
दीपावली (Diwali 2021) हिंदुओं का सबसे प्रतिभाशाली धार्मिक पर्व है। जिसे सभी मिल कर रोशनी व खुशियों से मनाते हैं। घर-घर में प्रकाशमय वातावरण होने से दिन रात में कोई फर्क पता नहीं चलता, तभी इसे दीपोत्सव (Diwali 2021) भी कहते हैं। अमीर हो या गरीब सभी इसे धूमधाम से मनाते हैं। दीपावली (Diwali 2021) का त्योहार पाँच दिन तक मनाया जाता है। हर एक दिन का अपना अलग महत्व है। यह पर्व धनतेरस से शुरु होकर भाई दूज तक मनाया जाता है।
इस वर्ष दीपावली (Diwali 2021) का पर्व 4 नवंबर 2021, दिन गुरुवार को है। अमावस्या तिथि 4 नवंबर को सुबह 6 बजकर 03 मिनट से प्रारंभ होकर 5 नवंबर को सुबह 2 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी। दीपावली पर लक्ष्मी पूजन मुहूर्त शाम 6 बजकर 09 मिनट से रात 8 बजकर 20 मिनट तक है। पूजन अवधि 01 घंटे 55 मिनट की है।
कैसे करें पूजा-
- सर्वप्रथम पूजा का संकल्प लें। - श्रीगणेश, लक्ष्मी, सरस्वती जी के साथ कुबेर का पूजन करें। - ऊं श्रीं श्रीं हूं नम: का 11 बार या एक माला का जाप करें। - एकाक्षी नारियल या 11 कमलगट्टे पूजा स्थल पर रखें। - श्रीयंत्र की पूजा करें और उत्तर दिशा में प्रतिष्ठापित करें, देवी सूक्तम का पाठ करें।
क्यों मनाई जाती है दीपावली
इन खास दिनों को मनाने के एक नहीं बहुत से मुख्य कारण है, जो नीचे बताए गए हैं।
1- इस दिन समुंद्र मथन के दौरान धन की देवी का अवतार हुआ था। भगवान धनवंतरी व कुबेर की उत्पत्ति भी समुंद्र मंथन के दौरान इसी दिन हुई थी।
2- इस दिन श्री राम जी लंका पर विज़य पाने के पश्चात सीता व लक्ष्मण सहित अयोध्या वापिस लौटे थे, जिससे उनके स्वागत के लिए घर-घर घी के दीपक जलाए गए थे।
3- इस दिन से दो दिन पहले भग्वान कृष्ण ने नरकासुर को मार कर 16 हजार स्त्रियों को उसकी कैद से बचाया था, जिस वज़ह से दीपावली के दिन तक जीत का त्योहार मनाया गया था।
4- आर्य समाज के संथापक व जैन धर्म के संस्थापक ने इस निर्वाण प्राप्त किया था।
5- अमृतसर मे स्वर्ण मंदिर की स्थापना भी इसी दिन की गई थी और गुरु हरगोविंद जी को इसी दिन हिरासत से रिहा किया गया था।
6- इस दिन पांड़्व 12 वर्ष के वनवास के बाद वापिस लौटे थे, जिससे आने के पश्चात उन्होंने दीपक जला कर प्रकाश किया था।
7- राजा विक्रमादित्य का इस दिन राज्याभिषेक हुआ था। तभी से ये दिन ऐतिहासिक रुप से मनाना शुरु हुआ।
8- इस दिन भग्वान विष्णु ने अपने वामन अवतार में देवी लक्ष्मी को राजा बली की कैद से बचाया था।
- यशराज कनिया कुमार