दत्तात्रेय जयंती के दिन करें इस स्त्रोत का पाठ, दूर होगा सभी कष्ट
दत्तात्रेय जयंती का पर्व मार्गशीर्ष माह में आने वाली पूर्णिमा को मनाया जाता है।
Dattatreya Jayanti 2023
भारत
RP Raghuvanshi
23 Dec 2023 08:54 PM
भारत
RP Raghuvanshi
23 Dec 2023 08:54 PM
Dattatreya Jayanti 2023 : दत्तात्रेय जयंती का पर्व मार्गशीर्ष माह में आने वाली पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस वर्ष दत्तात्रेय जयन्ती 26 दिसम्बर, 2023 को मंगलवार के दिन मनाई जाएगी। दत्तत्रेय जयंती के दिन इस स्त्रोत का पाठ करने से आपके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे।
गुरु-शिष्य परंपरा में इस दिन का बहुत विशेष स्थान
धार्मिक दृष्टिकोण से जहां ये दिन विशेष है वहीं गुरु-शिष्य परंपरा में इस दिन का बहुत विशेष स्थान रहा है। दत्तात्रेय जयंती के दिन भगवान दत्तात्रेय का पूजन किया जाता है, मार्गशीर्ष माह को पवित्र माना गया है। इस माह की पूर्णिमा को दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है। भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु और शिव के बाल रूप हैं।
Dattatreya Jayanti 2023
इस दिन पर किए जाने वाले धार्मिक कार्य शुभ फल करते हैं प्रदान
मान्यता के अनुसार, अगर इस दिन भगवान दत्तात्रेय की पूजा की जाए तो वे भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। भगवान दत्तात्रेय महर्षि अत्रि मुनि और अनुसूर्या के पुत्र हैं। जब त्रिदेवों ने माता अनुसूया की भक्ति की परीक्षा ली और उनसे प्रसन्न हुए तब ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव ने अनुसूया के पुत्र दत्तात्रेय के रूप में जन्म लिया। मार्गशीर्ष माह के समय पर आने वाली यह जयंती अत्यंत ही शुभ होती है। इस दिन पर किए जाने वाले धार्मिक कार्य शुभ फल प्रदान करते हैं।
दत्तात्रेय जयंती स्त्रोत लाभ
मार्गशीर्ष माह में आने वाली पूर्णिमा के दिन दत्तात्रेय जयंती का पर्व को मनाया जाता है। इस दिन का बहुत विशेष स्थान रहा है। दत्तात्रेय जयंती के दिन भगवान दत्तात्रेय का पूजन किया जाता है, इसी के साथ इस दिन दत्तात्रेय स्त्रोत का पाठ करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। मार्गशीर्ष माह को जहां विष्णु पूजन के लिए पवित्र माना गया है वहीं इस दिन श्री दत्तात्रेय पूजन की भी बहुत महिमा रही है। इस माह की पूर्णिमा को दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है। भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु और शिव के स्वरूप हैं और दत्तात्रेय को गुरुओं में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है। आइये जानें दत्तात्रेय स्त्रोत की महिमा व उसका महत्व।
दत्तात्रेय स्त्रोत की महिमा व उसका महत्व
भगवान दत्तात्रेय के तीन मुख और छह भुजाएं हैं। धर्म कथाओं के अनुसार प्राप्त होता है कि भगवान दत्तात्रेय ने पशुरामजी को श्रीविद्या मन्त्र प्रदान किया था जो गुरु शिष्य परंपरा में विशेष माना गया है। हर साल मार्गशीर्ष यानी अगहन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को भगवान दत्तात्रेय की जयंती मनाई जाती है। भगवान श्री दत्तात्रेय की जयंती के अवसर पर इस स्त्रोत का पाठ करने से सभी नकारात्मक तत्व दूर हो जाते हैं। भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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