
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के सीट बंटवारे की गुत्थी अभी तक सुलझी नहीं है। हालांकि आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव और उनके पिता लालू प्रसाद यादव इसे समझते नजर आ सकते हैं, लेकिन जमीन पर एकजुटता की झलक कहीं दिखाई नहीं दे रही। दिल्ली से लौटते ही तेजस्वी ने जोर देकर कहा कि महागठबंधन पूरी ताकत के साथ खड़ा है, पर एनडीए की तैयारियां पहले ही पूरा हो चुकी हैं। जेडीयू ने अपने उम्मीदवारों को चिन्हित करना शुरू कर दिया है, वहीं जीतन राम मांझी ने हम को मिली सीटों पर प्रत्याशियों का चयन कर लिया। भाजपा ने आधिकारिक सूची जारी नहीं की है, लेकिन संकेतों से सब कुछ साफ हो गया है। महागठबंधन में अब भी केवल बैठकों का सिलसिला चल रहा है, और इस विलंब ने राजनीतिक रोमांच को और बढ़ा दिया है। Bihar Election
बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर महागठबंधन की सीट बंटवारे की पहेली अभी भी उलझी हुई है। तेजस्वी यादव और उनके पिता लालू प्रसाद यादव इसे समझते हो सकते हैं, लेकिन जमीन पर उनकी एकजुटता की झलक कहीं दिखाई नहीं दे रही। दिल्ली से लौटते ही तेजस्वी ने जोर देकर कहा कि महागठबंधन पूरी ताकत के साथ खड़ा है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही कहती है। एनडीए ने अपने किले तैयार कर लिए हैं—जेडीयू ने उम्मीदवारों को चिन्हित करना शुरू कर दिया है, और हम पार्टी ने भी अपनी सीटों पर प्रत्याशियों का चयन कर लिया है। भाजपा आधिकारिक सूची अभी जारी नहीं कर रही, लेकिन संकेतों से सब साफ हो गया है कि कौन किस सीट पर लड़ रहा है। महागठबंधन में फिलहाल केवल बैठकों का दौर ही जारी है, जो राजनीतिक नाटक को और रोमांचक बना रहा है। Bihar Election
IRCTC घोटाले की पेशी के सिलसिले में लालू, राबड़ी और तेजस्वी यादव दिल्ली पहुंचे, और चर्चा थी कि तेजस्वी की राहुल गांधी से मुलाकात होगी, जिससे महागठबंधन में सीट बंटवारे का गतिरोध टूट सके। तेजस्वी पहुंचे, लेकिन सीधे राहुल से मिलने का अवसर नहीं मिला। इसके बजाय उनकी बातचीत कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और बिहार के वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई, पर नतीजा रहस्यमय ही रहा। पटना लौटकर तेजस्वी ने केवल इतना कहा कि महागठबंधन एकजुट है और टिकट बंटवारे की घोषणा जल्द होने वाली है। यह बयान भले शांतिपूर्ण लगा, लेकिन राजनीतिक गलियारों में सस्पेंस और शंका की हवा बना गई है।
बैठकें लंबित और सीटों की आधिकारिक घोषणा न होने के बावजूद, महागठबंधन के छोटे दल अपनी चाल चलने लगे हैं। सीपीआई (एमएल) ने पहले ही छह सीटों के लिए टिकट बांट दिए हैं, जबकि आरजेडी ने भी यह प्रक्रिया शुरू कर दी है। कुछ उम्मीदवारों की तस्वीरें लालू यादव से टिकट लेते हुए सोशल मीडिया पर भी सामने आई हैं, जो गठबंधन में हड़कंप का संकेत देती हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस अभी भी मौन साधे हुए है और किसी भी सीट या उम्मीदवार का ऐलान करने से बच रही है। इस स्थिति ने महागठबंधन की रणनीति को रोमांचक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना दिया है।
वीआईपी(VIP) प्रमुख मुकेश सहनी, जो महागठबंधन में तेजस्वी यादव के ‘कथित बड़े भाई’ के रूप में सामने आए थे, अब राजनीतिक दबाव में फंसे हुए हैं। उनकी सीटों की मांगें 60 से घटकर 30 रह गई हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान सहनी ने खुद को भावी महागठबंधन सरकार का डिप्टी सीएम घोषित कर रखा था। बिहार में राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा में सहनी बड़े उत्साह के साथ शामिल हुए, लेकिन अब कांग्रेस की नजर में उनकी छवि सवालों के घेरे में है। वहीं, उनके एनडीए से संपर्क की अफवाहें भी जोर पकड़ रही हैं। यदि ये अफवाहें सच साबित होती हैं, तो यह महागठबंधन की चुनावी रणनीति में बड़ा तूफ़ान खड़ा कर सकती हैं। Bihar Election
हरियाणा और दिल्ली के चुनावी अनुभव ने साफ कर दिया है कि गठबंधन टूटे तो वोट बंटते हैं और हार लगभग तय हो जाती है। बिहार में भी सीट बंटवारे को लेकर जो उलझन और खींचतान देखने को मिल रही है, वह कांग्रेस के लिए चेतावनी की घंटी है। यदि महागठबंधन समय रहते अपनी रणनीति स्पष्ट नहीं करता, तो दिल्ली जैसा नतीजा बिहार में भी दोहराया जा सकता है। राजनीतिक गलियारों में फिलहाल यही बहस तेज हो रही है कि क्या कांग्रेस अपनी भूल सुधार पाएगी या फिर उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। Bihar Election