AI बूम का असली फायदा केवल IT सेक्टर को नहीं बल्कि पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को होगा। डेटा सेंटर्स और AI संचालन के लिए भारी उपकरण, बिजली और कूलिंग सिस्टम की जरूरत होती है। वैश्विक स्तर पर कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं जिससे स्विचगियर, जनरेटर और HVAC उद्योग में बड़ा अवसर पैदा हुआ है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज सिर्फ तकनीक नहीं बल्कि निवेश का एक बड़ा खेल बन चुका है। आम धारणा है कि इस दौड़ का सबसे बड़ा लाभ सॉफ्टवेयर और आईटी कंपनियों को मिलेगा। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि असली पैसा उन कंपनियों के पास जाएगा जो AI को चलाने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार कर रही हैं। भारी डेटा सेंटर्स, पावर सप्लाई, कूलिंग सिस्टम और उपकरण निर्माण जैसी जरूरतों के कारण, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सबसे ज्यादा कमाई का मौका है।
AI सिस्टम और डेटा सेंटर्स को चलाने के लिए सबसे पहली आवश्यकता बिजली है। इसके लिए बड़े पैमाने पर पावर जनरेशन और भारी उपकरणों की जरूरत होती है। ग्लोबल टेक कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं लेकिन इसका बड़ा हिस्सा सिर्फ सॉफ्टवेयर में नहीं बल्कि पावर सिस्टम, उपकरण निर्माण और मेटल सेक्टर में जा रहा है। AI का काम लगातार ऊर्जा खपत पर निर्भर है इसलिए ये सेक्टर लंबे समय तक मजबूत अवसर दे सकते हैं।
जैसे-जैसे हाइपरस्केलर्स अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं दुनिया भर में नए और विशाल डेटा सेंटर्स का निर्माण तेज हो गया है। इन सेंटर्स को चलाने के लिए कंप्यूटर के साथ-साथ हाई-टेक स्विचगियर, विशाल बैकअप जनरेटर, लंबी केबल और उन्नत कूलिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है। AI की ऊर्जा खपत से पैदा होने वाली गर्मी को नियंत्रित रखना सबसे बड़ी चुनौती है। इसलिए इन सहायक उपकरणों का निर्माण करने वाले उद्योगों को लगातार ऑर्डर मिलते रहेंगे।
भारत बड़े पैमाने पर सेमीकंडक्टर या मेमोरी चिप का उत्पादन नहीं करता लेकिन पावर इक्विपमेंट और HVAC सिस्टम में घरेलू कंपनियों की स्थिति मजबूत है। जैसे-जैसे वैश्विक डेटा सेंटर्स का जाल बिछेगा भारतीय कंपनियों के उत्पादों की मांग में भारी वृद्धि होगी। यह भारत के लिए AI बूम में बड़ा आर्थिक अवसर साबित हो सकता है।
AI बूम के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था में भी अच्छी खबरें हैं। कॉरपोरेट सेक्टर की कमाई में सुधार, बीएसई-500 कंपनियों के मुनाफे में बढ़ोतरी और निजी निवेश की वापसी, सभी संकेत देते हैं कि रियल एस्टेट, मेटल और नए डेटा सेंटर्स में निवेश के मौके खुलकर बढ़ रहे हैं। इससे ट्रांसपोर्ट और कमर्शियल व्हीकल सेक्टर को भी फायदा मिलेगा।