
Makar Sankranti 2023 : अंजना भागी ‘संक्रांति’ काल जिसे हम अग्रेज़ी में ट्रांजिशन भी कह सकते हैं, जिसका अर्थ है एक से दूसरे में जाने का समय। हममें से अधिकतर लोग मकर संक्रांति का पर्व वर्षों से 14 जनवरी को ही मनाते आ रहे हैं।
इसलिए हम सब को ही इस बार मकर संक्रांति का 15 जनवरी को मनाया जाना कुछ अलग सा ही लग रहा है। लेकिन कुछ पंडितों की ग्णना के अनुसार अब यह 2081 तक 15 जनवरी को ही होगा। क्योंकि जैसा कि अब हम सब ही जानते हैं कि- सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश (संक्रमण) का दिन "मकर संक्रांति" के रूप में जाना जाता है। ज्योतिषविदों के अनुसार प्रतिवर्ष इस संक्रमण में 20 मिनट का विलंब होता जाता है। इस प्रकार तीन वर्षों में यह अंतर एक घंटे का हो जाता है तथा 72 वर्षों में यह फर्क पूरे 24 घंटे का बन जाता है। जैसे की सायं 4 बजे के बाद संध्याकाल माना जाता है और हमारे भारतीय ज्योतिष विज्ञान के अनुसार संध्या काल के बाद सूर्य से सम्बंधित कोई भी गणना उस दिन न करके अगले दिन से की जाती है। तो इस हिसाब से वास्तव में मकर संक्रांति 2008 से ही 15 जनवरी को हो गई थी। लेकिन सूर्यास्त न होने के कारण 14 जनवरी को ही मानते आ रहे थे। 2023 में संक्रांति का समय 14 जनवरी की शाम को 9:35 का है, अर्थात सूर्यास्त हो चुका है। इसलिए 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाई गई। वैसे तो 2008 से 2080 तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को हो चुकी है। और 2081 से मकर संक्रांति 16 जनवरी को होगी। वैसे उसके बाद भी कुछ लोग कुछ वर्ष तक 15 जनवरी को ही मनाते रहेंगे।
[caption id="attachment_58955" align="alignnone" width="750"]
Makar Sankranti 2023[/caption]
संक्रांति का चन्द्र महीनों की तिथि से कोई मतलब नहीं है। संक्रांति की अपनी गणना है जो कि अंग्रेजी से संयोग कर जाती है। 72 साल की रेंज में संक्रांति चक्र एक दिन बढ़ जाता है। 1935 से 2008 तक मकर संक्रांति 14 जनवरी को रही और 1935 से पहले 72 साल तक यह 13 जनवरी को रही होगी। इसी कारण बहुत से लोगों ने मकर संक्रांति का पर्व आज 15 जनवरी को मनाया। सैक्टर 11 में एल ब्लॉक जिम वाले पार्क में सैक्टर के सभी निवासियों ने एक साथ मनाया। सैक्टर 45 में सीपी श्रीवास्तव ने सीरेन होम में हवन पूजन कर सेक्टरवासियों को खिचड़ी प्रसाद खिलाया।