भगवान शिव के 11 रूद्र अवतार हैं, और उनमें से एक हैं पवन पुत्र हनुमान।

Lord Hanuman[/caption]
इसके साथ ही जब प्रभू श्री राम युद्ध से लौट कर अयोध्या वापस आए थे, तब हनुमान जी अनन्य भक्त के रूप में प्रभु श्री राम की सेवा प्रतिदिन करते थे। एक दिन जब श्री राम ने गोलोक जाने का विचार किया, तब हनुमान जी ने माता सीता से पूछा 'हे माता आपने मुझे अमर होने का वरदान तो दे दिया है। किंतु आपने यह नहीं बताया कि जब मेरे प्रभु श्री राम धरती से चलें जाएंगे, तब मैं क्या करूंगा? तब महावीर बजरंगी हनुमान जी ने माता सीता से अपना वरदान वापस लेने को कहा।
हनुमान जी की बातें सुनने के बाद माता सीता समझ चुकी थीं कि वो हनुमान जी को नहीं समझा पाएंगी। इसलिए वो हनुमान जी को भगवान राम जी के पास ले गईं और उन्हें पूरी बात बताई। तब भगवान राम ने हनुमान जी को कहा कि इस धरती पर कोई भी अमर नहीं है, लेकिन तुम्हें यह वरदान मिला है। भविष्य में ऐसा दौर आएगा, जब कोई भी देवता धरती पर अवतरित नहीं होगे, तब तुम्हें लोगों का उद्धार करना है। और अब जब भी कोई भी मुझे स्मरण करेगा, तो उस राम भक्त के हर संकट तुम दूर करोगे। प्रभु की बात सुनकर हनुमान जी ने अपने हठ को त्याग दिया और इस वरदान को भगवान श्री राम की आज्ञा मानकर स्वीकार कर लिया। इसलिए माना जाता है कि आज भी हनुमान जी धरती पर वास करते हैं और राम भक्तों के संकट हरते हैं।