
बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के कई दिन बीत जाने के बावजूद महागठबंधन और एनडीए के बीच सीट शेयरिंग पर अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। बातचीत का दौर जारी है और राजनीतिक हलकों में कयासों का दौर भी तेज़ है। इसी बीच, राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ पार्टी ने चुनावी मैदान में अपनी दस्तक देते हुए 51 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची के जरिए पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह हर समाजिक वर्ग को अपनी पकड़ में लाने का प्रयास कर रही है। Bihar Assembly Elections 2025
इस लिस्ट में कई नाम लोगो का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं। भोजपुरी गायक रितेश रंजन पांडे, पूर्व आईपीएस अधिकारी आर.के. मिश्रा और समाजवादी नेता स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर की पोती जागृति ठाकुर। इसके अलावा, पार्टी ने अपने उम्मीदवारों में पेशेवर विशेषज्ञता को भी जगह दी है। डॉक्टर अमित कुमार दास (मुजफ्फरपुर), डॉक्टर शशि शेखर सिन्हा (गोपालगंज), डॉक्टर अजीत कुमार (इमामगंज), डॉक्टर विजय कुमार गुप्ता (आरा) और डॉक्टर लाल बाबू प्रसाद (ढाका) जैसे नाम इस सूची में शामिल हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशांत किशोर की इस रणनीति का सबसे ज्यादा असर महागठबंधन पर पड़ेगा या NDA पर। जनता की प्रतिक्रिया और इन उम्मीदवारों की पकड़ चुनावी समीकरण बदलने की क्षमता रखती है। Bihar Assembly Elections 2025
राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की पहली सूची में 51 उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा ध्यान अति पिछड़े वर्ग पर दिया गया है। इस वर्ग के उम्मीदवारों को कुल 17 सीटें दी गई हैं, जबकि सामान्य पिछड़े वर्ग के लिए 11 सीटें और अल्पसंख्यक समुदाय के लिए 9 सीटें आरक्षित की गई हैं। शेष सीटें सामान्य वर्ग के लिए रखी गई हैं। पहले चरण में मतदान के लिए बिहार की 121 सीटों में से जन सुराज ने 51 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इनमें कई सीटें ऐसी हैं जहाँ मुकाबला बेहद कांटे का और नजदीकी रहा है।
पिछले चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि 51 सीटों में से 18 पर हार-जीत का अंतर 10 हजार से भी कम वोटों का था। इनमें से 13 सीटें ऐसी थीं जहाँ अंतिम क्षण तक कड़ा मुकाबला जारी रहा और विजयी उम्मीदवार ने महज 5 हजार वोटों से जीत दर्ज की। इसके अलावा 29 सीटों पर हार-जीत का अंतर 16 हजार वोटों से भी कम रहा, जो दिखाता है कि ये क्षेत्र चुनावी दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक हैं।
दिलचस्प यह है कि 51 सीटों में से 19 ऐसे हैं, जहाँ मुकाबला पिछले चुनावों में बेहद कांटे का और नजदीकी रहा। इनमें से 3 सीटें तो इतनी नाज़ुक रहीं कि हार-जीत का अंतर एक हजार वोटों से भी कम था।बेगुसराय जिले की मतिहानी सीट पर केवल 333 वोटों के अंतर से चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने जीत दर्ज की थी। उस समय पार्टी किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं थी, लेकिन इस बार चिराग NDA के साथ चुनाव मैदान में हैं।
गोपालगंज जिले की भोरे सीट, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, पर JDU को केवल 462 वोटों के अंतर से जीत मिली। वहीं, खगड़िया जिले की परबत्ता सीट पर JDU ने 951 मतों के मामूली अंतर से बाजी मारी। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि बिहार के कई क्षेत्र चुनावी दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक हैं, और इस बार छोटे अंतर भी बड़े राजनीतिक बदलाव की दिशा तय कर सकते हैं।
इन तीन बेहद कड़े मुकाबलों के अलावा, 10 और सीटें—प्राणपुर, सिमरी बख्तियारपुर, महिषी, दरभंगा ग्रामीण, बेगुसराय, खगड़िया, बेल्हार, आरा, करगहर और बोधगया—ऐसी रहीं जहाँ हार-जीत का अंतर सिर्फ 5 हजार वोटों से भी कम रहा। पूर्व चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन एनडीए को 11 सीटों पर नजदीकी मुकाबले में जीत हासिल हुई। वहीं, उन सीटों पर जहाँ अंतर एक हजार वोटों से भी कम था, वहाँ भोरे और परबत्ता पर JDU ने और मतिहानी पर लोक जनशक्ति पार्टी ने जीत दर्ज की। Bihar Assembly Elections 2025
ध्यान देने वाली बात यह है कि उस समय लोक जनशक्ति पार्टी NDA का हिस्सा नहीं थी। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि बिहार की कई सीटें चुनावी दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक हैं। छोटे-से छोटे मत अंतर भी इस बार समीकरण बदलने की पूरी क्षमता रखते हैं, और इसी वजह से 2025 का विधानसभा चुनाव पहले से कहीं ज्यादा उत्साही और नाटकीय होने की उम्मीद है। Bihar Assembly Elections 2025
देखा जाए तो 51 सीटों में से 19 पर हुए कड़े मुकाबले में एनडीए ने 11 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि एक सीट लोक जनशक्ति पार्टी के खाते में गई। यानी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए के लिए कुल 12 सीटें ऐसी हैं, जहाँ प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी का खेल सीधे असर डाल सकता है। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी अब NDA के साथ है, जिससे गठबंधन की स्थिति और मजबूत हुई है। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल की अगुवाई वाले महागठबंधन को इस बार केवल 7 सीटों पर 10 हजार से कम वोटों से जीत मिली।
इनमें से 6 सीटों पर JDU को और 5 सीटों पर बीजेपी को मुश्किल से जीत दर्ज करनी पड़ी। ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि छोटा-सा मत अंतर भी इस बार चुनावी समीकरण बदलने की पूरी क्षमता रखता है, और प्रशांत किशोर की पार्टी ने खेल मैदान में उतरते ही दोनों बड़े गठबंधनों के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। Bihar Assembly Elections 2025
बिहार चुनाव 2025 में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना बढ़ती नजर आ रही है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी बड़े जोश और रणनीति के साथ मैदान में उतरी है। 51 सीटों में से लगभग 19 सीटें पिछली बार बेहद नज़दीकी मुकाबले वाली थीं, और अगर इस बार जन सुराज इन सीटों पर वोटों में सेंध लगाने में सफल रहती है, तो एनडीए को सीधे-सीधे नुकसान उठाना पड़ सकता है। अब सारा ध्यान इस बात पर है कि एनडीए संभावित घाटे को रोकने के लिए कौन-कौन सी रणनीति अपनाता है और महागठबंधन के लिए भी यह एक चुनौतीपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। यही चुनाव इस बार बिहार की राजनीति में सस्पेंस और रोमांच पैदा कर रहा है। Bihar Assembly Elections 2025