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बेकरी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि ब्रेड बनाने में इस्तेमाल होने वाला लगभग हर सामान महंगा हो गया है। आटा, मैदा, दूध और दूसरे कच्चे माल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इसके अलावा पैकेजिंग का खर्च और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट भी पहले से ज्यादा हो गई है।

महंगाई ने एक बार फिर आम आदमी की जेब पर असर डालना शुरू कर दिया है। पहले पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े फिर दूध महंगा हुआ और अब रोजाना इस्तेमाल होने वाली ब्रेड की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो गई है। खासतौर पर मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में ब्रेड के दाम 12 फीसदी तक बढ़ा दिए गए हैं। इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है जो सुबह के नाश्ते से लेकर बच्चों के टिफिन तक ब्रेड का इस्तेमाल करते हैं।
ब्रेड कंपनियों ने अलग-अलग वेरिएंट के दाम बढ़ा दिए हैं। 400 ग्राम वाली सैंडविच ब्रेड, जो पहले 40 रुपये में मिलती थी, अब 45 रुपये में बिक रही है। वहीं 55 रुपये वाली व्होल व्हीट ब्रेड अब 60 रुपये की हो गई है। मल्टीग्रेन ब्रेड, जिसकी कीमत पहले 60 रुपये थी अब 65 रुपये में मिल रही है। ब्राउन ब्रेड के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है। पहले 45 रुपये में मिलने वाला पैकेट अब 50 रुपये का हो गया है। छोटे पैकेट भी सस्ते नहीं बचे हैं। 20 रुपये वाला व्हाइट लोफ अब 22 रुपये का हो गया है जबकि 28 रुपये वाला छोटा ब्राउन लोफ अब 30 रुपये में बिक रहा है।
बेकरी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि ब्रेड बनाने में इस्तेमाल होने वाला लगभग हर सामान महंगा हो गया है। आटा, मैदा, दूध और दूसरे कच्चे माल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इसके अलावा पैकेजिंग का खर्च और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट भी पहले से ज्यादा हो गई है। डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ने से माल एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में ज्यादा खर्च आ रहा है। यही वजह है कि कंपनियां अब उस बढ़े हुए खर्च का बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं।
ब्रेड के दाम पहले भी बढ़ते रहे हैं लेकिन इस बार लोगों को झटका ज्यादा लगा है। आमतौर पर ब्रेड के पैकेट पर 2 या 3 रुपये तक की बढ़ोतरी होती थी लेकिन इस बार कई पैकेट सीधे 5 रुपये तक महंगे हो गए हैं। मिडिल क्लास परिवारों का कहना है कि रोजमर्रा की चीजें लगातार महंगी होती जा रही हैं। पहले दूध के दाम बढ़े फिर खाने का तेल, मसाले और अब ब्रेड भी महंगी हो गई। ऐसे में महीने का बजट संभालना मुश्किल हो रहा है।
पिछले कुछ महीनों में कई जरूरी सामानों की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। दूध, खाद्य तेल, मसाले, जैम, शहद और FMCG प्रोडक्ट्स जैसे साबुन, शैंपू और टूथपेस्ट तक महंगे हो चुके हैं। कई कंपनियों ने दाम बढ़ाने के साथ-साथ पैकेट का साइज भी छोटा कर दिया है। इसका असर सीधे आम परिवारों की जेब पर पड़ रहा है। खासतौर पर नौकरीपेशा और मिडिल क्लास लोग सबसे ज्यादा दबाव महसूस कर रहे हैं क्योंकि उनकी आमदनी उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही जितनी तेजी से खर्च बढ़ रहे हैं।
ब्रेड की कीमतें बढ़ने का असर आने वाले समय में खाद्य महंगाई के आंकड़ों पर भी दिख सकता है। ब्रेड रोज इस्तेमाल होने वाली चीज है और इसका सीधा संबंध फूड इंफ्लेशन से माना जाता है। अप्रैल महीने में फूड इंफ्लेशन पहले ही बढ़कर 4.20 फीसदी तक पहुंच चुका था। अब अगर ब्रेड समेत दूसरी खाने-पीने की चीजों के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो मई में महंगाई का आंकड़ा और ऊपर जा सकता है।
लगातार बढ़ती महंगाई ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पहले जहां परिवार महीने का खर्च आसानी से संभाल लेते थे वहीं अब हर छोटी चीज के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं। ब्रेड जैसी रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीज का महंगा होना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में रसोई का बजट और बढ़ सकता है। ऐसे में लोग अब खर्च कम करने और जरूरी चीजों को सोच-समझकर खरीदने की कोशिश कर रहे हैं।
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