
Ashadha Amavasya 2023 Date (आचार्या राजरानी) आषाढ़ माह की अमावस्या तिथि का समय तर्पण एवं श्राद्ध कार्यों के लिए विशेष माना गया है। इस वर्ष आषाढ़ अमावस्या काफी विशेष रहने वाली है। अमावस्या का समय दो दिन रहेगा। पहले दिन यह पितर कार्यों के लिए मुख्य रहेगी ओर दूसरे दिन स्नान दान इत्यादि कार्यों को करने का विधान रहेगा। 18 जून को आषाढ़ अमावस्या से संबंधित स्नान दान पूजा के कार्य संपन्न होंगे। इस कारण से अमावस्या का योग दो दिन व्याप्त होगा।
अमावस्या तिथि का आरंभ और समाप्ति काल
पंचांग अनुसार कृष्ण पक्ष की 30वीं तिथि को अमावस्या के रुप में जाना जाता है। इस समय पर चंद्रमा की रोशनी का अभाव होता है। चंद्रमा लुप्त प्राय:जान पड़ता है। इसके पश्चात ही शुक्ल पक्ष का आरंभ माना जाता है। दर्श अमावस्या के समय रोहिणी व्रत, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग भी बनेंगे।
17 जून 2023 को प्रारम्भ - 09:11 बजे 18 जून 2023 को समाप्त - 10:06 पर
मान्यताओं के अनुसार कृष्ण पक्ष में दैत्य और शुक्ल पक्ष में देवता सक्रिय रहते हैं। वहीं अमावस्या तिथि को पितरों का दिन कहा जाता है। इस कारण से अमावस्या के दिन किए जाने वाले तृपण कार्यों के द्वारा पितर तृप्त एवं प्रसन्न होते हैं। इसलिए यदि कोई भी व्यक्ति यदि पितरों के द्वारा कष्ट का अनुभव कर रहा हो या किसी को पितृ दोष का सामना करना पड़ रहा हो तो उस व्यक्ति को विशेष रुप से इस दिन तर्पण से जुड़े कार्यों को अवश्य करना चाहिए। इस तिथि पर कर्मकांड के साथ-साथ पवित्र नदियों और धार्मिक तीर्थ स्थलों में स्नान का भी विशेष महत्व माना जाता है। गंगा इत्यादि पवित्र नदियों में किया गया श्राद्ध एवं तर्पण कार्य वंश की वृद्धि करने वाला तथा सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति प्रदान करने वाला होता है।
गरुड़ पुराण में अमावस्या के महत्व को बहुत ही विस्तार पूर्वक रुप से बताया गया है जिसके अनुसार अमावस्या तिथि पर किए जाने वाले विशेष कार्यों से कष्टों का नाश होता है तथा किन कार्यों से बचना इस दिन उचित होता है। अमावस्या तिथि को अनेक प्रकार के दोष समाप्त होने वाला समय माना गया है।
पीपल का पूजन अमावस्या एवं शनिवार के दिन करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। आषाढ़ अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के दर्शन और पूजा करना भी बहुत शुभ माना जाता है। किसी धर्म स्थल पर इस का दान भी विशेष होता है। इस दिन पीपल के पेड़ पर सूत बांधकर दीपक जलाने से आर्थिक विपन्नता समाप्त होती है। जीवन में शनिदोष की समाप्ति के लिए भी यह दिन विशेष होता है। आषाढ़ अमावस्या के दिन पवित्र नदियों, सरोवरों और धार्मिक स्थलों में स्नान, दान-पुण्य और पूजा साधना करना शुभ फल प्रदान करने वाला माना गया है। Ashadha Amavasya 2023