
पितृ पक्ष की अष्टमी : हिन्दू धर्म में एक प्राचीन मान्यता है कि यदि व्यक्ति संकटों के दौर से गुजर रहा है, बनते बनते काम बिगड़ रहे हैं और तमाम प्रयास करने के बाद भी हालात में सुधार नहीं हो रहा है तो अपने पितृों को मना लें। पितृ यदि खुश हो गए तो तमाम तरह के संकट दूर हो जाते है। पितृों को मनाने का सर्वश्रेष्ठ समय आश्विन माह का कृष्ण पक्ष होता है। इस पक्ष को श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। कहा जाता है कि श्राद्ध पक्ष में पितृ पृथ्वी लोक पर आते हैं। इस दौरान पितृों को अर्पित किया गया भोजन वह सहर्ष स्वीकार करते हैं।
गुरुवार, 7 अक्टूबर को पितृ पक्ष की अष्टमी है। पितृ पक्ष की अष्टमी का विशेष महत्व माना गया है। जिन लोगों का देहांत अष्टमी तिथि को होता है, उनका श्राद्ध पितृ पक्ष की अष्टमी को किया जाता है। इसे श्राद्ध अष्टमी भी कहते हैं।
श्राद्ध पक्ष की अष्टमी को जिन लोगों के पूर्वजों का श्राद्ध होता है, उन लोगों को आठ ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। इसके साथ ही आप किसी भूखे व्यक्ति को भी भोजन करा सकते हैं। भूखे व्यक्ति को कराया गया भोजन भी पुण्यदायी होता है। इस दिन सबसे पहले स्नान आदि करके पिंडदान करना चाहिए। इसे बाद पितृों के निमित्त तर्पण करें और पंचबलि कर्म के साथ ब्राह्मणों को भोजन कराएं। कुश के आसन पर बैठकर भगवान विष्णु के गोविंद स्वरूप की पूजा करें। गीता के आठवें अध्याय का पाठ करें। अंत में पितृों से क्षमा याचना जरुर करें।
कुतुप मूहूर्त - सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रौहिण मूहूर्त - दोपहर 12 बजकर 33 मिनट से 01 बजकर 20 मिनट तक अपराह्न काल - दोपहर 01 बजकर 20 मिनट से दोपहर 03 बजकर 41 मिनट तक
शनिवार- 07 अक्टूबर 2023, नवमी श्राद्ध रविवार- 08 अक्टूबर 2023, दशमी श्राद्ध सोमवार- 09 अक्टूबर 2023, एकादशी श्राद्ध मंगलवार- 10 अक्टूबर 2023, मघा श्राद्ध बुधवार- 11 अक्टूबर 2023, द्वादशी श्राद्ध गुरुवार- 12 अक्टूबर 2023, त्रयोदशी श्राद्ध शुक्रवार- 13 अक्टूबर 2023, चतुर्दशी श्राद्ध शनिवार- 14 अक्टूबर 2023, सर्व पितृ अमावस्या