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Astro Tips श्री यंत्र की संरचना ब्रह्मांड के समान है अगर हम गौर करें तो मनुष्य की संरचना भी ब्रह्मांड के समान है । जिस तरह से ब्रह्मांड में नवग्रह होते हैं सातचक्र होते हैं , मनुष्य के अंदर तीन भाग पानी होता है और पृथ्वी में भी तीन भाग पानी है इस तरह से श्री यंत्र की संरचना भी ब्रह्मांड और मनुष्य के समान है। वैज्ञानिक तौर पर भी हम कह सकते हैं प्रकृति के संतुलन और शरीर के संतुलन को बराबर रखकर ही हम अपने स्वस्थ होने का मापदंड रखते हैं और सकारात्मकता प्राप्त करते हैं इसी तरह विद्वानों ने श्री यंत्र की रचना भी की है। श्री यंत्र मेनन त्रिकोण होते हैं जिसमें पांच त्रिकोण बाहर की तरफ होते हैं छह अंदर की तरफ होते हैं कुल मिलाकर 43 त्रिकोण होते हैं बीच में एक मध्य बिंदु होता है जो शिव की मूल प्रकृतियों का द्योतक है। श्री यंत्र में मैग्नेटिक यानी चुंबकीय शक्ति होती है इसी के पूजा द्वारा इन शक्तियों को अपने अंदर प्रवाहित कर लेते हैं, तब हमारा कर्म और वह शक्तियां मिलकर हमारी सफलता को उचित स्थान देती है।