Advertisement
Advertisement
चंद्र ग्रहण में गर्भवती महिलाओं को बाहर जाने से क्यों मना किया जाता है। जानें धार्मिक और वैज्ञानिक कारण। 03 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा और साल के पहले चंद्र ग्रहण के दौरान शुभ समय और सूतक काल के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें। इस दौरान सुरक्षित रहने के उपाय और सावधानियों को भी जानें।

Advertisement
हर साल सूर्य और चंद्र ग्रहण दो से तीन बार आते हैं। खगोल विज्ञान के अनुसार ये एक प्राकृतिक घटना है लेकिन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में इसे विशेष रूप से अशुभ माना जाता है। खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए ग्रहण का समय संवेदनशील माना जाता है। 03 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लग रहा है और इसका सूतक काल भी मान्य रहेगा। आइए जानते हैं कि क्यों गर्भवती महिलाओं को इस दौरान बाहर निकलने से मना किया जाता है और इसका वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व क्या है।
चंद्र ग्रहण 2026 03 मार्च को दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक रहेगा। सूतक काल की शुरुआत सुबह 09:06 बजे से होती है और शाम 06:47 बजे तक जारी रहती है। इस दौरान घर में विशेष नियमों का पालन करना चाहिए। धार्मिक दृष्टि से इसे अशुभ माना जाता है और खासकर गर्भवती महिलाओं को घर के भीतर ही रहने की सलाह दी जाती है।
धर्म और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहु और केतु ग्रह सूर्य या चंद्रमा को अपनी छाया में ढक देते हैं। इस समय इन ग्रहों का प्रभाव अधिक होता है। गर्भवती महिला यदि ग्रहण के दौरान बाहर जाती है तो उसके गर्भ में पल रहे शिशु पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसमें अंगों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है और जन्मजात रोगों का खतरा बढ़ सकता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण के दौरान पृथ्वी पर कुछ हानिकारक किरणें आती हैं। ये किरणें गर्भ में शिशु के लिए प्रतिकूल असर डाल सकती हैं। इसलिए सुरक्षा के लिए गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय घर में रहना जरूरी है। इस तरह मां और शिशु दोनों सुरक्षित रहते हैं।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।
Advertisement
Advertisement