MSME सेक्टर पर सरकार की बड़ी मेहरबानी, जानिए कैसे मिलेगा फायदा?

केंद्र सरकार ने MSME सेक्टर को मजबूती देने के लिए SIDBI को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता मंजूर की है। इस फैसले से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सस्ता और आसान कर्ज मिलने की राह खुलेगी। सरकार का मानना है कि इस पूंजी निवेश से SIDBI की वित्तीय क्षमता बढ़ेगी।

MSME
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locationभारत
userअसमीना
calendar21 Jan 2026 06:09 PM
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भारत की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर की भूमिका बेहद अहम है। यही सेक्टर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास का मुख्य आधार है। अब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए MSME सेक्टर को सशक्त बनाने के लिए भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता देने की मंजूरी दी है। इस फैसले से न सिर्फ छोटे उद्यमों को सस्ता और आसान कर्ज मिलेगा बल्कि आने वाले वर्षों में लाखों नए उद्यम और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

SIDBI को 5,000 करोड़ की इक्विटी

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यह निर्णय लिया गया। सरकार का मानना है कि इस अतिरिक्त पूंजी से SIDBI को बाजार से कम लागत पर संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। इसके परिणामस्वरूप बैंक MSME सेक्टर को प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कर सकेगा। वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के जरिए यह राशि तीन किस्तों में SIDBI में निवेश की जाएगी। वित्त वर्ष 2025-26 में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जबकि अगले दो वित्त वर्षों 2026-27 और 2027-28 में 1,000-1,000 करोड़ रुपये की इक्विटी डाली जाएगी। पहली किस्त की बुक वैल्यू 568.65 रुपये प्रति शेयर तय की गई है।

MSME देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़

एमएसएमई सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह न केवल रोजगार सृजन में मदद करता है, बल्कि छोटे उद्योगों के माध्यम से स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति देता है। SIDBI को यह इक्विटी निवेश मिलने के बाद वित्त वर्ष 2024-25 के अंत तक जिन 76.26 लाख MSME को वित्तीय सहायता मिल रही है उनकी संख्या वित्त वर्ष 2027-28 तक 1.02 करोड़ तक पहुंच सकती है। इसका मतलब है कि लगभग 25.74 लाख नए MSME इस पहल के तहत औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़ेंगे। सरकार की योजना है कि इस कदम से छोटे उद्योग अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे और नई तकनीक अपनाकर उत्पादन बढ़ा सकेंगे।

रोजगार के अवसरों में तेजी

इस पहल से देश में रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027-28 के अंत तक लगभग 1.12 करोड़ नए रोजगार उत्पन्न होंगे। यह न केवल छोटे कारोबारियों को मजबूती देगा बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी तेजी से बढ़ाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि SIDBI को मजबूत करने का यह फैसला Make in India, आत्मनिर्भर भारत और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी समर्थन देगा। आसान और सस्ता कर्ज मिलने से छोटे उद्यम नई तकनीक अपनाने, उत्पादन बढ़ाने और नए बाजारों में प्रवेश करने में सक्षम होंगे जिससे देश की समग्र आर्थिक वृद्धि को भी बल मिलेगा।

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अडानी के इस ऐलान से हिल गई पूरी दुनिया, भारत पर 60 देशों की निगाहें

Adani Group: दावोस 2026 में अडानी ग्रुप ने 6 लाख करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया। इस निवेश का उद्देश्य भारत में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। अडानी का फोकस एविएशन, क्लीन एनर्जी, डिजिटल इंफ्रा और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर है।

Gautam Adani
अडानी का बड़ा निवेश ऐलान
locationभारत
userअसमीना
calendar21 Jan 2026 02:08 PM
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दावोस में आयोजित 56वें वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अडानी ग्रुप (Adani Group) ने एक ऐसा ऐलान किया जिसने पूरी दुनिया की निगाहें भारत पर टिका दीं। एशिया के दूसरे सबसे अमीर कारोबारी गौतम अडानी ने एविएशन, क्लीन एनर्जी, डिजिटल इंफ्रा और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स में 6 लाख करोड़ रुपये के निवेश का ब्लूप्रिंट पेश किया। यह निवेश महाराष्ट्र, असम और झारखंड में किया जाएगा और इसका उद्देश्य रोजगार सृजन, कौशल विकास और ऊर्जा परिवर्तन में भारत की प्राथमिकताओं को मजबूत करना है।

