
बिहार की सियासत में सीवान एक ऐसा इलाका है, जहां बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन की छवि आज भी चर्चा का विषय है। कभी डर, कभी दबदबा और कभी जनसमर्थन शहाबुद्दीन का नाम इन तीनों का पर्याय बन चुका था। अब उनकी विरासत को आगे बढ़ाने मैदान में हैं उनके बेटे ओसामा शहाब, जो रघुनाथपुर सीट से राजद उम्मीदवार के तौर पर किस्मत आजमा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या पिता का नाम ओसामा की जीत का आधार बनेगा या वही अतीत उनकी राह में सबसे बड़ी दीवार खड़ी करेगा? Bihar Elections 2025
ओसामा शहाब को आरजेडी ने रघुनाथपुर से टिकट दिया है, वो भी अपने ही मौजूदा विधायक हरिशंकर यादव का टिकट काटकर। वजह साफ है शहाबुद्दीन फैक्टर। हरिशंकर, जो दो बार इसी सीट से विधायक रह चुके हैं, शहाबुद्दीन के करीबी माने जाते थे और अब बेटे ओसामा के लिए पूरी ताकत झोंक चुके हैं। रघुनाथपुर, जो सीवान लोकसभा क्षेत्र का अहम हिस्सा है, वही इलाका है जहां शहाबुद्दीन परिवार की गहरी पकड़ रही है। हिना शहाब ओसामा की मां चार बार लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं, लेकिन जीत नहीं सकीं। अब बेटे की बारी है, और उम्मीद वही पुरानी ‘एमपी साहब’ की विरासत का असर वोट में तब्दील हो। Bihar Elections 2025
इस सीट पर मुकाबला दिलचस्प है।
ओसामा शहाब (RJD)
विकास कुमार सिंह उर्फ जीशु सिंह (JDU)
राहुल कुमार सिंह (जन सुराज, प्रशांत किशोर की पार्टी)
रघुनाथपुर में समीकरण जातीय और सामुदायिक दोनों हैं 23% मुस्लिम, 12% यादव, 10% राजपूत, साथ ही दलित और अति पिछड़े मतदाता निर्णायक भूमिका में है। यही कारण है कि आरजेडी इस सीट पर ‘MY फॉर्मूला’ (मुस्लिम-यादव गठजोड़) के भरोसे है, जबकि जेडीयू ठाकुर और अति पिछड़े वर्ग के वोट बैंक पर दांव लगा रही है।
ओसामा की पहचान ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। पिता का नाम उन्हें टिकट और प्रचार दोनों दिला रहा है। जनसभाओं में ओसामा कहते हैं “एमपी साहब के काम को आगे बढ़ाने का मौका दीजिए।” लेकिन यही नाम विपक्ष के लिए सबसे बड़ा हथियार बन गया है। जेडीयू और बीजेपी दोनों ओसामा को ‘अपराध की विरासत’ का वारिस बताने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। अमित शाह ने सीवान की सभा में कहा“शहाबुद्दीन के बेटे को टिकट देकर आरजेडी ने अपने असली चेहरे को उजागर किया है। वहीं योगी आदित्यनाथ ने रघुनाथपुर की रैली में ‘तेज़ाब कांड’ का जिक्र करते हुए कहा अपराध का दौर लौटने नहीं देंगे।
शहाबुद्दीन ने 1992 से 2004 के बीच चार बार सीवान से सांसद के तौर पर जीत दर्ज की थी। उनकी राजनीतिक पकड़ इतनी मजबूत थी कि जिसके कंधे पर उन्होंने हाथ रखा, वो नेता बन गया। मगर अदालत की सजा और जेल जाने के बाद उनका साम्राज्य बिखर गया। 2021 में मौत के बाद अब वही विरासत बेटे ओसामा के हाथ में है। लेकिन वक्त बदल चुका है सीवान की नई पीढ़ी शहाबुद्दीन के डर से नहीं, विकास के वादों से प्रभावित होती दिख रही है। यही ओसामा की असली परीक्षा है क्या वे पिता की ताकत को राजनीतिक पूंजी में बदल पाएंगे या वही अतीत उनके भविष्य को निगल जाएगा? Bihar Elections 2025
रघुनाथपुर की जमीन अब सिर्फ जातीय समीकरण नहीं, बल्कि छवि और साख की जंग बन चुकी है। जहां आरजेडी शहाबुद्दीन की ‘लोकप्रियता’ को भुनाना चाहती है, वहीं एनडीए उनके ‘कांडों’ की याद दिलाकर मतदाताओं को सावधान कर रही है। इस चुनाव में जीत सिर्फ वोटों की नहीं, बल्कि उस ‘विरासत’ की भी होगी, जिसे लेकर ओसामा मैदान में उतरे हैं। Bihar Elections 2025