
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तापमान चरम पर है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव की अगुवाई में निकली ‘वोटर अधिकार यात्रा’ आज पटना में अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँचेगी। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की जोड़ी ने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के जरिए विधानसभा चुनाव से पहले माहौल गर्मा दिया है। 17 अगस्त को सासाराम से शुरू हुई इस यात्रा ने दो हफ्तों में 23 जिलों और 1300 किलोमीटर का सफर तय कर विपक्षी एकजुटता और शक्ति प्रदर्शन का मंच तैयार कर दिया है। पटना के गांधी मैदान से लेकर अंबेडकर पार्क तक होने वाला समापन मार्च सिर्फ यात्रा का अंत नहीं, बल्कि इसे कांग्रेस-राजद गठबंधन की चुनावी रणनीति का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। Bihar Assembly Election 2025
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पटना की सड़कों पर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की जोड़ी विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत दिखाने को तैयार है। गांधी मैदान से लेकर अंबेडकर प्रतिमा तक का पैदल मार्च विपक्षी गठबंधन का चुनावी ट्रेलर है, जिसमें कांग्रेस और राजद महात्मा गांधी और बाबा साहेब अंबेडकर की विरासत को साधकर दलितों और युवाओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करना चाहती हैं। यह ‘गांधी से अंबेडकर मार्च’ विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष की सबसे बड़ी राजनीतिक चाल मानी जा रही है।
समापन कार्यक्रम में राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, भाकपा-माले महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी मंच साझा करेंगे। शरद पवार, हेमंत सोरेन, संजय राउत, सुप्रिया सुले और यूसुफ पठान जैसे नेता भी मौजूद रहेंगे। यह जमावड़ा न सिर्फ पटना की सड़कों पर विपक्षी एकजुटता का प्रदर्शन करेगा, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और जेडीयू को सीधा संदेश देगा।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने सियासी दांव चल दिया है। दोनों नेता अंबेडकर और गांधी की विरासत को आधार बनाकर दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्ग को साधने की कोशिश में हैं। बिहार में करीब 18 प्रतिशत दलित आबादी है, जो चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती है। 2024 लोकसभा चुनाव में संविधान और आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष को आंशिक सफलता मिली थी, अब राहुल और तेजस्वी उसी नैरेटिव को और मजबूत करने की कोशिश में हैं।
यह काफिला उन जिलों से होकर गुजरा, जहां बीजेपी, जेडीयू और लोजपा(रा) का मजबूत जनाधार माना जाता है। सीमांचल और मिथिलांचल जैसे मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग बहुल क्षेत्रों से होते हुए यह यात्रा भोजपुर के रास्ते पटना पहुँची। यानी विपक्ष ने यह जताने की कोशिश की है कि वह सभी वर्गों को साधने के इरादे से मैदान में उतरा है। Bihar Assembly Election 2025