नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा, इस मंत्र से करें पूजा, दूर होंगे सारे कष्ट
Maa Kushmanda
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 07:57 PM
Maa Kushmanda : 18 अक्टूबर 2023 को बुधवार के दिन धारदीय नवरात्रि का चतुर्थ दिन होगा. शारदीय नचरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्माण्डा का पूजन किया जाता है. देवी को योग ध्यान की प्राप्ति हेतु पूजा जाता है. ब्रह्माण की शक्ति का अंश इन्हीं में विराजमान है. देवी कुष्मांडा की पूजा द्वारा भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं. देवी का पूजन बौद्धिक एवं ज्ञान को प्रदान करने वाला होता है.
Shardiya Navratri 4th Day :
नवरात्रि का चौथा दिन भक्ति के साथ साथ शक्ति प्राप्ति का समय भी माना जाता है. देवी की शक्ति द्वारा ही सृष्टि के निर्माण को आधार प्राप्त होता है. इसलिए इस दिन सिद्धियों एवं शक्तियों का आहवान करते हुए पूजा भक्तों में सकारात्मक ऊर्जाओं का प्रवाह करने वाली होती है. मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा को कुम्हड़ा की बलि भी अर्पित की जाती है. देवी कुष्मांडा की पूजा करने से आकस्मिक समस्याओं के प्रभाव से मुक्ति मिलती है तथा दुख दूर हो जाते हैं.
माँ कूष्माण्डा पूजन विधि
पंचांग अनुसार 18 अक्टूबर 2023 को बुधवार के दिन देवी के इस चतुर्थ रुप का पूजन संपन्न होगा. इस दिन अनुराधा नक्षत्र की प्राप्ति होगी तथा आयुष्मान एवं सौभाग्य नामक शुभ योगों की प्राप्ति होगी. सुबह के समय 07:30 से 13:30 तक का समय पूजा हेतु शुभ रहेगा.
माता का पूजन प्रात:काल आरंभ किया जाता है. शारदीय नवरात्रि पूजा में इस दिन देवी को लाल पुष्प अर्पित किया जाता है. मां कूष्मांडा के पूजन में खीर और मालपुओं का भोग विशेष रुप से अर्पित किया जाता है. इस दिन देवी का यह स्वरूप आद्यशक्ति के पूजन हेतु अत्यंत ही शुभ फलों को प्रदान करता है.
देवी कूष्माण्डा का निवास सूर्यलोक में माना गया है. इस दिन देवी का पूजन करने से व्यक्ति को यश और मान सम्मान मिलता है. देवी को अष्टभुजा युक्त बताया गया है. देवी के हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, कलश, चक्र तथा गदा विराजमान हैं. माता अपने भक्तों को सुख संपत्ति एवं ज्ञान का आशीर्वाद प्रदान करती है. माता के मंत्रों का जप करते हुए पूजा भक्ति के साथ साथ मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली होती है.
या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता.नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥Maa Kushmanda सृष्टि की उत्पत्ति का आधार
शाक्त पूजन परंपरा में मां कूष्मांडा की पूजा सृष्टि के उत्पन्न होने की कथा से भी संबंधित मानी गई है. देवी पुराण में माता की मुस्कान से ही ब्रह्माण में चमक उत्पन्न होती है. कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि देवी की मंद मुस्कान मात्र से ब्रह्माण्ड का अस्तित्व सामने आता है इसी कारण देवी को कुष्मांडा नाम से पुकारा जाता है. घने अंधकार में माँ कुष्मांडा की मंद मुस्कान के साथ ही समस्त ओर ज्ञान का प्रकाश की आलौकित हुआ जो सभी के अस्तित्व हेतु विशेष घटना थी. इसी कारण से कहा जाता है की माता की शक्ति द्वारा ही संसार की समस्त चीजों को शक्तियों की प्राप्ति होती है. ऎसे में इस दिन माता का पूजन शक्ति एवं सिद्धियों को प्रदान करने वाला माना जाता है.