
बिहार की राजनीति में इस बार का मुकाबला अब पहले से कहीं अधिक रोचक हो गया है। जिस चुनाव को राजनीतिक जानकार ‘मदर ऑफ ऑल कॉन्टेस्ट’ कह रहे थे, उसमें नया ट्विस्ट तब आया जब जन सुराज पार्टी (JSP) के रणनीतिक मास्टरमाइंड प्रशांत किशोर ने चुनावी अखाड़े में कदम रखा। पहले यह कयास लगाए जा रहे थे कि किशोर सीधे तेजस्वी यादव के राघोपुर से चुनौती दे सकते हैं, लेकिन अब उन्होंने साफ कर दिया कि वे व्यक्तिगत रूप से चुनाव में नहीं उतरेंगे। इस फैसले ने बिहार की चुनावी तस्वीर को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। Bihar Assembly Elections 2025
इसी बीच, इस बार भी चुनाव की सबसे बड़ी दिलचस्पी बनी हुई है – ‘M फैक्टर’। यानी महिला मतदाता, मुस्लिम और यादव समुदाय, जो अब सिर्फ वोट नहीं, बल्कि चुनाव का रुख तय करने वाली ताकत के रूप में उभर रहे हैं। राजनीतिक दलों की सारी रणनीतियाँ इसी फैक्टर के इर्द-गिर्द घूम रही हैं, और यही इस चुनाव का असली गेम चेंजर बन सकता है। Bihar Assembly Elections 2025
11 अक्टूबर को राघोपुर से जन सुराज की चुनावी मुहिम शुरू करने के बाद अटकलें तेज थीं कि किशोर सीधे आरजेडी नेता को चुनौती देंगे। लेकिन अंतिम समय में पार्टी ने 37 वर्षीय होटल कारोबारी चंचल सिंह को राघोपुर से उम्मीदवार बनाया। चंचल सिंह पहले जदयू से जुड़े रहे हैं और वर्तमान में JSP की युवा इकाई के उपाध्यक्ष हैं।
जन सुराज पार्टी के इस फैसले ने तीसरे मोर्चे के रूप में उसकी साख पर सवाल खड़ा कर दिए हैं। भाजपा और राजद दोनों ही यह दावा कर रहे हैं कि किशोर का प्रभाव अधिकतर सोशल मीडिया तक सीमित है। भाजपा के लिए यह कहना आसान है कि किशोर अब चुनावी जमीन पर असर नहीं डाल सकते, जबकि महागठबंधन का तर्क है कि उनकी पार्टी का असर केवल टीवी और डिजिटल अभियानों तक सीमित है। फिर भी, किशोर ने अपनी पार्टी के लिए उम्मीदें रखी हैं। उनका कहना है कि 150 सीटों से कम मिलने पर ही पार्टी हार मानेगी, जो भाजपा द्वारा निर्धारित 160 सीटों के लक्ष्य के करीब है।
इस बार का सबसे अहम एक्स फैक्टर बिहार की महिला मतदाता हो सकती हैं। राज्य में लगभग 3.5 करोड़ महिला मतदाता हैं, जो पुरुष मतदाताओं से केवल 40 लाख कम हैं। पिछले कई चुनावों में महिला मतदाताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का लगातार समर्थन किया है। इस बार भी महिला मतदाताओं को साधने के लिए दोनों पक्षों ने विशेष योजनाओं की पेशकश की है। नीतीश कुमार की मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता पर केंद्रित है, वहीं तेजस्वी यादव ने गरीब और पिछड़े वर्ग की महिलाओं को ₹2,500 मासिक भत्ता देने का वादा किया है। अन्य राज्यों के उदाहरण जैसे मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना, महाराष्ट्र की लड़की बहिनी, और झारखंड की मइया सम्मान ने यह साबित किया है कि महिला-केंद्रित कल्याण योजनाएं राजनीतिक रूप से असरदार होती हैं। Bihar Assembly Elections 2025
बिहार में इस बार का सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या महिला मतदाता फिर से नीतीश कुमार के साथ खड़ी होंगी या तेजस्वी यादव की सामाजिक न्याय और नकद सहायता की अपील उन्हें आकर्षित करेगी। 14 नवंबर को परिणाम घोषित होंगे, लेकिन इस बार की जंग जाति और धर्म से ऊपर उठकर महिला सशक्तिकरण और विकास बनाम परंपरागत राजनीति की होगी। अंततः, बिहार की सत्ता की चाबी इस बार महिला मतदाताओं के हाथ में हो सकती है और यही 'M फैक्टर' साबित होगा। Bihar Assembly Elections 2025