प्राचीन युग से हमारे धर्म तथा समाज में रंगों का सम्मिश्रण नए नए रूपों में होता आया है। रंगों का स्वास्थ्य और मन पर प्रबल प्रभाव पड़ता है। रंगों के आकर्षक वातावरण में मन प्रसन्न रहता है और निराशा भागती है। रंग हमारे धर्म और अध्यात्म का अभिन्न अंग हैं।
धार्मिक कृत्यों में रोली का लाल, हल्दी का पीला, पत्तियों का हरा, आटे का सफेद रंग प्रयोग में लाया जाता है और यह हमारे लिए स्वास्थ्यप्रद, स्फूर्तिदायक तथा कल्याणकारी होता है। हरा, लाल और नीला रंग मनुष्य को स्वस्थ, यशस्वी और गौरवशाली बनाने वाले कहे गए हैं।
हिंदू धर्म में लाल रंग का सर्वाधिक महत्व माना गया है। अधिक से अधिक मंगल कार्यों में लाल रंग का उपयोग किया जाता है। इसे सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। प्राय: सभी देवी -देवताओं को लाल रोली का ही टीका लगाया जाता है। लाल तिलक शौर्य और विजय का प्रतीक है। लाल तिलक लगाने वाले व्यक्ति में तेजस्विता, गौरव, पराक्रम और यश का अस्तित्व होना माना जाता है।
लाल रंग नारी की मर्यादा की रक्षा भी करता है और नारी के सौभाग्य का चिन्ह भी है। नारी की मांग में लाल सिंदूर जहां एक ओर उसका सौंदर्य बढ़ाता है, वहीं दूसरी ओर उसके अटल सौभाग्य तथा पति प्रेम को ही प्रकट करता है। नारी का स्नेह लाल से परिलक्षित होता है। हिंदू तत्वदर्शियों ने भगवती दुर्गा को लाल रंग के चमकदार वस्त्रों से सुसज्जित किया है। उनका मुख मंडल तेज से लाल है। धन की देवी लक्ष्मी को भी लाल वस्त्र पहनाए जाते हैं। लक्ष्मी सूर्य स्वरूपा और रक्तवर्णा कही गई हैं। लाल रंग उत्साह, स्फूर्ति, पराक्रम, विपुल संपत्ति, समृद्धि और शुभ लाभ को प्रकट करने वाला है।
हरा रंग संपूर्ण प्रकृति में व्याप्त है। यह मन को शांति और शीतलता प्रदान करने वाला है। यह मनुष्य को सुख, शांति, स्फूर्ति देने वाला प्रिय रंग है। ऋषि मुनियों ने अपनी आध्यात्मिक उन्नति ऊंचे पर्वत शिखरों पर हरे भरे वनों में एक शांत सुखद वातावरण में ही प्राप्त की थी। संसार के महान ग्रंथ, प्राचीनतम शास्त्र, वेद पुराण आदि श्रेष्ठतम ग्रंथ हरे वातावरण यानी वनों में ही निर्मित हुए हैं।
लाल और हरा रंग मिलकर मनुष्य के मन की शांति, तेज, बल और आत्म गौरव को बढ़ाने वाले हैं। लाल हरे रंगों से उद्योगशीलता स्पष्ट होती है। लक्ष्मी उन्हीं के पास रहती है, जो उद्योगी परिश्रमी और आत्मविश्वासी होते हैं।
पीला रंग ज्ञान विद्या और विवेक का प्रतीक है। पीला रंग, मन मस्तिष्क को प्रफुल्लित करता है। यह रंग एकाग्रता और मानसिक, बौद्धिक उन्नति का प्रतीक है यह ज्ञान की ओर प्रवृत्त करता है। भगवान विष्णु का वस्त्र पीला है, जो उनके असीम ज्ञान का द्योतक है। गणपति की धोती पीली और दुपट्टा नीला है।
नीले रंग में बल पौरुष का संदेश निहित है। सृष्टि रचना में सबसे अधिक नीले रंग का उपयोग किया गया है। ऊपर नीलगगन है, समुद्र में, नदियों में नीले रंग की अधिकता है। मनोविज्ञान के अनुसार नीला रंग वीर भाव का प्रतीक है भगवान राम और श्रीकृष्ण दोनों का संपूर्ण जीवन मानवता की रक्षा और दानवता के विरुद्ध युद्ध में लगा, दोनों ही नीलवर्ण हैं।
सफेद रंग सात रंगों के सम्मिश्रण से बना है और पवित्रता, शुद्धता, विद्या तथा शांति का प्रतीक है। सूर्य की सफेद किरण को तोड़ने पर उसमें से सभी रंग प्रकट हो जाते हैं, अतः सफेद रंग में सभी रंगों की थोड़ी बहुत छाया है। ज्ञान और विद्या का रंग सफेद है। विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती को सफेद रंग सर्वाधिक प्रिय है।
भगवा रंग अग्नि की ज्वाला का रंग है। भगवा रंग आध्यात्मिक प्रकाश का रंग है। यज्ञ, धार्मिक ज्ञान, तप, संयम और वैराग्य का रंग है। जिस प्रकार अग्नि से प्रकाश उत्पन्न होता है उसी प्रकार भगवा वस्त्र धारण करने वाला योगी आध्यात्मिक ज्योति से निखर उठता है। यह रंग शुभ संकल्प का सूचक है। इसे पहनने वाले को अपने कर्तव्य भली-भांति स्मरण रहते हैं और उसके बुद्धि विवेक और संयम में उत्तरोत्तर वृद्धि होती है यह निर्विवाद सत्य है।