Bihar Assembly Elections 2025 : बिहार चुनाव में कांग्रेस की रणनीति पर उठते सवाल
भारत
चेतना मंच
20 Oct 2025 11:11 AM
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारा उम्मीदवारों की चौथी लिस्ट जारी होने के बाद पार्टी में उथल-पुथल मच गई है। टिकट बंटवारे के मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर और महागठबंधन में सियासी विवाद खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर टिकट बेचने के आरोप लग रहे हैं और पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा है। -Bihar Assembly Elections 2025
राहुल गांधी ने बिहार में कांग्रेस को फिर से खड़ा करने के लिए अपने करीबी नेताओं को जिम्मेदारी दी थी। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू के नेतृत्व में पार्टी ने सीट शेयरिंग और टिकट वितरण की प्रक्रिया शुरू की। हालांकि, पार्टी के अंदरूनी मतभेदों ने अब इसे बुरी तरह प्रभावित किया है। बागी रुख अपनाने वाले नेताओं ने आरोप लगाया है कि टिकट बांटने में केवल पैसा और सिफारिश का महत्व दिया गया है।
कांग्रेस के विधायक और अन्य नेताओं का कहना है कि पार्टी में अब विचारधारा की बजाय पैसा बोल रहा है। शकील अहमद, मोहम्मद आफाक आलम जैसे नेताओं का कहना है कि टिकट पाने के लिए अब धनबल और सिफारिश का खेल चल रहा है। आफाक आलम ने तो आरोप लगाया कि पार्टी में तीन बार विधायक रहे एक नेता का टिकट काटकर ऐसे शख्स को मैदान में उतारा गया है, जो पार्टी के भीतर किसी पद का चुनाव तक नहीं जीत पाया।
इसके अलावा, कई नेता और कार्यकर्ता आरोप लगा रहे हैं कि राहुल गांधी के सिपहसालारों ने स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की राय को नजरअंदाज किया और पार्टी के लिए बेहतर उम्मीदवारों का चयन नहीं किया। कुछ सीटों पर तो आरजेडी और कांग्रेस के उम्मीदवार आमने-सामने हैं, जो महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने भी सवाल उठाया है। उन्होंने बरबीघा सीट से मुन्ना शाही का टिकट कटने को लेकर आपत्ति जताई और कहा कि 2020 में मामूली अंतर से हारने वाले नेता को टिकट नहीं दिया गया, जबकि बड़े अंतर से हारने वाले नेताओं को मौके दिए गए हैं। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर सकता है।
कांग्रेस के भीतर कई नेता यह भी आरोप लगा रहे हैं कि कृष्णा अल्लावरू और राजेश राम ने राहुल गांधी के निर्देशों का पालन नहीं किया और निजी स्वार्थ के तहत टिकट बांटे। न तो पार्टी संगठन की राय ली गई और न ही क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान रखा गया, जिसका खामियाजा अब पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।
बिहार में कांग्रेस के भीतर उठे विवादों का असर महागठबंधन पर भी पड़ा है। सीटों के बंटवारे को लेकर आरजेडी और कांग्रेस के बीच मतभेद साफ नजर आ रहे हैं। कांग्रेस को उन सीटों पर भी महागठबंधन से संघर्ष करना पड़ रहा है, जिनपर वह लंबे समय से चुनाव लड़ती रही है।
कांग्रेस के रणनीतिकारों को इस बात का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है, क्योंकि उनके द्वारा किए गए गलत फैसलों से पार्टी की स्थिति कमजोर होती जा रही है। आरजेडी के साथ तालमेल न बैठने और कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष के कारण चुनावी मैदान में कांग्रेस के लिए चुनौती और भी बढ़ गई है।
कांग्रेस के लिए बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर चुनौती और भी कठिन हो गई है। जिन नेताओं को पार्टी के अंदर जिम्मेदारी दी गई थी, वे अपनी रणनीति में असफल रहे हैं। अगर इस संकट को समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो कांग्रेस के लिए 10 सीटों का लक्ष्य हासिल करना भी मुश्किल हो सकता है।
कांग्रेस के सिपहसालारों की कार्यशैली और विवादों ने पार्टी की चुनावी संभावनाओं को खतरे में डाल दिया है। देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस स्थिति को सुधारने के लिए क्या कदम उठाता है।