Sanskrit : यज्ञायज्ञा वो अग्नये गिरागिरा च दक्षसे।
प्रप्र वयममृतं जातवेदसं प्रियं मित्रं न शंसिषम्॥ ऋग्वेद ६-४८-१॥
Hindi : हे मनुष्य! तुम यज्ञनिक कर्म और ज्ञान की वाणी द्वारा परमेश्वर की आराधना करो। इससे तुम्हें ऊर्जा और ज्ञान की प्राप्ति होगी। अजर अमर परमेश्वर हमारा प्रिय मित्र है जो हमारे ज्ञान की वृद्धि करता है और हमें उत्तम कर्म करने की प्रेरणा देता है। (ऋग्वेद ६-४८-१)
English : O People! You worship the Supreme Lord through your Yajnik deeds and the voice of knowledge. This will give you energy and knowledge. Ageless and immortal, God is our dear friend who increases our knowledge and inspires us to do good deeds. (Rig Veda 6-48-1)