प्रदूषण आन दो, आन दो, आन दो, तो फिर दिवाली ही खाली न्यायालय में क्यूँ ?
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 12:27 PM
अंजना भागी
ऐ प्रदूषण तुम हमेशा 30 नवम्बर तक ही क्यों मशहूर रहते हो ? कुछ भी बैन करवा देते हो, प्रदूषण क्या तुम्हें इतना भी नहीं पता कि नवम्बर महीना तो बिलकुल वर्षा ऋतु के बाद ही आता है । आसमान इतना भी प्रदूषित नहीं होता कि कुछ बच्चे व युवा कुछ पटाखे फुलझड़ियाँ ही छोड़ लें । वैसे भी भारत एक गरीब देश है । जिसकी 70 प्रतिशत आबादी तो गाँव देहात में ही बस्ती है । गाँव में रहने वाले अधिकांशत; लोगों कि तो जीवन यापन कि आवश्यकतायेँ ही पूरी नहीं पड़ती तो बॉम्ब पटाखे क्या चलाएँगे । क्या सारा रोब बड़े बड़े शहरों में रहने वालों के ही लिए है । देखो न ? जरा दिल्ली नोएडा से आगे जाते ही मैदान के मैदान सुखे खाली पड़े हैं मजाल है कोई दो पेड़ लगा दे । सारा प्रैशर शहरों पर ही क्यों ? आस पास से ताजी ऑक्सिजन यदि उड़कर दिल्ली एन सी आर में भी आ जाएगी तो किसी का क्या चला जाएगा । कहीं पर्यावरणविद और समाज सुधारक भी मशहूर नेता तो नहीं हैं .....मैं तो कहती हूँ कि इन सब की कड़ी निंदा कि जानी चाहिए ।
प्रदूषण आन दो, आन दो, आन दो, तो फिर दिवाली ही खाली न्यायालय में क्यूँ ?
दिल्ली एन सी आर में करोना ने क्या कम मुशकिलों के पहाड़ तोड़े जो ये 30 नवम्बर तक का पोलुयशन का तड़का और लग जाता है । दूर – दराज गाँव, शहरों में हजारों लोग पटाखों को बनाने का कारोबार लगाते हैं । कितने ही लोग उनमें रोजगार पाते हैं । अब यदि पटाखे इतना ही पोल्युशन फैलाते हैं तो बैन सिर्फ 30 नवम्बर तक ही क्यों पूरे साल क्यों नहीं । और भी बहुत से मौके त्योहार हैं जब लोग खूब पटाखे छुटाते हैं और कई कई तरह का पोल्युशन फैलाते हैं पेड़ों के पेड़ ट्री बना दिये जाते हैं । ये तो वो ही बात हुई न कबड्डी में यदि कोई पहलवान आ जाए तो दूसरे पाले वाले दूर – दूर भाग खुद को बचाते हैं और यदि कोई शरीफ आ जाए तो पाले पर ही पकड़ कर पटखनी दे देते हैं । अमा बात क्या हुई दिल्ली एन.सी. आर में जगह - जगह सड़कें टूटी पड़ी हैं नहा के घर से आओ पाउडर सड़कों की धूल लगा देती है । वो क्या प्रदुषर्ण नहीं है ?
प्रदूषण आन दो, आन दो, आन दो, तो फिर दिवाली ही खाली न्यायालय में क्यूँ ?
पटाखे इतने ही जहरीले हैं तो बैन केवल 30 नवंबर तक ही क्यों? पूरे साल ताजी हवा और स्वास्थ्य की जरूरत क्यों नहीं ? पटाखे उद्योग को बंद ही क्यों नहीं कर दिया जाता ? पटाखा उद्योग वालों को पुनर्वास भत्ता दे भारत को पटाखा मुक्त देश घोषित केआर दें ? पटाखा साल में एक बार ही चलता है लक्ष्मी पूजन के बाद 5-6 घंटों को ही चलता है । और कुल मिलाकर प्रदूषण का लगभग 4 से 5 प्रतिशत प्रदूषण भी बढ़ाता है । पर यदि प्रदूषण के अन्य कारणो पर अधिक ध्यान दे दिया जाये जैसे पराली जलाने को रोकना । टूटी सड़को की मरम्मत करवा देना सड़क किनारे कच्ची या टूटी पटरियों पर घास लगवा देना । सार्वजनिक प्रवाहन का समय से चलना तो ?
प्रदूषण आन दो, आन दो, आन दो, तो फिर दिवाली ही खाली न्यायालय में क्यूँ ?
धर्म आत्मा है । क्यों राजनीति रूपी शरीर से इस त्योहार की खुशी को भंग करना वैसे भी महंगाई, बेरोजगारी अब इतनी बड़ गई है कि यदि एक पटाखा छुड़ायेगा तो कम से कम 10 का तो वहीं 30-40 लोगों का बड़ी दूर तक दिल बहलाएगा । इसलिए अमाँ पटाकों को ही प्रदूषण का असली विलन ना बनाएँ
कुछ त्योहार तो लाखों भारतीयों के जीवन यापन का मुख्य साधन बनते हैं । हम दूसरे लोगों की भलाई के बारे में इतने बेपरवाह कैसे हो सकते हैं ? आर्थिक विकास के लिए न्यायिक व्यवस्था का विरोध करना और याचिका दायर करके इन को रोकना क्या अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारना नहीं हैं ? हिन्दू त्योहार उत्सव कि तरह होते हैं जिसमें सभी कमाते हैं और खर्च भी करते हैं राजस्व में भी वृद्धि होती है ।
प्रदूषण आन दो, आन दो, आन दो, तो फिर दिवाली ही खाली न्यायालय में क्यूँ ?
दिल्ली एन.सी.आर में लाखों श्र्रमिक रहते हैं जहां भी ये काम करते हैं वहीं चूल्हे जला खाना बनाते हैं गर्मी में तो नहीं पता चलता पर यदि सर्दी में आप इनके रहने के स्थान से गुजरें तो आसमान में धुआँ पूरी चादर कि तरह उपर धीरे – धीरे चड़ रहा होता है । वाहनों से होने वाला प्रदूषण, सार्वजनिक वाहनों का कम इस्तेमाल, औद्योगिक प्रदूषण और निर्माण उद्योग हैं। कारक हैं लगभग 95 प्रतिशत प्रदूषण के तो फिर दिवाली ही खाली न्यायालय में क्यों ?