
कुछ फिल्में सिर्फ सिनेमाघरों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि रिलीज से पहले ही चर्चा का विषय बन जाती हैं। अनुराग कश्यप की ‘निशानची’ ऐसी ही फिल्मों में से एक है। जब से इसका ऐलान हुआ, दर्शकों की उत्सुकता लगातार बढ़ती गई। सवाल था—क्या ये फिल्म उम्मीदों पर खरी उतरेगी या फिर निराश करेगी? सच यह है कि फिल्म में कई ऐसे पल हैं जो आपको रोमांचित कर देंगे, लेकिन कुछ कमियां भी हैं जो अनुभव को थोड़ा हल्का कर देती हैं। तो आइए जानते हैं, ‘निशानची’ में वो क्या है जो इसे खास बनाता है और क्या यह फिल्म वाकई आपके टिकट की कीमत वसूल कराती है। Nishaanchi Review
‘निशानची’ की कहानी जुड़वां भाई डब्लू और बब्लू के इर्द-गिर्द घूमती है। दिखने में दोनों एक जैसे हैं, लेकिन आदतों और स्वभाव में उनका फर्क आसमान-ज़मीन का है। डब्लू सीधा-सादा है, जबकि बब्लू मुश्किलों में घिरा रहता है। कहानी का पहला हिस्सा इन्हीं दोनों भाईयों के व्यक्तित्व और उनके रिश्तों की उलझनों को समझने में बीतता है। फिल्म में मोनिका, यानी मां मंजिरी और कुमुद मिश्रा के अंबिका प्रसाद की एंट्री से कहानी में नई हलचल आती है।
अंबिका ही परिवार की परेशानियों की जड़ है, और उनके काले कारनामों में पिता की मौत भी शामिल है। अंबिका अपनी ताकत दिखाता है और बब्लू उसका सहायक बन जाता है। छोटे शहर में छिपे राज और मोनिका के किरदार से जुड़ी घटनाओं की वजह से कहानी में कई मोड़ आते हैं। रिंकू (वेदिका पिंटो) के प्रवेश से दोनों भाइयों की जिंदगी बदलती है। सवाल यह है कि क्या ये भाई कभी सही रास्ते पर आ पाएंगे? इसका जवाब जानने के लिए आपको थिएटर जाना ही पड़ेगा।
अनुराग कश्यप की फिल्मों की पहचान उनका बेबाक और वास्तविक अंदाज है। ‘निशानची’ में भी गालियां, प्यार और एक्शन की कमी नहीं है। हालांकि फर्स्ट हाफ थोड़ा धीमा लगता है, क्योंकि किरदारों को पूरी तरह पेश होने में समय लगता है। लेकिन सेकंड हाफ में कहानी में ऊर्जा आती है। फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण हैं इसके देसी और मजेदार डायलॉग्स। जैसे बब्लू का अंबिका से संवाद – ‘आपको मुग़ल-ए-आज़म खेलना है या हम आपके हैं कौन…’ – दर्शकों को हंसी और उत्सुकता दोनों में बांधता है। हालांकि, कहानी में कई बातें एक साथ समेटने की कोशिश कहीं-कहीं बोझिल लगती है।
ऐश्वर्य ठाकरे ने अपने डेब्यू में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उनका डबल रोल – डब्लू और बब्लू – संतुलित और प्रभावशाली है। मोनिका ने मां की भूमिका में दिल छू लेने वाला अभिनय किया है। वेदिका पिंटो का रोल ठीक है, लेकिन वह दर्शक पर गहरी छाप नहीं छोड़ पातीं। जीशान अय्यूब और कुमुद मिश्रा जैसे अनुभवी कलाकार भी अपने छोटे रोल में शानदार हैं। विनीत सिंह को कम स्क्रीन टाइम मिला है, फिर भी उनका काम शानदार है।
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी शानदार है, हर सीन खूबसूरती से कैप्चर किया गया है। बावजूद इसके, कुछ हिस्से थोड़े लंबे लगते हैं। कुछ गाने और बैकस्टोरी खींचे हुए महसूस होते हैं। एडिटिंग में थोड़ी और कसी हुई मेहनत बेहतर परिणाम ला सकती थी। फिल्म के अंत में एक सरप्राइज ट्विस्ट है, जिसे जानने के लिए आपको थिएटर जाना होगा। Nishaanchi Review