
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनजर कांग्रेस इस बार बेहद सतर्क और रणनीतिक मूव कर रही है। महागठबंधन में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला भले ही अभी अंतिम रूप नहीं पा सका हो, लेकिन पार्टी ने पहले ही उन सीटों की पहचान कर ली है, जहां जीत की संभावना सबसे अधिक है। खास नजर दलित और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों पर है, और सीमांचल को कांग्रेस की रणनीति में ‘की-एरिया’ की हैसियत मिली है। दिल्ली में हुई दो दिवसीय बैठक में बिहार के नेताओं ने हाईकमान के सामने अपनी प्राथमिकताओं की पूरी सूची रखी। बैठक का मुख्य फोकस सीट बंटवारे के साथ-साथ एम-डी (मुस्लिम-दलित) समीकरण पर रहा। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि सीमांचल की सीटों पर कोई समझौता नहीं होगा, लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि क्या आरजेडी इस पर सहमति दे पाएगी। Bihar Assembly Election 2025
2020 में बिहार में कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन केवल 19 ही सीटें जीत पाई थीं। इस बार पार्टी पीछे हटने को तैयार नहीं है। बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्ण अल्लावरू ने स्पष्ट किया है कि अब कांग्रेस केवल उन्हीं सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जहां जीत की मजबूत संभावना हो। नंबर गेम की बजाय रणनीति का फोकस ‘विनिंग सीट्स’ पर रहेगा। अल्लावरू ने बताया कि पार्टी ने अपनी सीटों की सूची राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को सौंप दी है, और समन्वय समिति में इस पर अभी चर्चा जारी है। उनका कहना है कि 15 सितंबर तक सीट शेयरिंग का अंतिम फैसला कर लिया जाएगा।
सीमांचल क्षेत्र कांग्रेस की चुनावी रणनीति का केंद्र बना हुआ है। पार्टी ने यहां की 26 विधानसभा सीटों में से 16 सीटों पर सीधे चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। इस इलाके की राजनीतिक मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस के चार सांसदों में तीन—कटिहार से तारिक अनवर, किशनगंज से डॉ. मो. जावेद और पूर्णिया से पप्पू यादव—सीमांचल से ही आते हैं। मुस्लिम बहुल यह क्षेत्र पार्टी को चुनावी बढ़त देता है, और यही वजह है कि कांग्रेस ने इसे अपनी सत्ता और वर्चस्व मजबूत करने के लिए रणनीतिक रूप से चुना है।
कांग्रेस ने बिहार में अपनी चुनावी रणनीति पूरी तरह से ‘वोट बैलेंस’ पर केंद्रित कर रखी है। इस बार पार्टी ने उन सीटों को प्राथमिकता दी है, जहां दलित और मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में इसी रणनीति ने कांग्रेस को सफलता दिलाई थी, और अब वही फॉर्मूला बिहार में दोहराया जा रहा है। इसी दृष्टि से पार्टी ने सीमांचल और दलित बहुल इलाकों को मुख्य फोकस बनाया है और इन सीटों पर किसी भी प्रकार के समझौते से परहेज़ किया है। इस बार कांग्रेस 70 की बजाय लगभग 55–60 ही सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है, लेकिन केवल उन सीटों पर जहां जीत की संभावना मजबूत हो। पार्टी का संदेश स्पष्ट है—संख्या की बजाय गुणवत्ता और जीत की संभावना। Bihar Assembly Election 2025