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इंश्योरेंस कंपनियां अब ई-बाइक्स और स्कूटर्स के लिए भी पॉलिसी देती हैं जिससे आपकी बाइक की सुरक्षा बढ़ जाती है। इलेक्ट्रिक बाइक इंश्योरेंस एक प्रकार का बाइक इंश्योरेंस है जो बाइक या स्कूटर को नुकसान की स्थिति में कवरेज देता है। यह बीमा कानूनी रूप से भी बेहद जरूरी है।

सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। साल 2013 से राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन योजना (NEMMP) जैसे कई प्रयास ई-बाइक्स को बढ़ावा देने में मदद कर रहे हैं। ई-बाइक भी अन्य वाहनों की तरह इंश्योरेंस के दायरे में आती है। इंश्योरेंस कंपनियां अब ई-बाइक्स और स्कूटर्स के लिए भी पॉलिसी देती हैं, जिससे आपकी बाइक की सुरक्षा बढ़ जाती है। इलेक्ट्रिक बाइक इंश्योरेंस एक प्रकार का बाइक इंश्योरेंस है जो बाइक या स्कूटर को नुकसान की स्थिति में कवरेज देता है। यह बीमा कानूनी रूप से भी जरूरी है और इसके साथ आप बिना चिंता के अपनी बाइक चला सकते हैं।
इंडिया में इलेक्ट्रानिक बाइक कवरेज मुख्य तौर पर तीन तरह के होते हैं। जैसे-
यह कानूनन जरूरी है। अगर आपकी ई-बाइक से किसी तीसरे व्यक्ति या उसकी संपत्ति को नुकसान होता है, तो इसका खर्च यह पॉलिसी उठाती है। लेकिन यह आपकी खुद की बाइक को हुए नुकसान को कवर नहीं करती।
यह पॉलिसी आपकी ई-बाइक को एक्सीडेंट, आग, चोरी, बाढ़, भूकंप या दंगे जैसी स्थितियों में होने वाले नुकसान को कवर करती है। इसमें थर्ड पार्टी कवरेज शामिल नहीं होता।
इसमें आपकी बाइक और थर्ड पार्टी दोनों को हुए नुकसान की भरपाई होती है। यह चोरी, मृत्यु और प्राकृतिक आपदाओं तक का कवरेज देती है, इसलिए इसे सबसे बेहतर और फुल-कवरेज पॉलिसी माना जाता है।
इलेक्ट्रिक बाइक इंश्योरेंस आज के समय में बहुत ही जरूरी हो चुका है। इसके पीछे कारण है, जिससे एक इलेक्ट्रिक बाइक मालिक के लिए बाइक इंश्योरेंस लेना बहुत ही जरूरी हो जाता है। जैसे: 1.कानूनी जरूरत: मोटर वाहन अधिनियम 1988 (Motor Vehicles Act, 1988) के मुताबिक, भारत की सड़कों पर चलने वाले सभी मोटर वाहन चालकों के पास थर्ड-पार्टी लायबिलिटी इंश्योरेंस (Third-Party Liability Insurance) होना ही चाहिए। इसके बिना गाड़ी चलाने पर आपको भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। 2.फाइनेशियल प्रोटेक्शन: फाइनेशियल प्रोटेक्शन: इलेक्ट्रिक बाइक्स पेट्रोल बाइक्स की तुलना में काफी महंगी होती है। इसके बॉडी पार्ट्स बैटरी और मोटर काफी महंगे होते हैं। ऐसे में किसी तरह के नुकसान या एक्सीडेंट की स्थिति में इंश्योरेंस आपके लिए वरदान बन सकता है। इससे आपको फाइनेशियल सिक्योरिटी मिलती है। वहीं, अगर आपकी बाइक चोरी हो जाती है, तो कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी होने पर आपकी ई-बाइक की भरपाई पॉलिसी के जरिए की जा सकती है। 3. पर्सनल एक्सीडेंट कवरेज: ज्यादातर कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसीज में पर्सनल एक्सीडेंट में भी कवरेज मिलता है। एक्सीडेंट की कंडीशन में चोट लगने या मौत होने पर यह पॉलिसी फाइनेंशियल सिक्योरिटी कवर देती हैं।
इलेक्ट्रिक बाइक इंश्योरेंस लेने के बहुत से फायदे हैं। जैसे- ई-बाइक चोरी होने की कंडीशन में इंश्योरेंस पॉलिसी से उसकी भरपाई की जाती है। यदि ई-बाइक का एक्सीडेंट होता है, तो उसके नुकसान की भरपाई इंश्योरेंस कंपनी करती है। इससे जेब पर बोझ नहीं आता। इलेक्ट्रिक बाइक इंश्योरेंस थर्ड पार्टी को होने वाले नुकसान और मृत्यु होने पर उसकी संपत्ति की भरपाई की भी सुविधा देता है। अगर ई-बाइक मालिक की दुर्घटना में चोट लगने से मृत्यु या एक्सीडेंट हो जाता है, तो उस स्थिति में परिवार को फाइनेंशियल सिक्योरिटी दी जाती है। बाइक की टूट-फूट की कंडीशन में इंश्योरेंस कंपनियां अपने नेटवर्क गैराज से कैशलेस रिपेयरिंग की भी सुविधा देती हैं। इलेक्ट्रिक बाइक इंश्योरेंस प्रीमियम को प्रभावित करने वाले कारक इलेक्ट्रिक बाइक इंश्योरेंस का प्रीमियम कर चीजों पर निर्भर करता है। कई बातों को ध्यान में रखकर ही प्रीमियम की दरें तय की जाती हैं।
