धनतेरस पर माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों की जाती है? जानिए धनतेरस का धार्मिक महत्व, सोना-चांदी और बर्तन खरीदने की परंपरा, यम दीपदान का महत्व और इस पर्व से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं।

Dhanteras 2026 : धर्म एवं संस्कृति: हिंदू धर्म में धनतेरस का पर्व सुख-समृद्धि, धन-वैभव और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, धन के देवता कुबेर और आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। धनतेरस के दिन सोना, चांदी, आभूषण, पीतल और तांबे के बर्तन खरीदने की परंपरा भी सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि इस दिन शुभ वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में बरकत आती है। बाजारों में इस अवसर पर विशेष रौनक देखने को मिलती है। लोग अपने सामर्थ्य के अनुसार नई वस्तुएं खरीदते हैं और दीपावली के स्वागत की तैयारियां शुरू कर देते हैं।

इस वर्ष धनतेरस का पर्व 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे तक रहेगी।
धनतेरस का धार्मिक महत्व समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। उनके हाथों में अमृत कलश था। भगवान धन्वंतरि को देवताओं का वैद्य और आयुर्वेद का प्रवर्तक माना जाता है। इसी कारण धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से आरोग्य और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना धन-संपत्ति तथा आर्थिक समृद्धि के लिए की जाती है।
धनतेरस पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष विधान है। माता लक्ष्मी को धन, वैभव और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है, जबकि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का आरंभ करने वाला देवता माना जाता है। मान्यता है कि माता लक्ष्मी की पूजा से घर में धन-धान्य और समृद्धि आती है। भगवान गणेश की आराधना से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। इसीलिए दीपावली और धनतेरस के अवसर पर दोनों की एक साथ पूजा की जाती है।
हिंदू धर्म में कुबेर देव को धन और संपत्ति का अधिपति माना गया है। उन्हें देवताओं का कोषाध्यक्ष भी कहा जाता है। धनतेरस के दिन कुबेर देव की पूजा करके लोग अपने परिवार की आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि कुबेर देव की कृपा से धन-संपत्ति में वृद्धि होती है और घर में आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।

धनतेरस के दिन खरीदारी करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन लोग अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार सोना, चांदी, सिक्के, आभूषण और बर्तन खरीदते हैं। इसके अलावा झाड़ू, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और घर के उपयोग की दूसरी वस्तुओं की खरीदारी भी की जाती है। इस दिन खरीदारी के पीछे धार्मिक मान्यता यह है कि नई वस्तुओं के आगमन से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बढ़ती है। हालांकि, धनतेरस पर खरीदारी करना अनिवार्य नहीं है। इस पर्व का वास्तविक संदेश परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और संतोष को महत्व देना है।
धनतेरस की शाम दीपदान करने की भी परंपरा है। इस दिन घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाए जाते हैं। इसके साथ ही यम दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस की शाम दक्षिण दिशा में यमराज के निमित्त दीपक जलाने से परिवार पर अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। परिवार के सदस्य अपने घर की सुख-शांति और लंबी आयु की कामना करते हैं।
धनतेरस केवल सोना-चांदी और नई वस्तुएं खरीदने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह जीवन में धन के साथ स्वास्थ्य और खुशहाली के महत्व को भी समझाता है। भगवान धन्वंतरि की पूजा हमें निरोगी जीवन का महत्व बताती है, वहीं माता लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना समृद्धि की कामना से जुड़ी है।
यह पर्व संदेश देता है कि सच्ची समृद्धि केवल धन-संपत्ति में नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, परिवार की खुशियों, आपसी प्रेम और संतोष में भी छिपी होती है।
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