
बिहार विधानसभा चुनाव भले ही औपचारिक रूप से घोषित न हुए हों, लेकिन राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। इसी बीच पटना की धरती से समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने न सिर्फ बिहार के समीकरण बदले बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति को भी नया संदेश दिया। कांग्रेस-आरजेडी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ को नया मोमेंटम मिला, मगर असली सुर्ख़ियां अखिलेश यादव बटोर ले गए। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के नाम पर खुला समर्थन देकर अखिलेश ने न सिर्फ़ बिहार की सियासत में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए भी बड़ा संदेश छोड़ दिया। Bihar Assembly Election 2025
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पटना का सियासी मंच अखिलेश यादव के बयान से गूंज उठा। 17 अगस्त को सासाराम से शुरू हुई ‘वोटर अधिकार यात्रा’ जब 23 ज़िलों और 1300 किलोमीटर का सफर तय कर पटना पहुंची तो अंतिम पड़ाव पर अखिलेश ने सबको चौंका दिया। उन्होंने साफ कर दिया कि महागठबंधन का चेहरा तेजस्वी यादव होंगे। जबकि कांग्रेस अब तक इस ऐलान से बचती रही है और राहुल गांधी ने बार-बार सवालों के बावजूद चुप्पी साध रखी। तेजस्वी ने तो राहुल को पीएम उम्मीदवार तक बता दिया, लेकिन कांग्रेस का रुख नहीं बदला। ऐसे हालात में अखिलेश की यह घोषणा सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि यूपी की राजनीति को भी नया संदेश देने वाली साबित हुई।
तेजस्वी यादव ने अखिलेश के अनुभव और राजनीतिक कौशल की तारीफ़ करते हुए कहा कि “उत्तर प्रदेश में बीजेपी को रोकने का श्रेय अखिलेश यादव को जाता है। उनके अनुभव से हमें बिहार में भी मज़बूती मिलेगी। अखिलेश ने भी पलटवार में तेजस्वी को सबसे उपयुक्त मुख्यमंत्री बताया और कहा कि बिहार की जनता को विकास और रोज़गार के लिए तेजस्वी को ही चुनना चाहिए। यह बयान राहुल गांधी की मौजूदगी में आया, जिसने कांग्रेस को असहज स्थिति में ला खड़ा किया।
बिहार विधानसभा चुनाव के बहाने अखिलेश यादव ने ऐसा सियासी संदेश दिया है, जिसका असली निशाना उत्तर प्रदेश की राजनीति है। आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन जहां अब तक सीएम चेहरे पर असमंजस में है, वहीं अखिलेश ने पटना से साफ संकेत दिया कि यूपी में समाजवादी पार्टी किसी तरह का सस्पेंस बर्दाश्त नहीं करेगी। कांग्रेस भले ही बिहार में तेजस्वी यादव को चेहरा घोषित करने से बच रही हो, लेकिन अखिलेश की यह घोषणा दरअसल 2027 के यूपी चुनाव के लिए अपनी दावेदारी मज़बूत करने और कांग्रेस पर दबाव बनाने का इशारा है।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पटना में सियासी संग्राम और तेज हो गया है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को सीएम चेहरा मानने की अखिलेश यादव की घोषणा पर बीजेपी ने जोरदार वार किया है। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि तेजस्वी भले ही खुद को मुख्यमंत्री बता रहे हों, लेकिन राहुल गांधी अब तक खामोश हैं। उनका आरोप है कि अखिलेश को बुलाकर तेजस्वी ने कांग्रेस पर दबाव बनाने की कोशिश की, जबकि भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते महागठबंधन तेजस्वी को आगे करने का जोखिम नहीं उठा सकता।
बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जहां कांग्रेस अपनी पुरानी ज़मीन वापस पाने की कोशिश कर रही है, वहीं अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव की जोड़ी ने पटना से साफ संकेत दे दिया कि अगर कांग्रेस सीएम चेहरे को लेकर सस्पेंस बनाए रखेगी, तो सहयोगी दल खुद ऐलान करने में देर नहीं करेंगे। आरजेडी और सपा की इस जुगलबंदी ने न सिर्फ बिहार की राजनीति गर्माई है बल्कि यूपी में 2027 के समीकरणों का भी इशारा कर दिया है। Bihar Assembly Election 2025