एक ही कुल के निःशंतान मृतक लोगो के लिए आवला नवमी में क्या विशेष करे ?
भारत
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 04:32 AM
भारत
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 04:32 AM
सेलिब्रिटी वास्तु शास्त्री डॉ सुमित्रा अग्रवाल जी से
सेलिब्रिटी वास्तु शास्त्री डॉ सुमित्रा अग्रवाल, कोलकाता
इंटरनेशनल वास्तु अकादमी सिटी प्रेजिडेंट कोलकाता
2 नवंबर को है आवला नवमी ।
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी 'अक्षयनवमी' , 'आवलानवमी' और 'कूष्माण्डनवमी' भी कहलाती है।
पूजा के दिन के विषय में ब्रह्मवैवर्तपुराण में क्या बताया गया है
यदि दो दिन नवमी पड़ रही हो तो क्या करे
ब्रह्मवैवर्तपुराण - 'अष्टम्या नवमी विद्धा कर्तव्या फलकाङ्क्षिणा न कुर्यान्नवम तात दशम्यां तु कदाचन ॥ '
अष्टमी नवमी एक दिन , नवमी दशमी एक दिन तब इस वचन के अनुसार अष्टमीविद्धा नवमी ग्रहण करनी चाहिये। दशमीविद्धा नवमी त्याज्य है।
कई लोग व्रत करते है। व्रत जो न कर सके वे पूजा अवश्य करे। व्रत करने वाले लोग शंकल्प जरूर करे।
एक ही कुल के निःशंतान मृतक लोगो के लिए आवला नवमी में क्या विशेष करे
आंवले के पेड़ की पूजा
धात्रीवृक्ष (आँवले) के नीचे पूर्व दिशा में मुख करके बैठ जाये और 'ॐ धात्र्यै नमः' मन्त्र से आवाहनादि षोडशोपचार पूजन करे।
पितरो के तर्पण के लिए विशेष क्या करे
आँवले के वृक्ष की जड़ में दूध की धारा गिराते हुए पितरों का तर्पण करे
एक ही कुल के निःशंतान मृतक लोगो के लिए आवला नवमी में क्या विशेष करे
ये मंत्र उच्चारण करते हुए -
पिता पितामहाश्चान्ये अपुत्रा ये च गोत्रिणः ।
ते पिबन्तु मया दत्तं धात्रीमूलेऽक्षयं पयः ॥
ते पिबन्तु मया दत्तं धात्रीमूलेऽक्षयं पयः ॥
अर्थात -पिता, दादा और अन्य जिनके कोई पुत्र नहीं है और जो एक ही कुल के हैं उन्हें वह अटूट दूध पीने दो जो मैंने उन्हें माँ की जड़ में दिया है। उन्हें वह अटूट दूध पीने दो जो मैंने उन्हें माँ की जड़ में दिया है।
आँवले के तने में सूत्र वेष्टन क्यों करे
आँवले के वृक्ष के तने में सूत्र वेष्टन कर। मंत्र उच्चारण करते हुए -
आब्रह्मस्तम्बपर्यन्तं दामोदरनिवासायै धात्र्यै देव्यै नमो नमः । सूत्रेणानेन बध्नामि धात्रि देवि नमोऽस्तु ते ॥
देवी को प्रणाम जो ब्रह्मांड की माता हैं और जो ब्रह्मा के स्तंभ तक भगवान दामोदर के निवास में निवास करती हैं। हे देवी, माता, मैं आपको इस धागे से बांधती हूं, मैं आपको प्रणाम करती हूं।
एक ही कुल के निःशंतान मृतक लोगो के लिए आवला नवमी में क्या विशेष करे
इसके बाद कर्पूर या घृत पूर्ण दीप से आँवले के वृक्षकी आरती करे। आरती के बाद प्रदक्षिणा करे और हर प्रदक्षिणा में ये मंत्र बोले -
यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च ।
तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे ॥
अर्थात -पिछले जन्म में जो पाप किए गए हैं, परिक्रमा के हर कदम पर वे सभी नष्ट हो जाएं।
ॐ धात्र्यै नमः बोल कर आँवलेके वृक्षके नीचे ब्राह्मण भोजन भी कराना चाहिये।
स्वयं भी आँवले के वृक्ष के सन्निकट बैठकर भोजन करना चाहिये। एक पका हुआ
आवला नवमी में कुम्हड़ा से क्या करे
कुम्हड़ा लेकर उसके अंदर रत्न, सुवर्ण, रजत या रुपया आदि रखकर निम्न संकल्प करे
एक ही कुल के निःशंतान मृतक लोगो के लिए आवला नवमी में क्या विशेष करे
ममाखिलपापक्षयपूर्वक सुखसौ भाग्यादीनामुत्त रोत्तराभिवृद्धये कूष्माण्डदानमहं करिष्ये ।
अर्थात - मैं अपने सभी पापों के विनाश के लिए , सुख, भाग्य और वृद्धि के लिए कुष्मांडा (कुम्हड़ा ) दे रही हु। ऐसा कह कर किसी विद्वान् तथा सदाचारी ब्राह्मण को तिलक करके दक्षिणा सहित कूष्माण्ड दे दे और निम्न प्रार्थना करे
कूष्माण्डं बहुबीजाढ्यं ब्रह्मणा निर्मितं पुरा । दास्यामि विष्णवे तुभ्यं पितॄणां तारणाय च ॥
अर्थात -अतीत में, भगवान ब्रह्मा ने कुष्मांडा वृक्ष का निर्माण किया, जो कई बीजों से समृद्ध है। अब मैं इसे पितरों के निमित्त भगवान विष्णु को अर्पित करती हु ।
पितरों के शीत निवारण के लिये यथाशक्ति कम्बल आदि ऊर्ण वस्त्र भी सत्पात्र ब्राह्मण को देना चाहिये।