
मूंगफली की खेती से बढ़ा अपना मुनाफा (फाइल फोटो)
मूंगफली की खेती से कम लागत में दोगुना मुनाफा, जानिए बुवाई का सही समय और टिप्स
मूंगफली के लिए भुरभुरी बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। मिट्टी का पीएच मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए। ध्यान रहे, भारी या चिकनी मिट्टी में पानी भरने से फलियां सड़ने का खतरा रहता है, इसलिए ऐसी जमीन से बचें। खेत की तैयारी के लिए पहले मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करें।
Peanut Farming: भारतीय किसानों के लिए मूंगफली (Groundnut) की खेती एक 'गोल्डमाइन' साबित हो सकती है। तेल, चटनी, नमकीन और पशु चारे के लिए इस्तेमाल होने वाली यह फसल साल भर मांग में रहती है, जिससे किसानों को शानदार मुनाफा मिलता है। खास बात यह है कि यह फसल कम पानी और कम देखभाल में भी बंपर पैदावार देने की क्षमता रखती है। अगर आप भी मूंगफली की खेती का लाभ उठाना चाहते हैं, तो यहां हम आपको बीज से लेकर कटाई तक की पूरी गाइड दे रहे हैं।
बुवाई का सही समय कब है?
मूंगफली की खेती मुख्य रूप से तीन मौसमों में की जाती है, लेकिन सबसे ज्यादा उत्पादन 'खरीफ सीजन' में होता है।
- खरीफ की फसल (मुख्य): यह सबसे लोकप्रिय सीजन है। मानसून की शुरुआत के साथ 15 जून से 15 जुलाई के बीच बुवाई करना सबसे फायदेमंद माना जाता है। उत्तर भारत में जुलाई के पहले हफ्ते तक बुवाई पूरी कर लेनी चाहिए, वरना पैदावार प्रभावित हो सकती है।
- रबी की फसल: सिंचाई वाले इलाकों में अक्टूबर-नवंबर या दिसंबर-जनवरी में बुवाई की जाती है।
- जायद की फसल: मार्च-अप्रैल में सिंचाई के साधन उपलब्ध होने पर इसकी बुवाई संभव है।
कैसी हो मिट्टी और खेत की तैयारी?
मूंगफली के लिए भुरभुरी बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। मिट्टी का पीएच मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए। ध्यान रहे, भारी या चिकनी मिट्टी में पानी भरने से फलियां सड़ने का खतरा रहता है, इसलिए ऐसी जमीन से बचें। खेत की तैयारी के लिए पहले मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करें, फिर 2-3 बार कल्टीवेटर चलाकर खेत समतल करें। दीमक के प्रकोप से बचाव के लिए अंतिम जुताई में क्विनलफॉस (1.5%) का इस्तेमाल करें।
बीज का चुनाव और उपचार
अच्छी पैदावार के लिए बीज का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण है।
- बीज मात्रा:फैलने वाली किस्मों के लिए 60-80 किलो और गुच्छे वाली किस्मों के लिए 75-100 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की जरूरत होती है।
- उपचार: बोने से 10-15 दिन पहले फलियों से दाने अलग करें। बोने से पहले थाइरम (3 ग्राम/किलो) या मेंकोजेब (2 ग्राम/किलो) से बीज का उपचार जरूर करें।
बुवाई का तरीका और दूरी
- कतार से कतार की दूरी: फैलने वाली किस्मों में 45 सेमी और गुच्छे वाली में 30 सेमी रखें।
- पौधे से पौधे की दूरी: 10-15 सेमी।
- गहराई: बीज को 5-6 सेमी गहराई पर बोना चाहिए।
प्रमुख उन्नत किस्में
रोग प्रतिरोधी क्षमता और ज्यादा उत्पादन के लिए TG-37A, GG-20, JL-24 (फूले प्रगति), TAG-24 और TPG-41 जैसी किस्में बेहतर विकल्प हैं।
सिंचाई और खाद का प्रबंधन
मूंगफली दलहनी फसल होने के कारण कम नाइट्रोजन की जरूरत होती है। डीएपी खाद के बजाय सुपर फॉस्फेट और यूरिया का इस्तेमाल करें, क्योंकि डीएपी से 'गलन रोग' लगने का खतरा होता है। पानी का प्रबंधन भी अहम है। बुवाई के 20-25 दिन बाद पहली सिंचाई करें। फूल आने (40-45 दिन), खूंटी बनने (55-70 दिन) और फली भरने के समय सिंचाई न छोड़ें। खरपतवार की रोकथाम के लिए पेंडीमेथालिन का छिड़काव फायदेमंद रहता है।
फसल कब करें तैयार?
बुवाई के 90 से 150 दिनों के बाद (किस्म के अनुसार) जब पत्तियां पीली पड़ने लगें और फलियां सख्त महसूस हों, तो समझ जाइए कि फसल कटाई के लिए तैयार है। सही समय पर कटाई करने से अच्छी गुणवत्ता का उत्पादन मिलता है और किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं। Peanut Farming