असम और पूर्वोत्तर भारत में नए अवसर

अडानी ग्रुप ने असम में गुवाहाटी के गोपीनाथ बोरदोलोई इंटरनेशनल एयरपोर्ट को केंद्र में रखते हुए एविएशन और वैमानिकी क्षेत्र में विस्तार की योजना का ऐलान किया। एयरपोर्ट का नया टर्मिनल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2025 में उद्घाटित किया था और इसका संचालन अगले महीने शुरू होने की उम्मीद है। इस योजना में हॉस्पिटैलिटी और रिटेल इंफ्रा, लेवल-डी फुल-फ्लाइट सिमुलेटर के साथ एविएशन अकैडमी और चौड़े व संकीर्ण विमानों के लिए रखरखाव सुविधाएं शामिल हैं। पूर्वोत्तर भारत में कार्बी आंगलोंग और दीमा हसाओ जिलों में बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की घोषणा भी की गई है जिनसे 2,700 मेगावाट से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता जुड़ेगी। इसके अलावा, सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग और ग्राइंडिंग यूनिट्स के माध्यम से पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में निर्माण सप्लाई चेन को मजबूत करने की योजना है।

महाराष्ट्र में तकनीक और हरित ऊर्जा का केंद्र

महाराष्ट्र में अडानी ग्रुप का निवेश शहरी पुनर्विकास, डिजिटल इंफ्रा और नेक्स्ट जेन ऊर्जा प्रणालियों पर केंद्रित है। मुंबई की धारावी पुनर्विकास परियोजना, नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और इसके आसपास लॉजिस्टिक्स, वाणिज्यिक और आतिथ्य इंफ्रा को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निवेशकों का स्वागत करते हुए कहा कि निवेश से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र में 3,000 मेगावाट की संयुक्त क्षमता वाले हरित डेटा सेंटर पार्क, हवाई अड्डे के पास एकीकृत एरिना जिला, 8,700 मेगावाट की पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत परियोजनाएं, कोयला गैसीकरण पहल, सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले फैब्रिकेशन सुविधाएं तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी वाले परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट को शामिल किया गया है।

7 से 10 साल में पूरे होंगे निवेश के लक्ष्य

अडानी एंटरप्राइजेज के निदेशक प्रणव अडानी ने बताया कि यह निवेश अगले सात से दस साल में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। उनका कहना था कि यह योजना रोजगार सृजन, कौशल निर्माण और टेक-आधारित समावेशन को बढ़ावा देगी। इसके साथ ही यह ऊर्जा परिवर्तन, विनिर्माण में आत्मनिर्भरता और क्षेत्रीय विकास जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है। दावोस में अडानी ग्रुप की घोषणाओं ने वैश्विक निवेशकों और राजनेताओं के बीच भारत के आर्थिक विस्तार के अगले चरण को आकार देने में निजी पूंजी की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया। इस ऐलान से भारत में निवेश के नए अवसर खुलेंगे और रोजगार और आर्थिक विकास की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए जाएंगे।

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किसानों और ग्रामीणों की लगेगी लॉटरी! हो रही है बड़ी तैयारी

Budget 2026-27: Budget 2026-27 में किसानों और ग्रामीण इलाकों के लिए बड़े ऐलान किए जाने की संभावना है। सरकार ग्रामीण रोजगार, आवास और सड़क योजनाओं पर फोकस बढ़ाने की तैयारी कर रही है। MGNREGS और PMAY-G जैसी योजनाओं में डबल-डिजिट बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

Budget 2026-27
ग्रामीणों के लिए सरकार का बड़ा प्लान
locationभारत
userअसमीना
calendar21 Jan 2026 01:42 PM
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आने वाला बजट 2026-27 ग्रामीण भारत के लिए कई मायनों में खास साबित हो सकता है। सरकार इस बार शहरी विकास के साथ-साथ गांवों और किसानों पर अपना फोकस और मजबूत करने की तैयारी में है। बढ़ती महंगाई, कमजोर ग्रामीण मांग और रोजगार की जरूरतों को देखते हुए सरकार की रणनीति साफ नजर आ रही है। गांवों में पैसा पहुंचेगा, काम बढ़ेगा और उसी के साथ देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी। संकेत मिल रहे हैं कि बजट में ग्रामीण रोजगार, आवास और सड़क योजनाओं के लिए दो अंकों की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के बजट में संभावित बड़ा इजाफा

