार का सरकार से संबंध ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। उन्‍होंने कहा कि बाइडन को ओबामा के साथ दो बार उप राष्‍ट्रपति के रूप में काम करने का अनुभव रहा है। और यही अनुभव अब उनके काम आएगा और यही अनुभव बाइडन को दुनिया भर में अपने सहयोगियों और अन्‍य देशों के साथ स्थिर और परिपक्‍व रिश्‍ते बनाने की क्षमता प्रदान कर रहा है। ओबामा के कार्यकाल में भारत और अमेरिका के मुधर संबंध रहे हैं। इसका प्रभाव बाइडन के कार्यकाल में दिखना शुरू हो गया है। उन्‍होंने कहा कि दोनों नेताओं की व्‍यक्तिगत मुलाकात इस बात को प्रमाणित करती है कि दोनों देशों के संबंध मधुर होंगे।

दोनों देशों के संबंधों में मधुरता कायम रहेगी:

प्रो. पंत ने कहा कि व्‍हाइट हाउस में दोनों नेताओं की मुलाकात जिस गर्मजोशी से हुई और जिन विषयों पर हुई, उससे यह बात प्रमाणित हो जाती है कि दोनों देशों के संबंधों में मधुरता कायम रहेगी। पूर्व राष्‍ट्रपति ट्रंप की तरह बाइडन भी भारत में अनुच्छेद 370 हटाने, पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवादी गतिविधियां, चीन के मामले में और सुरक्षा जैसे कई मुद्दों पर भारत के साथ खड़े रहेंगे। बाइडन अपनी न‍ीतियों से यह लगातार संकेत दे रहे हैं कि चीन के खिलाफ अमेरिका भारत के साथ खड़ा है।

अमेरिका ने माना, पाक‍िस्‍तान आतंकवाद का पोषक :

अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव के वक्‍त यह उम्‍मीद की जा रही थी कि बाइडन पाकिस्‍तान के साथ संबंधों को एक नया आयाम दे सकते हैं। लेकिन उनके शपथ लेने के नौ म‍हीनों में इस विचार में काफी बदलाव आया है। अफगानिस्‍तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद पाक ने तालिबान को जिस तरह से मदद की है उससे पाकिस्‍तान एक बार फिर दुनिया के सामने बेनकाब हुआ है। भारत की यह बात सिद्ध हुई है कि पाकिस्‍तान में आतंकवाद का पोषण हो रहा है। ऐसे में यह उम्‍मीद की जा सकती है कि बाइडन प्रशासन पाकिस्‍तान पर भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को बंद करने का दबाव डाल सकता है। प्रो पंत ने कहा कि उप राष्‍ट्रपति कमला हैरिस और मोदी की वार्ता में यह बात साफ दिखी। हैर‍िस ने पाकिस्‍तान को आतंकवाद के मुद्दे पर जमकर लताड़ा।

बाइडन ने दोनों देशों के संबंधों की बताई बुनियाद :

प्रो. पंत ने कहा कि बाइडन ने दोनों देशों के साझा मूल्‍यों पर जिस तरह प्रकाश डाला है, इसके संकेत गहरे हैं। हालांकि, इस दौरान बाइडन ने दोनों देशों के बीच हो रहे व्यापार का उल्‍लेख नहीं किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका-भारत की साझेदारी लोकतांत्रिक मूल्यों में निहित है। बाइडन ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्‍यों को बनाए रखने की हमारी संयुक्‍त साझेदारी है। उन्‍होंने कहा कि दोनों देशों के विविधता को लेकर हमारी संयुक्त प्रतिबद्धता और 40 लाख भारत-अमेरिकी लोगों के पारिवारिक संबंधों में निहित है, जो हर रोज अमेरिका को और मजबूत बनाते हैं। बाइडन ने मोदी के साथ वार्ता में कहा कि अमेरिका-भारत संबंध दुनिया की भयंकर चुनौतियों को हल करने की शक्ति रखते हैं। उन्‍होंने मोदी को याद दिलाते हुए कहा कि वर्ष 2006 में उन्‍होंने कहा था कि 2020 में भारत-अमेरिका के संबंध दुनिया के दो सबसे करीबी देशों में से एक हैं। संकेत साफ है कि दोनों देशों के संबंधों में मधुरता कायम रहेगी।

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