Budget 2026: बजट 2026 में भारत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लेकर बड़ा दांव खेल सकता है। चीन पर इंपोर्ट निर्भरता घटाने और लोकल प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए 23,000 करोड़ रुपये की तैयारी हो रही है। किन सेक्टर्स को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा और यह प्लान कैसे बदल सकता है भारत की तस्वीर, इसका पूरा संकेत यहां है।

भारत सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में ऐसा बड़ा ऐलान कर सकती है जो देश की मैन्युफैक्चरिंग ताकत को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने और चीन को सीधी टक्कर देने के लिए सरकार महंगे और हैवी कंपोनेंट्स के लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। इस रणनीति के तहत बजट 2026 में करीब 23,000 करोड़ रुपये के इंसेंटिव पैकेज की घोषणा संभव मानी जा रही है। अगर यह योजना लागू होती है तो भारत का कैपिटल गुड्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर पूरी तरह बदल सकता है।
सरकार का साफ मकसद है कि भारत को हैवी मशीनरी और एडवांस टेक्नोलॉजी कंपोनेंट्स के लिए दूसरे देशों पर निर्भर न रहना पड़े। अभी टनल बोरिंग मशीन, क्रेन, हाइड्रोलिक्स सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट जैसे अहम उपकरणों का बड़ा हिस्सा चीन, जापान, जर्मनी और साउथ कोरिया से आयात किया जाता है। बजट 2026 में प्रस्तावित इंसेंटिव स्कीम इसी निर्भरता को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, निर्माण उपकरण (Construction Equipment) सेक्टर के लिए सबसे बड़ा पैकेज तैयार किया जा रहा है। इस सेक्टर को 14,000 से 16,000 करोड़ रुपये तक के इंसेंटिव मिलने की संभावना है। वहीं, ऑटोमोबाइल सेक्टर में मजबूत ग्लोबल वैल्यू चेन तैयार करने के लिए करीब 7,000 करोड़ रुपये की अलग योजना पर काम चल रहा है। इन दोनों योजनाओं का उद्देश्य भारत को हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाना है।
टनल बोरिंग मशीन, क्रेन और अन्य हाई-लेवल निर्माण उपकरण देश के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की रीढ़ हैं। बीते वर्षों में चीन द्वारा टनल बोरिंग मशीन के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों से भारत के कई बड़े प्रोजेक्ट प्रभावित हुए थे। यही वजह है कि सरकार अब इन मशीनों का लोकल प्रोडक्शन बढ़ाने पर फोकस कर रही है ताकि भविष्य में किसी भी देश के फैसलों का असर भारत की ग्रोथ पर न पड़े।
इस योजना के तहत हाइड्रोलिक्स सिस्टम, अंडरकैरिज, इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU), सेंसर और टेलीमैटिक्स जैसे हाई-टेक कंपोनेंट्स के घरेलू निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा। लक्ष्य यह है कि पूरी तरह से बनी मशीनों का आयात कम हो और भारत में ही वैल्यू एडिशन हो। इससे न सिर्फ लागत घटेगी बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए प्रस्तावित योजना का फोकस एडवांस टेक्नोलॉजी पर है। एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS), 360 डिग्री कैमरे और स्मार्ट सेंसर जैसे मॉडर्न कार फीचर्स को भारत में ही बनाने पर जोर दिया जाएगा। सरकार इन कंपोनेंट्स के लिए कम से कम 50% घरेलू मूल्यवर्धन के साथ लोकल मैन्युफैक्चरिंग को इंसेंटिव दे सकती है। इससे भारत न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि एक्सपोर्ट के नए रास्ते भी खुलेंगे।
नई जीवीसी योजना के तहत ऑटो पार्ट्स निर्माण में इस्तेमाल होने वाले मोल्ड, पावर टूल्स और अन्य कैपिटल गुड्स की खरीद पर सब्सिडी दी जा सकती है। इसके अलावा, प्रोटोटाइपिंग सेंटर्स की स्थापना को भी सरकारी समर्थन मिलेगा जिससे भारतीय कंपनियां नई टेक्नोलॉजी को तेजी से डेवलप कर सकें।