Padmini Ekadashi 2023 Date: अधिकमास की पहली पद्मिनी एकादशी का पूजन करता है सभी पापों का नाश
Padmini Ekadashi 2023 Date:
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 11:43 AM
Padmini Ekadashi 2023 Date: When is Padmini Ekadashi and Purushottama Ekadashi in 2023 अधिकमास के दौरान आने वाली एकादशी पद्मिनी एकादशी के रुप में पूजी जाती है.पद्मिनी एकादशी पंचांग के अनुसार 29 जुलाई 2023 के दिन मनाई जाएगी. इस एकादशी को पुरुषोत्तम एकादशी के नाम और अधिकमास एकादशी के रुप में जाना जाता है. एक लम्बे अंतराल में आने के कारण ही यह एकादशी सभी एकादशियों में विशेष स्थान रखती है.
padmini ekadashi vrat significance हर तीन साल में आने वाले अधिकमास में इस एकादशी का संयोग बेहद शुभ होता है. इस एकादशी का महात्म्य मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है. इस साल पद्मिनी एकादशी का समय सावन माह के दौरान पड़ने वाला है. सावन माह में अधिकमास का प्रवेश होने से यह एकादशी और भी खास बन गई है. इस दिन भगवान श्री विष्णु पूजन के साथ ही भगवान शिव का अभिषेक करना मनवांछित फलों को देने वाला होगा.
Padmini Ekadashi 2023 Date पद्मिनी एकादशी कब मनाई जाएगी
अधिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी को पद्मिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. 28 जुलाई 2023 को दोपहर 14.51 मिनट पर एकादशी का आरंभ होगा. अगले दिन 29 जुलाई 2023 को दोपहर 13.05 मिनट परीकादशी का समापन होगा. एकादशी पूजा का समय सुबह 09.04 तक बहुत ही शुभ रहने वाला है. पद्मिनी (पद्मिनी) एकादशी व्रत का पारण 30 जुलाई की सुबह 05.41 से 08.24 तक रहने वाला है.
पुरषोत्तम एकादशी पूजा अनुष्ठान
अधिकमास में आने वाली एकादशी के महात्म्य के विषय में धर्मराज युधिष्ठिर को भगवान श्रीकृष्ण प्रकट करते हैं. भगवान कृष्ण ने इस एकादशी के विषय में कहा है कि, जो भी भक्तजन अधिकमास में आने वाली इस एकादशी का व्रत करने से सभी प्रकार के पापों का शमन होता है और व्यक्ति को बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है.,
अधिकमास में आने वाली एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने के पश्चात व्रत का संकल्प करना चाहिए. इस समय पर तिल, हल्दी और आंवले का उपयोग दान हेतु करना बहुत विशेष होता है. भगवान को तुलसी गंगाजल एवं पंचामृत द्वारा अभिषेक करना चाहिए. पद्मिनी एकादशी पूजा के लिए दशमी के दिन से ही सात्विकता को अपनाते हुए व्रत का संकल्प किया जाता है. इस व्रत में सूर्यास्त के बाद भोजन करने की अनुमति नहीं है, इस समय पर भगवान की पूजा में खुद को समर्पित कर दिया जाता है. अगले दिन नित्यकर्म से मुक्त होकर व्रत का पारण करना चाहिए और पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ विधि-विधान से भगवान की पूजा करनी चाहिए.
पद्मिनी एकादशी पूजा महत्व
धर्म ग्रंथों के अनुसार यह एकादशी बहुत ही विशेष फलों को प्रदान करने वाली होती है. सावन अधिकमास के दौरान इस एकादशी के दिन श्री विष्णु जी के साथ भगवान शिव की पूजा का महत्व बहुत आवश्यक होता है. इस एकादशी का व्रत करता है भक्तों के सभी प्रकार के दुखों को दूर कर देने वाला है. जिस प्रकार भगवान अधिकमास की प्रार्थना पर उन्हें अपना नाम प्रदान करते हैं उसी प्रकार इस माह आने वाली एकादशी के दिन किया जाने वाला पूजन श्री विष्णु का आशीर्वाद प्रदान करता है और भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
एस्ट्रोलॉजर राजरानी