Sawan Purnima : इस बार श्रावण पूर्णिमा पर क्यों नहीं मनाई जाएगी राखी, जाने इसके पीछे का रहस्य !
Sawan Purnima
भारत
चेतना मंच
27 Nov 2025 04:08 PM
Sawan Purnima : सावन के अधिक मास की पूर्णिमा 1 अगस्त 2023 के दिन मनाई जाएगी. यह श्रावण अधिकमास पूर्णिमा होने के कारण विशेष होगी जिसमें राखी नहीं मनाई जाएगी इस दिन कुछ शुभ योग बन रहे हैं. सावन अधिक मास की पूर्णिमा पर विष्णु पूजन शुभ योग में होगा. इस वर्ष अधिक मास के कारण सावन की दो पूर्णिमा हैं. सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा और स्नान किया जाएगा. इसके साथ ही इस दिन राखी का पर्व भी मनाया जाता है. लेकिन इस बार ऎसा नहीं होगा. आईये जानें आखिर क्यों श्रावण पूर्णिमा होने पर भी नहीं मनाया जाएगा रक्षाबंधन का पर्व
Malmas Purnima 2023 पूर्णिमा तिथि के दिन सत्यनारायण भगवान की पूजा करने के साथ-साथ कथा श्रवण एवं दान कार्य का विशेष महत्व होता है. पूर्णिमा के व्रत करने से भगवान के आशीर्वाद से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है. इस दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पाप से मुक्ति मिलती है. पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त से ही स्नान और पूजन करना शुभ होता है. सावन माह की पूर्णिमा पहले अधिकमास (मलमास) की पूर्णिमा होगी लेकिन राखी नही होगी, लेकिन परेशान नहीं हों, क्योंकि राखी का पर्व आने वाली 30-31 अगस्त के दिन पर मनाया जाएगा.
सावन अधिक मास पूर्णिमा 2023 तिथि Raksha Bandhan date
सावन अधिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 31 जुलाई को मंगलवार को सुबह 03:51 बजे से शुरू होगी. यह तिथि 1 अगस्त की देर रात 24:01 बजे तक रहने वाली है. ऐसे में सावन अधिक मास की पूर्णिमा 1 अगस्त को है. अधिक मास की पूर्णिमा पर चंद्रोदय शाम 19:16 मिनट पर होगा. सावन अधिक मास की पूर्णिमा पर प्रीति योग होगा और उसके बाद आयुष्मान योग मिलेगा. इस दिन चंद्रमा का गोचर मकर राशि में होगा तथा उत्तरषाढ़ा नक्षत्र की प्राप्ति होगी.
अधिकमास होने कारण ही नहीं मनाई जाएगी राखी
राखी का पर्व Sawan Purnima के दिन से संबंधित होता है लेकिन इस बार सावन में अधिकमास होने से श्रावण पूर्णिमा के समय राखी का पर्व नहीं मनाया जाएगा. क्योंकि मलमास एक अतिरिक्त माह होता है जिसके संदर्भ में आने वाले पर्व उन दिनों से अलग होते हैं जो सामान्य रुप से ग्राह्य माने गए हैं. इसी कारण इस मास में आने वाला हर पर्व अतिरिक्त रुप में प्राप्त होता है यह काल गणना में उपयोग नहीं होता है इसी कारण इस समय पर मानाई जाने वाली अधिकमास पूर्णिमा होगी श्रावण पूर्णिमा का समय नहीं होगी.
सावन अधिक मास पूर्णिमा पूजा विधि Sawan Purnima के दिन व्रत करके सत्यनारायण की पूजा की जाती है. भगवान का पूजन एवं कथा श्रवण करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है. पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा करने से कुंडली में चंद्र दोष दूर हो जाता है. रात्रि के समय माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन में वृद्धि होती है. पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान और चंद्रमा की पूजा की जाती है. पूर्णिमा पूजा करने से दोष शांत होते हैं.
व्यक्ति का जीवन सुखमय बनता है. पूर्णिमा के दिन चावल, सफेद कपड़ा, दूध, खीर, चांदी आदि का दान करना शुभ माना गया है, क्योंकि यह सभी चंद्रमा से संबंधित वस्तुएं हैं. सावन अधिक मास की पूर्णिमा के साथ मंगला गौरी व्रत का भी संयोग बना है. मंगला गौरी व्रत विवाहित महिलाओं द्वारा रखा जाता है और वे देवी गौरी की पूजा करती हैं. मां गौरी के आशीर्वाद से पति को लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन मिलता है.
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