भाई दूज : जानें इस दिन का महत्व और भाई को टीका करने का शुभ मुहूर्त
शुक्ल पक्ष की द्वितीया पर मनाया जाता है. इस दिन का संबंध यम देव तथा यमुना से माना गया है
Bhai Dooj 2023 Shubh Muhurt
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:25 AM
Bhai Dooj 2023 Shubh Muhurt : भाई दूज का पर्व हर वर्ष कार्तिक माह की द्वितीया के दिन मनाई जाती है. इस साल 2023 में यह पर 15 नवंबर के दिन मनाया जाएगा. भैया दूज को यम द्वितीया के रुप में भी पूजा जाता है. भाई बहन के स्नेह को दर्शाता यह पर्व बेहद ही विशेष माना गया है. भैया दूज का महत्व पौराणिक रुप से बहुत खास रहा है. इस दिन पर जहां बहने अपने भाईयों को तिलक लगा कर उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं साथ ही भाई को प्रेम पूर्वक कई तरह के मिष्ठान एवं भोजन करवाती है. यह दिवस भाई बहन के अटूट प्रेम का प्रती बनता है. इस पर्व को भाई-बहन के रिश्ते की शुभता झलकती है तथा जीवन में शुभता को प्रदान करने वाली होती है.
भैया दूज मुहूर्त 2023
इस दिन बहनें अपने प्रेम को भाई के समक्ष उसके जीवन की शुभता एवं सौभाग्य के रुप में देने की कामना करने वाली होती हैं इस वर्ष भाई दूज का पर्व बुधवार को 15 नवंबर 2023 के दिन संपन्न होगा. इस वर्ष द्वितीया तिथि का प्रारम्भ 14 नवम्बर 2023 को दोपहर 14:36 पर आरंभ होगी और द्वितीया तिथि समाप्त होगी 15 नवम्बर, 2023 को 13:47 पर. इस समय के दौरान उदया तिथि की प्रप्ति 15 नवम्बर के दिन होने के कारण इस दिन मनाई जाने वाली है.
भैया दूज कथा और विशेष
भाई दूज का पर्व कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया पर मनाया जाता है. इस दिन का संबंध यम देव तथा यमुना से माना गया है. पौराणिक कथाओं के अनुसार यम और यमुना सूर्य देव की संतानें हैं तथा दोनों भाई बहन जब अपके कार्यों को प्राप्त करते हुए अलग अलग लोक में स्थापित होते हैं तो कई समय तक दोनों का मिलाप एक दूसरे से नहीं हो पाता है. ऎसे में एक बाय यम देव के मन में अपनी बहन से मिलने की इच्छा जागृत होती है तब वह यमुना से मिलने के लिए उनके पास यमुना घाट पर आते हैं.यमुना अपने भाई को बहुत दिनों बाद देख कर अत्यंत प्रसन्न होती है तथा आदर भाव से यमदेव का स्वागत करती हैं.
यमुना जी ने अपने भाई का स्वागत किया तथा उन्हें प्रेम से भोजन कराती हैं. बहन के इस प्रेम भाव को देख कर यमराज अत्यंत प्रसन्न होते हैं तथा उन्हें वर मांगने को कहते हैं तब यमुना जी कहती है की आज के दिन जैसे आप मेरे घर आएं हैं तो वैसे ही जब भाई अपनी बहन से मिलें और इस दिन उन सभी को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति प्राप्त हो. तब यमराज ने अपनी बहन की इच्छाओं को पूरा किया और तब से भैया दूज के दिन बहनें अपने भाईयों की सलामती के लिए उनका तिलकर करती हैं तथा भाई भी अपनी बहन के सुख एवं सौभाग्य की रक्षा का वचन देते हैं. इस प्रकार यह पर्व आज भी बेहद विशेष रुप से अपना स्थान बनाए हुए है.