Budget 2026: Budget 2026 से पहले केंद्र सरकार ने अगले तीन सालों के लिए 852 PPP प्रोजेक्ट्स का ब्लूप्रिंट पेश किया है। इन प्रोजेक्ट्स की अनुमानित लागत 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। सरकार का मकसद इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ बढ़ाना, निवेशकों को अवसर देना और लाखों रोजगार सृजन करना है।

केंद्र सरकार ने बजट 2026 से पहले देश की इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक ग्रोथ की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने अगले तीन सालों के लिए 852 पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) प्रोजेक्ट्स का ब्लूप्रिंट जारी किया है जिनकी कुल लागत 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इन प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना नहीं है बल्कि निवेश को आकर्षित करना, रोजगार सृजन करना और आर्थिक विकास को गति देना भी है।
ये मेगा प्रोजेक्ट्स सड़क, रेल, बिजली, जल संसाधन, पेट्रोलियम और एविएशन सेक्टर सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कवर करते हैं। बजट पेश होने से पहले इस ब्लूप्रिंट ने निवेशकों और कंपनियों की नजरें अपनी ओर खींच ली हैं जिससे देश में आने वाले वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर बूम देखने को मिलेगा।
वित्त मंत्रालय ने यह घोषणा करते हुए बताया कि केंद्रीय और राज्य स्तर पर 852 PPP प्रोजेक्ट्स की तीन-वर्षीय पाइपलाइन तैयार की गई है। इन प्रोजेक्ट्स की अनुमानित लागत 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। फाइनेंशियल प्लान के मुताबिक, यह पाइपलाइन निवेशकों, डेवलपर्स और अन्य संबंधित पक्षों को प्रारंभिक जानकारी देती है, ताकि वे सोच-समझकर निवेश और प्रोजेक्ट डेवलपमेंट के फैसले ले सकें। इसका सीधा फायदा यह होगा कि देश में इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ तेज होगी निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
मंत्रालय के अनुसार, कुल 852 प्रोजेक्ट्स में से 232 प्रोजेक्ट्स केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा शुरू किए जाएंगे जिन पर 13.15 लाख करोड़ रुपये खर्च होगा। 620 प्रोजेक्ट्स राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा क्रियान्वित किए जाएंगे जिन पर 3.84 लाख करोड़ रुपये खर्च होगा। केंद्र सरकार की तरफ से सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है। इनके 108 प्रोजेक्ट्स पर कुल बजट 8.76 लाख करोड़ रुपये है। इसके बाद बिजली मंत्रालय के 46 प्रोजेक्ट्स (3.4 लाख करोड़ रुपये) और रेल मंत्रालय के 13 प्रोजेक्ट्स (30,904 करोड़ रुपये) आते हैं।
अन्य मंत्रालयों और विभागों की योजना इस प्रकार है:
जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग-29 प्रोजेक्ट्स, खर्च 12,254 करोड़ रुपये।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय-8,743 करोड़ रुपये की परियोजनाएं।
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग- 2 परियोजनाएं, बजट 6,646 करोड़ रुपये।
नागर विमानन मंत्रालय11- प्रोजेक्ट्स, खर्च 2,262 करोड़ रुपये।
राज्यों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी आंध्र प्रदेश की है जहां 270 प्रोजेक्ट्स पर खर्च अनुमानित 1.16 लाख करोड़ रुपये है। इसके बाद तमिलनाडु का स्थान है जहां 70 परियोजनाओं पर 87,640 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है। इन PPP प्रोजेक्ट्स का सीधा फायदा निवेशकों और शेयर बाजार को होगा। EPC कंपनियों, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स, स्टील और सीमेंट सेक्टर के स्टॉक्स में वृद्धि की उम्मीद है। निवेशकों के लिए यह एक सुनहरा मौका है क्योंकि उन्हें समय से पहले जानकारी मिल रही है कि आने वाले वर्षों में कौन से प्रोजेक्ट्स सबसे बड़े अवसर प्रदान करेंगे।
इन 852 प्रोजेक्ट्स से लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। निर्माण, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। इस तरह यह सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं है बल्कि देश की आर्थिक गति को नई दिशा देगा।