
Kajari Teej 2023 Date: दुर्लभ योगों का संयोग बनाएगा कजरी तीज को और भी खास सावन माह के समय तीज का उत्सव कई रुपों में मनाया जाता है। यह विभिन्न तिथियों पर आती है, इसी में एक तीज तृतीया तिथि के दौरान पड़ती है जिसे कज्जली तीज या कजरी तीज के रुप में जाना जाता है।
कजरी तीज का व्रत विवाहित महिलाएं अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। अपने सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए इस व्रत को करती हैं। मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियां नहीं रहती हैं। इस व्रत को कुंआरी कन्याएं भी कर सकती हैं। अपने भावी जीवनसाथी के साथ अच्छे जीवन की कामना से यह व्रत रख सकती हैं।
कजरी व्रत के दौरान महिलाएं व्रत को करती हैं तथा देवी पार्वती का पूजन करती हैं। यह व्रत दांपत्य जीवन की शुभता के लिए किया जाता है। पति की लंबी उम्र के लिए इस व्रत को करते हैं। कजरी तीज का व्रत तृतीया तिथि को रखा जाता है। यह सावन और भाद्र दो महीनों में आता है। सावन माह में आने वाली कजरी तीज का व्रत 5 जुलाई को रखा जाएगा। इसके अलावा भी कुछ अन्य तीज का पर्व भी सावन के समय पर पड़ेगा जिसमें से यह सबसे पहले आने वाली तीज होती है।
आइए जानते हैं सावन में आने वाली इस पहली कजरी तीज का महत्व और इससे मनाए जाने की परंपराएं - कजरी तीज व्रत 5 जुलाई 2023 को मनाया जाएगा।
तृतीया तिथि का आरंभ 10.30 बजे से होगा
तृतीया तिथि अगले दिन 6 जुलाई को सुबह 6.31 बजे पर समाप्त होगी।
कुछ पर्व जब माह के साथ नक्षत्र का योग पाते हैं तो उनका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है, इसी क्रम में इस वर्ष कजरी तीज का आगमन जब होगा, उस दिन श्रवण नक्षत्र का योग भी प्राप्त होगा। इस तिथि के साथ नक्षत्र का शुभ योग होने से यह बेहद शुभदायी होगी। कजरी तीज के दिन श्रवण नक्षत्र का आरंभ सुबह 05:41 से होगा।
कजरी तीज के दिन पर देवी पार्वती का पूजन होता है, यह वही समय होता है जब जया पार्वती व्रत का समापन भी होता है। इस समय के दौरान विशेष विधि विधान के साथ पूजन संपन्न होता है। किंतु यदि संपूर्ण विधि के साथ इस व्रत न भी कर पाएं तो केवल आपकी सच्ची भक्ति भी इस व्रत के पुण्य फलों को पूर्णता से प्रदान करने वाली होगी और आप इस व्रत के लाभ को पाने में सफल रहेंगे। व्रत के दिन प्रात:काल से ही तैयारियां आरंभ कर देनी चाहिए जिसमें पूजन सामग्री को शामिल करते हुए मंदिर में पूजा स्थान पर देवी पार्वती जी एवं महादेव जी का चित्र अथवा प्रतिमा को स्थापित करके पूजा आरंभ करनी चाहिए। आचार्या राजरानी