
असम में बीजेपी की सरकार 2016 से सत्ता में आई थी, जब सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 2016-17 से 2020-21 तक के चार वित्तीय वर्षों में विज्ञापनों(Advertisement) पर 125.6 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इसके बाद, जब हिमंत बिस्वा सरमा ने मई 2021 में मुख्यमंत्री का पद संभाला, तो विज्ञापन खर्च में एक बड़ी वृद्धि देखी गई। पहले साल, यानी 2021-22 में 73 करोड़ रुपये का खर्च हुआ था, जो सोनोवाल के कार्यकाल के अंत में किए गए खर्च से कहीं ज्यादा था।
हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में सरकार ने विज्ञापनों(Advertisement) पर खर्च में लगातार बढ़ोतरी की। 2022-23 में विज्ञापनों पर खर्च बढ़कर 78.85 करोड़ रुपये हो गया, और 2023-24 में यह आंकड़ा 160.92 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह लगातार बढ़ती हुई राशि राज्य में बीजेपी के प्रचार-प्रसार और उनकी योजनाओं को जनता तक पहुँचाने के लिए की गई कोशिशों को दर्शाती है। राज्य सरकार ने विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जैसे प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और आउटडोर विज्ञापन पर इन राशि का खर्च किया।
2024-25 में अब तक सरकार ने विज्ञापनों (Advertisement)पर 59.72 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बीजेपी सरकार अपने प्रचार पर निरंतर निवेश कर रही है। विपक्षी दलों और आलोचकों द्वारा यह मुद्दा बार-बार उठाया गया है, क्योंकि इस तरह के विज्ञापन खर्च को सरकारी धन की बर्बादी के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, सरकार का कहना है कि ये खर्च राज्य की योजनाओं को सही तरीके से प्रस्तुत करने और जनता को सूचित करने के लिए किया जा रहा है।
विज्ञापनों(Advertisement) पर बढ़ता हुआ खर्च असम के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है, और यह आगामी चुनावों में भी चर्चा का विषय हो सकता है।Advertisement: