
15 अगस्त 1947—एक तरफ़ देशभर में आज़ादी का बिगुल बज रहा था, तो दूसरी ओर हिंदी सिनेमा के परदे पर भी एक नया इतिहास रचा जा रहा था। आज़ादी की पहली सुबह के साथ ही रिलीज़ हुई इस फिल्म ने न केवल स्वतंत्र भारत की पहली सुपरहिट का दर्जा हासिल किया, बल्कि दर्शकों को उस युवा चेहरे से भी मिलवाया, जो आगे चलकर भारतीय संगीत का अमर सितारा बना। 79वें स्वतंत्रता दिवस के इस जश्न में, आइए लौटते हैं उस ऐतिहासिक पल की ओर, जब परदे पर ‘शहनाई’ गूंजी और दिलों में देशभक्ति की धुन बसी। Independence Indias first hit film
15 अगस्त 1947—एक ओर गलियों में आज़ादी के नारे गूंज रहे थे, तो दूसरी ओर बंटवारे के घाव लोगों के दिलों को चीर रहे थे। इसी उथल-पुथल और उम्मीद से भरे माहौल में, पी.एल. संतोषी की फिल्म शहनाई बड़े पर्दे पर उतरी। यह सिर्फ़ एक रिलीज़ नहीं थी, बल्कि नए भारत के सिनेमा का वह जश्न थी, जिसने दर्शकों के दिलों में खुशी और उमंग की एक नई धुन भर दी।
फिल्म की कथा एक संघर्षशील कलाकार और उसकी चार बेटियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां पत्नी को पति के पेशे से जुड़ी सामाजिक बदनामी की चिंता सताती रहती है। मुख्य भूमिकाओं में थे नासिर खान—महान अभिनेता दिलीप कुमार के छोटे भाई, उनके साथ लोकप्रिय अदाकारा रेहाना और इंदुमती। मुस्लिम सामाजिक पृष्ठभूमि में रची-बसी यह कहानी उस दौर के दर्शकों के दिलों को छू गई। उस समय देश के कई हिस्सों में दंगे चल रहे थे, लोग उजड़कर नए ठिकानों की तलाश में थे। फिर भी शहनाई के लिए थिएटरों के बाहर दर्शकों की लंबी कतारें लगती रहीं। यह 1947 की सर्वाधिक कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हुई, हालांकि उस दौर के सटीक बॉक्स ऑफिस आंकड़े आज उपलब्ध नहीं हैं।
इस फिल्म में 18 वर्षीय किशोर कुमार ने पुलिस इंस्पेक्टर का छोटा-सा रोल निभाया था। उस समय वे गायकी की दुनिया में नहीं, बल्कि अभिनय के शुरुआती कदम रख रहे थे। फिल्म में हास्य कलाकार वी.एच. देसाई और मशहूर कॉमेडियन महमूद के पिता मुमताज अली भी शामिल थे। शहनाई ने अभिनेत्री रेहाना को रातों-रात शोहरत दिलाई और वे अगले पांच वर्षों तक सिल्वर स्क्रीन की लोकप्रिय चेहरा बनी रहीं। हालांकि नासिर खान को यह फिल्म वह ऊंचाई नहीं दिला सकी, जो उनके भाई दिलीप कुमार के हिस्से आई। Independence Indias first hit film