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सावन माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी से आरंभ होकर 12 से 15 दिनों तक लगातार नागों का पूजन किया जाता है। पौराणिक रुप से ही इस दिन का महत्व विशेष रहा है। धर्म ग्रंथों के अनुसार पंचमी तिथि के देवता हैं नाग देवता है और सावन में पंचमी तिथि पर नाग देवता की पूजा करने से समस्त प्रकार के सर्प दोष शांति पाते हैं।

इस साल यानि वर्ष -2025 में नाग पंचमी का त्यौहार 29 जुलाई 2025 को मंगलवार के दिन मनाया जाएगा। नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने तथा नाग देवता को दूध पिलाने से मनुष्य की कुंडली में मौजूद काल सर्प दोष समाप्त हो जाता है। सावन के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि नाग पंचमी के रुप में मनाई जाती है। सावन के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी को पर्व रुप में मनाया जाता है। नाग पंचमी का ये समय मौना पंचमी के रुप में जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस समय पर भक्त मौन रुप से भगवान का पूजन करते हैं। इस दिन नागों के पूजन का समय होता है तथा नाग देवताओं को समर्पित मंदिरों एवं शिवालयों में विशेष पूजा अर्चना का आयोजन संपन्न होता है। देश भर में इस दिन विशेष रुप से यज्ञ अनुष्ठानों एवं रुद्राभिषेक जैसे धार्मिक कार्यों को किया जाता है।
सावन माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी से आरंभ होकर 12 से 15 दिनों तक लगातार नागों का पूजन किया जाता है। पौराणिक रुप से ही इस दिन का महत्व विशेष रहा है। धर्म ग्रंथों के अनुसार पंचमी तिथि के देवता हैं नाग देवता है, और सावन में पंचमी तिथि पर नाग देवता की पूजा करने से समस्त प्रकार के सर्प दोष शांति पाते हैं। कुछ स्थानों पर इस दिन को मौन व्रत के रुप में भी मनाया जाता है। मौन रहते हुए व्रत का पन करते हुए भगवान शिव का पूजन होता है तथा नाग देवता का पूजन किया जाता है। नाग पंचमी का व्रत करने से कई तरह के लाभ भक्तों को प्राप्त होते हैं। यह समय प्रकृति से जुड़ाव का भी समय होता है और इसी समय पर नागों को सबसे अधिक देख सकते हैं, अत: इस दिन से नागों के प्रति एवं अन्य जीव जन्तुओं के प्रति संवेदनाओं का समय शायद ही कहीं ओर दिखाई देखा जा सकता है। मौना पंचमी व्रत के लाभ द्वारा व्यक्ति शक्ति एवं ऊर्जा को प्राप्त करता है। अन्न-धन की प्राप्ति होती है तथा जीवन में धन धान्य की कमी नहीं रहती है।