बाइक का मॉडल जितना महंगा होगा और वह जितनी प्रीमियम होगी, उसका इंश्योरेंस प्रीमियम दरें भी उतनी ही ज्यादा होगी। हाई-एंड मॉडल की प्रीमियम दरें ज्यादा ही होती हैं।
नई इलेक्ट्रिक बाइक का प्रीमियम दरें ज्यादा ही होती हैं क्योंकि उसकी मार्केट वैल्यू भी ज्यादा होती है।
इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू का मतलब होता है कि इंश्योरेंस कंपनी का रिस्क ज्यादा है। ऐसे में प्रीमियम भी ज्यादा होगा।
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे महानगरों में छोटे शहरों के मुकाबले प्रीमियम की दरें ज्यादा होती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसी जगहों पर दुर्घटना की संभावना भी ज्यादा होती है।
कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी लेते हुए आप जितने ज्यादा ऐड-ऑन कवर लेंगे आपके प्रीमियम की दरें उतनी ही ज्यादा बढ़ जाएंगी। एड ऑन से सुरक्षा ज्यादा मिलती है, लेकिन इससे प्रीमियम की दरें भी महंगी हो जाती हैं।
अगर आप पॉलिसी के टाइम ड्यूरेशन में किसी तरह का क्लेम नहीं लेते हैं, तो आपको कंपनी से प्रीमियम में कुछ छूट मिल सकती है। हाई नो-क्लेम बोनस होने की स्थिति में रिन्यूअल के वक्त आपका प्रीमियम कम हो सकता है।
अगर आपकी बाइक में ARAI (Automotive Research Association of India) एंटी-थेफ्ट डिवाइस लगा है, तो कुछ इंश्योरेंस कंपनियां ऐसे पॉलिसीधारकों को प्रीमियम में छूट भी देती हैं। असल में ऐसा इसलिए हैं क्योंकि इस डिवाइस से चोरी का रिस्क काफी कम हो जाता है।
अगर आप पॉलिसी लेते हुए वॉलंटरी एक्सेस का ऑप्शन चुनते हैं, तो प्रीमियम कम हो जाता है। हालांकि, क्लेम के वक्त आपको ज्यादा पैसा देना होगा।
ई-बाइक राइडर का एक्सपीरियंस, एज और क्लेम हिस्ट्री का भी प्रीमियम पर असर पड़ता है। कम एक्सीरियंस वाले राइडर्स को ज्यादा जोखिम वाला माना जाता है, ऐसे में उनकी प्रीमियम दरें ज्यादा हो सकती हैं।
सही इलेक्ट्रिक बाइक इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के लिए आपको कुछ खास बातों का ख्याल रखना चाहिए। यह आपकी इलेक्ट्रिक बाइक और फाइनेंशियल सिक्योरिटी दोनों का प्रभावित करता है। एक आइडल इलेक्ट्रिक बाइक पॉलिसी खरीदते हुए आपको इन बातों का ख्याल रखना चाहिए: अगर आपकी बाइक महंगी है, तो आपको कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी या ऐड-ऑन की जरूरत होगी। इंश्योरेंस प्रीमियम हमेशा अपनी आर्थिक क्षमता के हिसाब से चुनें। पॉलिसी लेते हुए सही इंश्योरेंस कंपनी का चुनाव करें। पॉलिसी लेते हुए कवरेज, क्लेम, कस्टमर रिव्यू और नेटवर्क गैरेज जैसे फैक्टर की जांच करें। पॉलिसी लेते हुए, उसकी लागत और कटौती दोनों की जांच अच्छे से करें। एड-ऑन कवरेज के ऑप्शन को भी अच्छे से समझें और अपनी ई-बाइक की जरूरतों को ध्यान में रखकर इसे शामिल करें। शॉर्ट टर्म पॉलिसी लेने के बजाय लॉन्ग टर्म पॉलिसी लेने पर विचार करें। इससे लंबे वक्त तक कवरेज मिलता है।
अगर आपके पास भी इलेक्ट्रिक बाइक है, तो आपको इलेक्ट्रिक बाइक इंश्योरेंस जरूर लेना चाहिए। इससे ई-बाइक के साथ यदि कोई घटना होती है, तो ऐसी कंडीशन में पॉलिसी कंपनी भरपाई करती है। भारत में ई-बाइक के लिए भी इंश्योरेंस लेना कानूनी तौर पर जरूरी है। यदि आप बिना ई-बाइक इंश्योरेंस लिए सड़क पर बाइक चलाते हैं, तो आपको भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।