वर्तमान वित्तीय वर्ष में ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिए 1.88 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था जो पिछले साल के मुकाबले करीब 8 फीसदी ज्यादा था। अब 2026-27 के बजट में इस हिस्से को और मजबूत करने की तैयारी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ग्रामीण इलाकों के लिए प्रमुख योजनाओं में डबल-डिजिट ग्रोथ देने पर विचार कर रही है ताकि गांवों में निवेश बढ़े और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिले।

रोजगार योजना में बदलाव की तैयारी

ग्रामीण रोजगार को लेकर सरकार एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ती नजर आ रही है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी MGNREGS की जगह विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G योजना लाने का प्रस्ताव है। इस नई योजना के तहत 2026-27 में 95,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च का अनुमान लगाया जा रहा है। नए कानून के तहत ग्रामीण रोजगार गारंटी के लिए मौजूदा साल के संशोधित अनुमान के मुकाबले करीब 11 फीसदी ज्यादा बजट दिए जाने की संभावना है जिससे ग्रामीण मजदूरों की आमदनी बढ़ाने पर जोर रहेगा।

ग्रामीण आवास और सड़कों पर खास ध्यान

सरकार का मानना है कि ग्रामीण आवास और सड़क जैसी योजनाओं का अर्थव्यवस्था पर हाई मल्टीप्लायर प्रभाव पड़ता है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लिए 54,832 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 19,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। इन दोनों योजनाओं में 2026-27 में इससे भी ज्यादा बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। गांवों में पक्के घर और बेहतर सड़कें न सिर्फ जीवन स्तर सुधारती हैं बल्कि स्थानीय रोजगार और मांग को भी बढ़ावा देती हैं।

मौजूदा साल में क्यों कम रहा खर्च?

रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्तीय वर्ष में कुछ योजनाओं में खर्च उम्मीद से कम रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और ग्राम सड़क योजना में संशोधित अनुमान के तहत बजट में कटौती की जा सकती है, क्योंकि नए चरण के लिए पात्र लाभार्थियों की पहचान में ज्यादा समय लग गया। इसी वजह से घरों के निर्माण और सड़क परियोजनाओं की रफ्तार प्रभावित हुई।

3 करोड़ घरों का लक्ष्य और आगे की जरूरत

कैबिनेट ने 2024 में देशभर में पांच साल में 3 करोड़ नए घर बनाने के लिए 3.06 लाख करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी थी। इनमें से 2 करोड़ घर ग्रामीण इलाकों में PMAY-G के तहत बनाए जाने हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 3.51 मिलियन घर पूरे करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन अब तक करीब 1.8 मिलियन घर ही बन पाए हैं। हालांकि, लाभार्थियों की सूची लगभग तैयार हो चुकी है और आने वाले महीनों में निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है जिसके लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत पड़ेगी।

ग्रामीण सड़कों से जुड़े नए प्लान

ग्रामीण सड़कों के मोर्चे पर भी सरकार बड़े प्लान के साथ आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के लिए सितंबर 2024 में पांच साल का 70,125 करोड़ रुपये का पैकेज मंजूर किया गया था। नए चरण में शामिल होने वाले गांवों की सूची तैयार करने में देरी के कारण इस साल खर्च कम रहा लेकिन अगले वित्तीय वर्ष में इस योजना के तहत काम में तेजी आने की संभावना है।

ग्रामीण बजट से बढ़ेगी मांग और विकास

ग्रामीण इलाकों में बढ़ता सरकारी खर्च स्थायी संपत्तियों के निर्माण में मदद करेगा, जिससे अंदरूनी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। रोजगार योजनाओं से ग्रामीण मजदूरों की आय बढ़ेगी वहीं आवास और सड़क परियोजनाएं लंबे समय तक आर्थिक विकास को सहारा देंगी। कुल मिलाकर कहें तो बजट 2026-27 ग्रामीण भारत के लिए नई उम्मीद और नए अवसर लेकर आ सकता है।

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