कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा तेजी! क्या पेट्रोल ₹100 के पार जाएगा?
इस साल अब तक अमेरिकी क्रूड ऑयल में 60 फीसदी और ब्रेंट क्रूड में 33 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। एक्सपर्ट का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती हैं तो भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम में भी जल्द ही इजाफा देखने को मिल सकता है।

हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने आम लोगों की नींद उड़ा दी है। अमेरिकी और खाड़ी देशों के क्रूड ऑयल दोनों ही 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुके हैं और यह करीब 30 महीने का हाई रिकॉर्ड कर रहा है। इस साल अब तक अमेरिकी क्रूड ऑयल में 60 फीसदी और ब्रेंट क्रूड में 33 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। एक्सपर्ट का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती हैं तो भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम में भी जल्द ही इजाफा देखने को मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम और हाई रिकॉर्ड
ब्रेंट क्रूड ऑयल इस समय 93 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई करीब 92.5 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। ब्रेंट क्रूड में मार्च महीने में 30 फीसदी से ज्यादा का इजाफा देखा गया है जबकि अमेरिकी क्रूड की कीमत में 38 फीसदी से अधिक की तेजी देखने को मिली है। खाड़ी देशों का क्रूड भी अब पहली बार अप्रैल 2024 के बाद 90 डॉलर के पार गया है। पिछले 30 महीनों में इतनी तेजी दोनों प्रकार के क्रूड में नहीं देखी गई थी।
मिडिल ईस्ट संकट का असर
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान से किसी शर्त के बिना सरेंडर करने को कहा है। इसके अलावा होर्मुर्ज स्ट्रेट अभी भी बंद है जो दुनिया के 20 फीसदी क्रूड सप्लाई का मार्ग है। इन कारणों से ग्लोबल मार्केट में तेल की उपलब्धता सीमित हो गई है और कीमतों में तेजी देखने को मिली है।
भारत में पेट्रोल और डीजल पर असर
भारत में घरेलू वायदा बाजार में कच्चे तेल के दाम रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गए हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर एक बैरल तेल 8,518 रुपए के पार ट्रेड कर रहा है। वहीं घरेलू बाजार में यह लगभग 8,363 रुपए प्रति बैरल के लेवल पर बंद हुआ। एक्सपर्ट का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर के पार चला गया तो पेट्रोल और डीजल के दाम में भी इजाफा देखने को मिल सकता है। हालांकि, भारत रूसी कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाकर घरेलू कीमतों पर नियंत्रण रखने की कोशिश कर रहा है।
मार्च महीने में तेजी का असर
मौजूदा महीने में ब्रेंट क्रूड ऑयल में 30 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई में 38 फीसदी तक की तेजी देखी गई है। यह दोनों ही तेल की कीमतों के लिए लंबे समय का उच्चतम स्तर है। अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत और मजबूत होंगे।
सरकार और पेट्रोलियम कंपनियों की तैयारी
सरकार ने कहा है कि आम लोगों को राहत देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। रूसी कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाकर घरेलू तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखने की कोशिश की जा रही है। पेट्रोलियम मंत्री ने भरोसा दिलाया है कि अगर सप्लाई स्थिर रही तो आम लोगों को ज्यादा महंगाई झेलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
क्या आगे पेट्रोल ₹100 के पार जाएगा?
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिडिल ईस्ट का संकट जल्द खत्म नहीं हुआ और कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर के पार चला गया तो पेट्रोल और डीजल के दाम में इजाफा लगभग निश्चित है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ हफ्तों में यह स्थिति तय करेगी कि आम लोगों के लिए रसोई और यात्रा महंगी होगी या सरकार की राहत नीतियां असर दिखाएंगी।
हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने आम लोगों की नींद उड़ा दी है। अमेरिकी और खाड़ी देशों के क्रूड ऑयल दोनों ही 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुके हैं और यह करीब 30 महीने का हाई रिकॉर्ड कर रहा है। इस साल अब तक अमेरिकी क्रूड ऑयल में 60 फीसदी और ब्रेंट क्रूड में 33 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। एक्सपर्ट का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती हैं तो भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम में भी जल्द ही इजाफा देखने को मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम और हाई रिकॉर्ड
ब्रेंट क्रूड ऑयल इस समय 93 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई करीब 92.5 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। ब्रेंट क्रूड में मार्च महीने में 30 फीसदी से ज्यादा का इजाफा देखा गया है जबकि अमेरिकी क्रूड की कीमत में 38 फीसदी से अधिक की तेजी देखने को मिली है। खाड़ी देशों का क्रूड भी अब पहली बार अप्रैल 2024 के बाद 90 डॉलर के पार गया है। पिछले 30 महीनों में इतनी तेजी दोनों प्रकार के क्रूड में नहीं देखी गई थी।
मिडिल ईस्ट संकट का असर
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान से किसी शर्त के बिना सरेंडर करने को कहा है। इसके अलावा होर्मुर्ज स्ट्रेट अभी भी बंद है जो दुनिया के 20 फीसदी क्रूड सप्लाई का मार्ग है। इन कारणों से ग्लोबल मार्केट में तेल की उपलब्धता सीमित हो गई है और कीमतों में तेजी देखने को मिली है।
भारत में पेट्रोल और डीजल पर असर
भारत में घरेलू वायदा बाजार में कच्चे तेल के दाम रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गए हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर एक बैरल तेल 8,518 रुपए के पार ट्रेड कर रहा है। वहीं घरेलू बाजार में यह लगभग 8,363 रुपए प्रति बैरल के लेवल पर बंद हुआ। एक्सपर्ट का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर के पार चला गया तो पेट्रोल और डीजल के दाम में भी इजाफा देखने को मिल सकता है। हालांकि, भारत रूसी कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाकर घरेलू कीमतों पर नियंत्रण रखने की कोशिश कर रहा है।
मार्च महीने में तेजी का असर
मौजूदा महीने में ब्रेंट क्रूड ऑयल में 30 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई में 38 फीसदी तक की तेजी देखी गई है। यह दोनों ही तेल की कीमतों के लिए लंबे समय का उच्चतम स्तर है। अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत और मजबूत होंगे।
सरकार और पेट्रोलियम कंपनियों की तैयारी
सरकार ने कहा है कि आम लोगों को राहत देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। रूसी कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाकर घरेलू तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखने की कोशिश की जा रही है। पेट्रोलियम मंत्री ने भरोसा दिलाया है कि अगर सप्लाई स्थिर रही तो आम लोगों को ज्यादा महंगाई झेलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
क्या आगे पेट्रोल ₹100 के पार जाएगा?
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिडिल ईस्ट का संकट जल्द खत्म नहीं हुआ और कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर के पार चला गया तो पेट्रोल और डीजल के दाम में इजाफा लगभग निश्चित है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ हफ्तों में यह स्थिति तय करेगी कि आम लोगों के लिए रसोई और यात्रा महंगी होगी या सरकार की राहत नीतियां असर दिखाएंगी।












