स्वर्ग तथा नरक को लेकर अनेक धारणाएं प्रचलित हैं। धार्मिक मान्यता है कि स्वर्ग में आनंद के ढ़ेर सारे साधन सुख तथा सुविधाएं मौजूद हैं। वहीं नरक में भयानक से भयानक पीढ़ा तथा कष्ट दिए जाते हैं। यहां हम एक कथा के माध्यम से आपको स्वर्ग तथा नरक के विषय में बड़ा ज्ञान बता रहे हैं।

Heaven and Hell : स्वर्ग तथा नरक को लेकर अनेक धारणाएं प्रचलित हैं। खासतौर से हिन्दू धर्म की प्रबल मान्यता है कि जीवन में अच्छे कार्य करने वाले व्यक्ति को स्वर्ग मिलता है तथा बुरे कार्य करने वाले को नरक मिलता है। धार्मिक मान्यता है कि स्वर्ग में आनंद के ढ़ेर सारे साधन सुख तथा सुविधाएं मौजूद हैं। वहीं नरक में भयानक से भयानक पीढ़ा तथा कष्ट दिए जाते हैं। यहां हम एक कथा के माध्यम से आपको स्वर्ग तथा नरक के विषय में बड़ा ज्ञान बता रहे हैं।
कथा कुछ इस प्रकार से है कि बहुत ही पुण्य कर्म करने वाली एक वृद्घ महिला का अंतिम समय आ गया था। उस पुण्य आत्मा को लेने के लिए यमराज (Yamraj) उसके पास आए और कहा कि अब आपका इस धरती के ऊपर से जाने का समय आ गया है। वह पुण्य आत्मा यमराज (Yamraj) के साथ चलने के लिए तैयार हो गई। जब दोनों चलने लगे तो आत्मा ने यमराज से पूछा कि आप उसे नरक में ले जाएंगे अथवा स्वर्ग में ले जाएंगे? इस पर यमराज बोले कि आपने पृथ्वी पर केवल पुण्य कर्म किए हैं इसलिए आपको स्वर्ग अथवा नरक में ले जाने की बजाय आपको सीधे परमपिता परमात्मा के चरणों में बैकुण्ठ धाम (Baikunth Dham) ले जा रहा हूं। तब महिला की पुण्य आत्मा ने कहा कि बैकुण्ठ धाम (Baikunth Dham) जाने से पहले मैं एक बार स्वर्ग तथा नरक दोनों को देखना चाहती हूं। यमराज उस पुण्य आत्मा को स्वर्ग तथा नरक दिखाने के लिए तैयार हो गए।
यमराज पुण्य आत्मा को पहले नरक दिखाने ले गए। नरक में जाते ही उस पुण्य आत्मा को चारों तरफ जोर-जोर से रोने तथा चिल्लाने की दर्दभरी आवाजें सुनने को मिली। उसने वहां मौजूद नरक के वासियों से पूछा कि इस प्रकार क्यों तड़प रहे हो। उन्होंने बताया कि हम भूख के कारण तड़प रहे हैं। हम जब से नरक में आए हैं आज तक हमें भोजन नहीं मिला। तभी उस पुण्य आत्मा ने वहां एक बहुत बड़ा पतीला (विशाल बर्तन) देखा। वह पतीला 300 मीटर की ऊंचाई पर था। उसे देखकर पुण्य आत्मा ने पूछा कि इस पतीले में क्या है। नरकवासियों ने बताया कि पतीले में बेहद स्वादिष्ट खीर है। आए दिन इसमें तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवान भरे जाते हैं। उस पुण्य आत्मा ने कहा कि जब खीर मौजूद है तो आप लोग भूख के कारण क्यों तड़प रहे हैं। नरकवासी बोले कि पतीला इतनी दूर है कि हम उसमें से लेकर खीर खा ही नहीं सकते। दु:खी मन से वह पुण्य आत्मा नरक को देखकर यमराज के साथ वापस लौट गई।
नरक को देखने के बाद वह पुण्य आत्मा स्वर्ग को देखने के लिए स्वर्ग में पहुंची। स्वर्ग में सब लोग बहुत खुश तथा आनंद में थे। उस पुण्य आत्मा ने वहां पर भी 300 मीटर की ऊंचाई पर वैसा ही पतीला देखा जैसा नरक में देखा था। उसने स्वर्गवासियों से पूछा कि इस पतीले में क्या है। उन्होंने बताया कि पतीले में बेहद स्वादिष्ट खीर है। महिला पुण्य आत्मा ने पूछा किन्तु यह पतीला तो इतनी दूर है आप इस खीर को कैसे खाते हैं तथा खुश रहते हैं। स्वर्गवासियों ने बताया कि हमारे चारों तरफ बहुत सारे पेड़ हैं (ऐसे ही पेड़ नरक में भी हैं) उन पेड़ों से लकड़ी प्राप्त करके हमने सीढ़ी तैयार की है। उस सीढ़ी के सहारे हम पतीले तक आसानी से जाते हैं तथा स्वादिष्ट भोजन करके आनंदपूर्वक रहते हैं। इस प्रकार महिला को पूरा मामला समझ में आ गया। वह महिला पुण्य आत्मा बोली कि स्वर्र्ग तथा नरक कोई अलग दुनिया नहीं है। धरती पर ही स्वर्ग तथा नरक मौजूद है। जो आलसी लोग हैं आलस के कारण मेहनत नहीं करते वें स्वादिष्ट खीर होते हुए भी भूख से तड़पते हैं तथा जो मेहनती तथा पराक्रमी लोग हैं वे सीढ़ी बनाकर अपना जीवन खुशहाल बना लेते हैं। अब आप भी समझ गए होंगे कि स्वर्ग तथा नरक क्या है। Heaven and Hell :
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