नरसिंह द्वादशी 2024 का व्रत कैसे करें, जानें पूजा और नरसिंह भगवान की आरती
Narasimha Dwadashi
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 01:37 AM
Narasimha Dwadashi : नरसिंह द्वादशी का व्रत फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि के दिन रखा जाता है. इस दिन को नृसिंह द्वादशी के रुप में मनाया जाता है. इस द्वादशी का प्रभाव जीवन में आने वाले संकटों से बचाने वाला होता है. साहस एवं शक्ति को प्रदन करता है. हर प्रकार के भय से मुक्ति प्रदन करता है. अज्ञात भय से मुक्ति दिलाने वाला यह व्रत बच्चों के लिए बहुत शुभ माना जाता है. यदि बच्चे को किसी प्रकार का डर सताता है या स्वास्थ्य कमजोर है तो इस दिन माताएं अपने बच्चों के लिए इस व्रत को अवश्य कर सकती हैं इसके बहुत ही शुभ फल प्राप्त होते हैं.
नरसिंह द्वादशी पौराणिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार बाल प्रह्लाद को बचाने हेतु भगवान श्री हरि ने लिया था नृसिंह अवतार. इस कारण से इस दिन को संतान की सुरक्षा हेतु बहुत विशेष माना जाता है. हर प्रकार की यातनाओं से मुक्ति मिलती है और सुख की प्राप्ति होती है. नरसिंह द्वादशी का क्या है पौराणिक महत्व और इस दिन कैसे करें नरिसंह भगवान की पूजा आइये जानते हैं विस्तार पूर्वक.
हिंदू धर्म में नरसिंह द्वादशी का विशेष महत्व है, माना जाता है कि इस दिन भगवान श्री विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा हेतु नरसिंह भगवान ने स्तंभ अर्थात एक खंबे से निकल कर हिरण्यकश्यप नमक दैत्य का अंत किया. प्रह्लाद भगवान श्री हरि का परम भक्त का किंतु उसके पिता हिरण्यकश्यप को श्री हरि से अत्यंत रोष था इस कारण उसने अपने पुत्र प्रह्लाद को भी बहुत कष्ट दिए और अंत में भगवान ने अपने भक्त को बचाने हेतु नृसिंह अवतार लिया जो आधा मनुष्य एवं आधा सिंह रुप था. अत: नरसिंह द्वादशी के दिन भगवान श्री विष्णु के इस अवतार का पूजन करने से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख की प्राप्ति संभव होती है.
नरसिंह द्वादशी पूजा एवं आरती
नरसिंह द्वादशी के दिन पूजन एवं व्रत का विधान मान्य है. इस दिन द्वादशी तिथि पर सूर्योदय से पुर्व स्नान के पश्चात भ्गवान का पूजन आरंभ किया जाता है. द्वादशी के दिन मंदिर में भगवान नरसिंह के साथ साथ श्री विष्णु जी का विधि-विधान से पूजा करते हैं. इस दिन नरसिंह भगवान की कथा एवं आरती की जाती है. भगवान को भोग अर्पित किया जाता है. इस दिन नरसिंह भगवान की आरती करने से भक्त को मिलती है हर प्रकार के भय से मुक्ति. मनोकामनाएं होती हैं पूर्ण.
नरसिंह भगवान की आरती
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे ।स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे, स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटेॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे ।जनका ताप हरे ॐ जय नरसिंह हरे ॥तुम हो दिन दयाला, भक्तन हितकारीप्रभु भक्तन हितकारी । अद्भुत रूप बनाकरअद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी ॥सबके ह्रदय विदारण, दुस्यु जियो मारीप्रभु दुस्यु जियो मारी । दास जान आपनायोदास जान आपनायो, जनपर कृपा करी ॥ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे,प्रभु माला पहिनावे । शिवजी जय जय कहकरपुष्पन बरसावे, ॐ जय नरसिंह हरेॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे ।आचार्या राजरानी