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जिस प्रकार उज्जैन स्थित महाकालेश्वर की भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है ,उसी प्रकार ओंकारेश्वर मंदिर की शयन आरती विश्व प्रसिद्ध है। इस मंदिर मे सुबह मध्य और शाम तीनों प्रहर की आरती की जाती है ।
मान्यता है कि रात्रि के समय भगवान शिव यहां पर प्रतिदिन सोने के लिए लिए आते हैं। मान्यता यह भी है कि इस मंदिर में महादेव माता पार्वती के साथ चौसर खेलते हैं। किन्तु यह आज तक किसी ने देखा नहीं है। यही कारण है कि रात्रि के समय यहां पर चौपड़ बिछाई जाती है और आश्चर्यजनक तरीके से जिस मंदिर के भीतर रात के समय परिंदा भी पर नहीं मार पाता है, उसमें सुबह चौसर और उसके पासे कुछ इस तरह से बिखरे मिलते हैंं,जैसे रात्रि के समय उसे किसी ने खेला हो।
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महादेव माता पार्वती के साथ चौसर[/caption]
कहते हैं कि हर प्रथा के साथ एक कुप्रथा भी प्रचलित होतीं है उसी प्रकार इस मंदिर से भी जुड़ी कुछ कुप्रथा है जो अब समाप्त कर दी गई है । यहां मान्धाता पर्वत पर एक खड़ी चढ़ाई वाली पहाड़ी है। इसके सम्बन्ध में एक प्रचलन था कि जो कोई मनुष्य इस पहाड़ी से कूदकर अपना प्राण नर्मदा में विसर्जित कर देता है, उसकी तत्काल मुक्ति हो जाती है। इस कुप्रथा के चलते बहुत सारे लोग सद्योमुक्ति (तत्काल मोक्ष) की कामना से उस पहाड़ी पर से नदी में कूदकर अपनी जान दे देते थे। इस प्रथा को ‘भृगुपतन’ नाम से जाना जाता था। सती प्रथा की तरह इस प्रचलन को भी अँग्रेजी सरकार ने प्रतिबन्धित कर दिया। यह प्राणनाशक अनुष्ठान सन् 1824 ई. में ही बन्द करा दिया।
मंदिर जाने के लिये :
ओंकारेश्वर मंदिर इंदौर से करीब 80 किमी दूर है। इंदौर आने के लिए देश के सभी बड़े शहरों से वायु मार्ग, रेल मार्ग और सड़क मार्ग के जुड़ा हुआ है। इंदौर आने के बाद यहां से बस या पर्सनल टैक्सी की मदद से मंदिर तक पहुंच सकते हैं।