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जिन लोगों ने टीवी पर महाभारत देखा है, उन लोगों को महात्मा विदुर अच्छी तरह से याद होंगे। महात्मा विदुर महाभारत कथा के मुख्य पात्रों में से एक हैं। वह बेहद ही बुद्धिमान और नीतियों और शास्त्रों के ज्ञाता थे। उनकी नीतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी महाभारत काल में थी। महाभारत युद्ध से पहले महात्मा विदुर और धृतराष्ट्र के बीच जो भी वार्तालाप हुआ, उसे विदुर नीति (Vidur Niti) के नाम से जाना जाता है। इसमें धन (Money) के बारे में भी बहुत महत्वपूर्ण बातें बताई गईं हैं। महात्मा विदुर के मुताबिक कुछ लोगों को पैसा देना उस पैसे से हाथ धोना है क्योंकि ये लोग कभी भी उधार नहीं लौटाते हैं।
जिन पर भरोसा न हो विदुर नीति के मुताबिक ऐसे लोग जिन पर आपको अच्छी तरह भरोसा न हो, उन्हें कभी भी पैसा उधार न दें। ऐसे लोगों को दिए गए पैसे के वापस मिलने की संभावना न के बराबर ही होती है। लिहाज व्यक्ति को अच्छी तरह जांचने-परखने के बाद ही उधार दें।
आलसी लोग महात्मा विदुर कहते हैं आलसी व्यक्ति को भूलकर भी अपना धन उधार न दें। ये लोग पैसे की कीमत नहीं समझते और उसे लौटाने के लिए प्रयास नहीं करते। वे हमेशा चालाकियों से दूसरों को लूटने की फिराक में रहते हैं। ऐसे लोगों से भी उधार दिया गया पैसा वापस मिलने की उम्मीद करना बेकार है।
प्रभावशाली लोग ऐसे लोग जो बहुत प्रभावशाली हों, उन्हें भी पैसा उधार देने से बचें। यदि उनकी नीयत बदल गई तो आप उनसे अपना पैसा वापस नहीं ले पाएंगे।
अनैतिक काम करने वाले लोग जो लोग गलत काम करते हों या अपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहते हों, उन्हें गलती से भी पैसे न दें। ये लोग आपके पैसे का गलत उपयोग भी करेंगे और वापस देने के समय साफ मुकर भी सकते हैं। चूंकि वे अनैतिक कामों से जुड़े रहते हैं ऐसे में उनसे दुश्मनी मोल लेना भी सही नहीं है।
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