Chaitra Navratri 2023 : देवी दुर्गा को समर्पित नौ दिन
Chaitra Navratri 2023: Nine days dedicated to Goddess Durga
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 11:37 PM
Chaitra Navratri 2023 : हिन्दू धर्म मे नवरात्रि के पावन पर्व का विशेष महत्व होता है । पूरे साल में चार बार नवरात्रि पड़ती है।चैत्र माह में पड़ने वाली नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि या वसंत नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ हो जाता है ।इस बार ये पावन पर्व 22 मार्च दिन बुधवार से 30 मार्च दिन गुरुवार तक रहने वाले है ।नवरात्रि के इन पवित्र नौ दिनो मे मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है ।इन नौ दिनो मे देवी उपासना का विशेष महत्व है । 9 दिनों तक मां दुर्गा के भक्त उपवास रखते हुए मां की आराधना,पूजा-पाठ और मंत्रों का जाप करते हैं। ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों तक शक्ति की विशेष पूजा करने से हर तरह की मनोकामना पूरी होती है और दुख-दर्द दूर हो जाते हैं।
Chaitra Navratri 2023 :
साहस और शक्ति की देवी दुर्गा को शक्ति के रूप मे जाना जाता है,जो सभी बुराईयों को दूर करती है ।इस नवरात्रि पर देवी दुर्गा का आगमन नाव पर हो रहा है और प्रस्थान हाथी पर ।इस बार मां का आगमन और प्रस्थान दोनो ही अत्यन्त शुभ है ।इस वर्ष नवरात्र पूरे नौ दिनो के है,यानि कोई तिथि घट या बढ़ नही रही है ।
नवरात्रि के दौरान मां भगवती के नौ रूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है और व्रत रखे जाते हैं।इस पर्व में जौ या ज्वार का बहुत महत्व होता है। नवरात्रि के पहले दिन यानी घटस्थापना या कलश स्थापना पर घर और मंदिरों में जौ बोने का महत्व है।सृष्टि की रचना मे सबसे पहले जो फसल विकसित हुई थी वह ज्वार या जौ थी,इसे पूर्ण फसल भी कहा जाता है ।इसलिए कलशस्थापन के समय जौ बोने का महत्व है ।
कलश स्थापना के साथ देवी के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होती है। मां शैलपुत्री की पूजा से शक्ति की प्राप्ति होती है,देवी के दूसरे स्वरूप ब्रह्राचारिणी की पूजा से मान-सम्मान, मां चंद्रघंटा की पूजा से एकाग्रता, देवी कूष्मांडा से मन में दया का भाव आता है,स्कंदमाता की आराधना से कामयाबी, मां कात्यानी की आराधना से बाधाएं दूर होती हैं, कालरात्रि की पूजा से शत्रुओं पर विजय प्राप्ति होती है,महागौरी की पूजा से सुख-समृद्धि और मां सिद्धिदात्री की पूजा करने पर जीवन की हर एक मनोकामना पूरी होती है।
इन नौ दिनो तक व्रती को मन और तन दोनो से शुद्ध रहना चाहिये।किसी को भी अपशब्द नही बोलने चाहिए ।जिस घर मे कलशस्थापन होती है वहा ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य होना चाहिए ।घर मे शान्ती का माहौल बनाये रखना चाहिए ।