Sanskrit : आ सखायः सबर्दुघां धेनुमजध्वमुप नव्यसा वचः।
सृजध्वमनपस्फुराम्॥ ऋग्वेद ६-४८-११॥
Hindi : हे मित्रों! जो विद्वान और उपदेशक प्रभावी नवीन वाणी शैली द्वारा उपदेश करते हैं। उनसे वह नवीन शैली को प्राप्त करो। अपनी वाणी को उस से युक्त करो और भाषा शैली को ओर अधिक समृद्ध और प्रभावशाली बनाओ। (ऋग्वेद ६-४८-११)
English : O friends! The scholars and preachers who preach through effective new speech genre. Get that new style from them. Equip your speech with that and enrich the language genre. (Rig Veda 6-48-11)