
Sawan 2023[/caption]
Sawan 2023: हिंदू धर्म मे मान्यता अनुसार सभी मंदिरो मे शीर्ष पर त्रिशूल लगा रहता है ,लेकिन बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर मे त्रिशूल की जगह पंचशूल ( त्रिशूल के आकार में पांच चाकू) लगा है ।मंदिर परिसर मे अन्य मंदिर जैसे लक्ष्मीनारायण मंदिर,शिव, पार्वती मंदिर मे भी त्रिशूल की जगह पंचशूल देखने को मिलेंगे।इसे सुरक्षा कवच माना जाता है ।कहा जटा है की इस पंचशूल को रावण के अलावा कोई नही भेद सकता था,यहा तक की भगवान श्री राम भी इसे भेद्ना नही जानते थे।बाद मे विभिषण ने प्रभू श्री राम को इसे भेदना बताया।इस पंचशूल की वजह से बाबा धाम मे किसी प्राकृतिक आपदा का खतरा नही रहता है ।शिवरात्री के दो दिन पहले पंचशूल को उतारा जाता है ।इसे छूने के लिये भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है ।सभी पंचशूलो की एक दिन पूर्व विशेष रूप से पूजा की जाती है और सभी पंचशूलो को मंदिर पर यथास्थान स्थापित किया जाता है ।इसी दौरान बाबा शिव का और माता पार्वती का गठबंधन हटा दिया जाता है और शिवरात्री के दिन नया गठबंधन किया जाता है ।
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बाबा बैद्यनाथ धाम मे मनाये जाने वाले प्रसिद्ध त्योहार महाशिवरात्रि और सावन का श्रावणी मेला है ।ये दोनो ही त्योहार यहा बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है ।सावन के महीने मे इस मेले की शुरुआत होती है । सावन के महीने में बाबा बैद्यनाथ मंदिर में लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ती है। प्रतिदिन मंदिर दर्शन के लिए प्रातः 4:00 बजे से 3:30 बजे तक तथा सायं 6:00 से 9:00 बजे तक खुला रहता है। मंदिर प्रांगण में प्रवेश के लिए मंदिर सुवह 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है। इस बार यह मेला मलमास होने की वजह से दो महीने चलेगा।इस मेले मे शिव झांकी,शिव तंडाव,शिवलिंग की स्थापना, से लेकर रावण वार्ता तक सब कुछ दिखाया जाता ।