
सनातन परंपरा में छठ महापर्व को न केवल आस्था, बल्कि शुद्धता, संयम और सूर्योपासना का सर्वोच्च प्रतीक माना गया है। चार दिनों तक चलने वाला यह अनुष्ठान व्रतधारियों के तप, विश्वास और संकल्प का अद्भुत संगम है।
पहले दिन नहाय-खाय से आत्मशुद्धि की शुरुआत होती है, दूसरे दिन खरना से व्रत की पवित्रता गहराती है, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य में भक्त डूबते सूर्य को जल अर्पित कर सूर्यदेव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जबकि चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर यह महापर्व पूर्ण होता है। लोकमान्यताओं के अनुसार, छठी मैया अपने भक्तों के सारे दुःख-दर्द हर लेती हैं और घर-परिवार में सुख, समृद्धि और शांति का वरदान देती हैं। आज, छठ पूजा के इस तीसरे दिन, जब सूर्यास्त के समय आस्था की लहरें नदियों, तालाबों और घाटों पर उमड़ेंगी। Chhath Puja 2025
आज, 27 अक्टूबर 2025 को सूर्यास्त का समय शाम 5 बजकर 40 मिनट के आसपास रहेगा। इसी क्षण व्रती महिलाएं और पुरुष सूर्य देव को जल अर्पित करेंगे। अगले दिन, यानी 28 अक्टूबर 2025 को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही चार दिवसीय छठ पर्व का समापन होगा।
संध्या अर्घ्य की तैयारियां सुबह से ही आरंभ हो जाती हैं। व्रती स्नान कर शुद्धता का पालन करते हुए पीले या सफेद वस्त्र धारण करते हैं।
अर्घ्य के लिए वे नदी, तालाब या किसी जलाशय के तट पर पहुंचते हैं।
एक स्वच्छ और सुरक्षित स्थान चुनकर वहां प्रसाद की टोकरी सजाई जाती है, जिसमें ठेकुआ, गुड़, सिंघाड़ा, केला और फल प्रमुख रूप से रखे जाते हैं।
सूर्यदेव के दर्शन से पहले घी का दीपक जलाया जाता है और वातावरण को भक्ति रस में भरा जाता है।
अर्घ्य देते समय भक्त ‘ॐ सूर्याय नमः’ और अन्य सूर्य मंत्रों का जाप करते हैं, ताकि सूर्यदेव परिवार पर कृपा बरसाएं और जीवन में आलोक बना रहे।
संध्या अर्घ्य का विशेष आध्यात्मिक अर्थ है। मान्यता है कि डूबते सूर्य को अर्घ्य देना केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन के अनंत चक्र का प्रतीक है जहां हर अंत एक नई शुरुआत का संकेत देता है। संध्या काल में सूर्यदेव अपनी पत्नी प्रत्यूषा, जो उनकी एक तेजस्वी किरण हैं, के साथ विराजमान रहते हैं। इसलिए इस समय अर्घ्य अर्पित करना सूर्य और प्रत्यूषा के मिलन का पूजन माना जाता है। कहा जाता है कि जो भक्त इस क्षण श्रद्धा से सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं, उनके घर में सुख, सौभाग्य और समृद्धि का वास होता है। संतान की उन्नति, परिवार की एकता और जीवन में उजाले की कामना के साथ दिया गया यह अर्घ्य — हर व्रती के लिए विश्वास और पुनर्जागरण का प्रतीक बन जाता है। Chhath Puja 2025