Pradosh Vrat 2023: अधिकमास के अंतिम प्रदोष तिथि पर शिव होंगे नंदी पर विराजमान,मिलेगा राजसूय यज्ञ के समान फल
Pradosh Vrat 2023
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 03:36 AM
adhik maas ravi pradosh vrat 2023 date and time 13 अगस्त 2023 को रविवार के दिन होगा अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) का आखिरी प्रदोष व्रत.
इस अंतिम प्रदोष काल में शिव वास नंदी होने से भक्तों को रुद्राभिषेक का मिलेगा उत्तम समय तथा राज सम्मान की प्राप्ति का मिलेगा आशीर्वाद. प्रदोष समय जो समस्त दोषों से मुक्ति का समय होता है. मुहूर्त शास्त्र में प्रदोष काल को बेहद विशेष कार्यों हेतु उत्तम समय माना गया है.
इस वर्ष पंचांग गणना में एक माह की अधिकता अधिकमास के रुप में हमें प्राप्त हुई है. अधिक मास होने के कारण इस माह में आने वाली प्रदोष तिथि समय का भी अत्यंत सकारात्मक लाभ बताया गया है.
pradosh kaal time Importance शास्त्रों के अनुसार अधिकमास में आने वाले दो पक्षों जिसमें शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष की उपस्थिति प्रदोष के दौरान जब प्राप्त होती है तो उस समय पर किया जाने वाला पूजन एवं धार्मिक आध्यात्मिक कार्य सिद्धि को पाने में भी सफल होता है. अब इस स्थिति में इस वर्ष सावन माह के अधिकमास की आने वाली प्रदोष अंतिम तिथि भी होगी. मलमास का आखिरी प्रदोष होने के कारण इस दिन पर किए जाने वाले समस्त कार्यों का प्रभाव आने वाले समय में अवश्य दृष्टिगोचर होगा.
अंतिम प्रदोष व्रत में बनेगा शिव नंदी वास adhik maas sawan pradosh shivvas time 2023
प्रदोष पूजा के दिन शिववास नन्दी पर होगा जिसका समय 08:19 तक रहने वाला है. प्रदोष व्रत में शिव की पूजा करने के साथ ही रुद्राभिषेक करना शुभ फल प्रदान करता है. इस अंतिम अधिकमास प्रदोष व्रत के दौरान शिव का नंदी वास प्राप्त हो रहा है. इस कारण से इस दिन पर सुबह के समय रुद्राभिषेक करने से समस्त कार्यों में सफलता का आशीर्वाद भी मिलेगा. शिव पूजन एवं देवी पार्वती के पूजन के साथ ही इस दिन पर श्री विष्णु लक्ष्मी पूजन द्वारा भक्तों को आर्थिक समृद्धि के साथ जीवन में आध्यात्मिक प्रगति का सुख भी प्राप्त होगा.
पंचांग के अनुसार सावन अधिकमास रवि प्रदोष व्रत की त्रयोदशी तिथि 13 अगस्त 2023 को सुबह 08:19 मिनट से शुरू होगी. तथा इस तिथि की समाप्ति अगले दिन 14 अगस्त 2023 को सुबह 10:25 मिनट पर होगी. प्रदोष काल में शिव पूजा समय 19.08 से 21.22 तक रहने वाला है. इस अंतिम अधिकमास प्रदोष व्रत के दिन भक्तों को सुख एवं शांति का आशीर्वाद मिलेगा तथा पुरुषोत्तम मास का पुण्य फल प्राप्त होगा.
अधिक मास प्रदोष व्रत का महत्व Significance of Adhik Maas Pradosh Vrat
अधिक मास में आने वाले प्रदोष व्रत का महत्व इस कारण भी बढ़ जाता है क्योंकि यह समय शिव एवं विष्णु पूजन का होता है. हर महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को किया जाने वाला प्रदोष व्रत अधिकमास के जिस भी दिन पर आता है उस दिन अनुसार इसका पूजन करना चाहिए. अगर यह व्रत किसी विशेष दिन पर किया जाए तो यह संयोग और भी महत्वपूर्ण हो जाता है.
अधिकमास में आने वाले दिनों के अनुसार प्रदोष को नाम प्राप्त होता है. इन सभी में से यदि यह अधिकमास के सोमवार के दिन प्रदोष मनाया जाता है तो इसे 'अधिकमास सोम प्रदोष व्रत' के नाम से जाना जाता है. अधिकमास के मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को 'अधिकमास भौम प्रदोष व्रत' के नाम से जाना जाता है. इसी तरह से अधिकमास के रविवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को 'अधिकमास रवि प्रदोष व्रत' के नाम से जाना जाता है, और इस बार अधिकमास में दोनों प्रदोष रविवार के दिन ही प्राप्त हो पाए हैं.
एस्ट्रोलॉजर राजरानी
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