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भारत में पिछले कुछ सालों में AI आधारित तकनीकों का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ा है। बैंकिंग, आईटी, ई-कॉमर्स और कस्टमर सपोर्ट जैसी इंडस्ट्री अब ऐसे टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं जो कई काम बिना इंसानी मदद के कर सकते हैं। कंपनियों का मानना है कि AI की मदद से काम तेजी से होता है, खर्च कम होता है।

आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिर्फ एक नई तकनीक नहीं रह गई है बल्कि यह तेजी से काम करने का तरीका बदल रही है। दुनिया भर की बड़ी कंपनियां अब AI और ऑटोमेशन का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं ताकि कम समय में ज्यादा काम हो सके। लेकिन इस बदलाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में AI इंसानों की नौकरियां छीन सकता है? भारत में सामने आई नई रिपोर्ट ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। खासकर बैक ऑफिस, डेटा और कस्टमर सर्विस से जुड़े कर्मचारियों के लिए आने वाले साल आसान नहीं दिख रहे हैं।
भारत में पिछले कुछ सालों में AI आधारित तकनीकों का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ा है। बैंकिंग, आईटी, ई-कॉमर्स और कस्टमर सपोर्ट जैसी इंडस्ट्री अब ऐसे टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं जो कई काम बिना इंसानी मदद के कर सकते हैं। कंपनियों का मानना है कि AI की मदद से काम तेजी से होता है, खर्च कम होता है और गलतियों की संभावना भी घटती है। यही वजह है कि अब बड़ी कंपनियां धीरे-धीरे उन कामों को ऑटोमेट कर रही हैं जिन्हें पहले हजारों कर्मचारी मिलकर करते थे।
नई रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले तीन सालों में सबसे ज्यादा असर बैक ऑफिस और डेटा से जुड़े कामों पर पड़ सकता है। जिन कर्मचारियों का काम डेटा एंट्री, रिपोर्ट तैयार करना, रिकॉर्ड मैनेज करना या सामान्य प्रोसेसिंग से जुड़ा है उनके रोल्स में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनियां अब ऐसे सिस्टम अपना रही हैं जो कुछ ही सेकंड में वही काम कर सकते हैं जिसमें पहले घंटों लग जाते थे। इससे कई पारंपरिक नौकरियों की जरूरत कम हो सकती है।
कस्टमर सर्विस सेक्टर में भी AI का असर तेजी से दिखाई दे रहा है। अब कई कंपनियां चैटबॉट और AI कॉल सपोर्ट सिस्टम का इस्तेमाल कर रही हैं। ये सिस्टम ग्राहकों के सवालों का जवाब तुरंत दे सकते हैं और कई मामलों में इंसानी एजेंट की जरूरत भी नहीं पड़ती। हालांकि अभी पूरी तरह इंसानों की जगह AI नहीं ले पाया है लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में इस सेक्टर में कर्मचारियों की संख्या कम हो सकती है। खासकर उन लोगों के लिए चुनौती बढ़ सकती है जो केवल बेसिक कस्टमर सपोर्ट स्किल्स पर निर्भर हैं।
रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता कर्मचारियों की ट्रेनिंग को लेकर जताई गई है। भारत में बहुत कम कर्मचारियों को नई तकनीकों की औपचारिक ट्रेनिंग मिल रही है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी के साथ खुद को अपडेट नहीं कर पा रहे हैं। दुनिया के कई देशों में कंपनियां कर्मचारियों को लगातार नई स्किल्स सिखा रही हैं लेकिन भारत में यह रफ्तार अभी काफी धीमी है। कई कंपनियां अब भी पुरानी ट्रेनिंग पद्धति पर ज्यादा पैसा खर्च कर रही हैं जबकि प्रैक्टिकल सीखने पर बहुत कम ध्यान दिया जा रहा है।
AI अपनाना सिर्फ कर्मचारियों के लिए ही नहीं बल्कि कंपनियों के लिए भी आसान नहीं है। कई कंपनियां अभी तक यह तय नहीं कर पा रही हैं कि AI में कितना निवेश करना सही रहेगा और इससे उन्हें कितना फायदा मिलेगा। इसके अलावा नेतृत्व स्तर पर भी कई जगह स्पष्ट रणनीति की कमी दिखाई दे रही है। यही वजह है कि कई कंपनियां AI को लेकर उत्साहित तो हैं लेकिन उसे पूरी तरह लागू करने में अभी भी पीछे हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले कुछ साल भारत के नौकरी बाजार के लिए काफी अहम होने वाले हैं। जिन लोगों के पास डिजिटल स्किल्स, AI की समझ और नई तकनीकों के साथ काम करने की क्षमता होगी उनके लिए मौके बढ़ सकते हैं। वहीं जो लोग खुद को समय के साथ अपडेट नहीं करेंगे उनके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि AI को पूरी तरह नौकरी खत्म करने वाली तकनीक कहना भी सही नहीं होगा। यह कई नए रोजगार के मौके भी पैदा कर सकता है लेकिन इतना जरूर तय है कि भविष्य में वही लोग आगे बढ़ पाएंगे जो नई स्किल्स सीखने के लिए तैयार रहेंगे।
आज का समय तेजी से बदल रही तकनीकों का दौर है। ऐसे में सिर्फ डिग्री या पुराना अनुभव काफी नहीं रहेगा। लगातार नई चीजें सीखना और खुद को अपडेट रखना ही सबसे बड़ी ताकत बनने वाला है। AI का असर आने वाले समय में लगभग हर सेक्टर पर दिखाई देगा। इसलिए कर्मचारियों और कंपनियों दोनों को समय रहते बदलाव के लिए तैयार होना होगा। जो लोग अभी से नई तकनीकों को समझना शुरू करेंगे वही भविष्य की नौकरी की दौड़ में सबसे आगे रहेंगे।
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