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सरकार ने डीजल के एक्सपोर्ट पर लगने वाले स्पेशल एक्स्ट्रा टैक्स को घटाकर 23 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। इससे पहले यह टैक्स 55.5 रुपये प्रति लीटर था। यह फैसला तेल कंपनियों के लिए राहत लेकर आया है क्योंकि पिछले कुछ हफ्तों से ऊंचे टैक्स के चलते उनके एक्सपोर्ट पर दबाव बढ़ गया था।

केंद्र सरकार ने मई के पहले दिन तेल कंपनियों को राहत देते हुए डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती कर दी है। सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले से तेल निर्यात करने वाली कंपनियों को राहत मिलेगी और आने वाले दिनों में ईंधन बाजार में स्थिरता देखने को मिल सकती है। वहीं पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर पहले की तरह कोई टैक्स नहीं लगाया गया है। फाइनेंस मिनिस्ट्री की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, नई दरें आज (1 मई) से लागू हो गई हैं। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है और पश्चिम एशिया में तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।
सरकार ने डीजल के एक्सपोर्ट पर लगने वाले स्पेशल एक्स्ट्रा टैक्स को घटाकर 23 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। इससे पहले यह टैक्स 55.5 रुपये प्रति लीटर था। यह फैसला तेल कंपनियों के लिए राहत लेकर आया है क्योंकि पिछले कुछ हफ्तों से ऊंचे टैक्स के चलते उनके एक्सपोर्ट पर दबाव बढ़ गया था। अब टैक्स घटने से निर्यात गतिविधियों को फिर गति मिलने की उम्मीद है।
एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर भी सरकार ने राहत दी है। पहले इस पर 42 रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लगाया गया था,जिसे अब घटाकर 33 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। ATF विमानन कंपनियों के लिए बेहद अहम ईंधन है। टैक्स में कमी से एयरलाइन सेक्टर को कुछ राहत मिल सकती है। इसका असर आगे चलकर हवाई यात्रा की लागत पर भी पड़ सकता है।
सरकार ने पेट्रोल एक्सपोर्ट पर ड्यूटी फ्री व्यवस्था को बरकरार रखा है जिससे पेट्रोल निर्यात करने वाली कंपनियों को फायदा मिलेगा। वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि देश के भीतर इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल आम लोगों को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सीधे तौर पर किसी बदलाव का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार का यह कदम मुख्य रूप से एक्सपोर्ट टैक्स में बदलाव तक सीमित है।
सरकार द्वारा यह टैक्स उस वक्त लगाया गया था जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया था। युद्ध की स्थिति बनने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल आया। जहां पहले कच्चा तेल करीब 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था वहीं तनाव बढ़ने के बाद इसकी कीमत बढ़कर करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। ऐसे हालात में सरकार को आशंका थी कि कंपनियां ज्यादा मुनाफे के लिए बड़े पैमाने पर ईंधन का निर्यात कर सकती हैं जिससे देश के भीतर सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी खतरे को देखते हुए विंडफॉल टैक्स लगाया गया था।
सरकार की ओर से टैक्स में कटौती को इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय हालात पहले की तुलना में कुछ स्थिर हुए हैं। साथ ही घरेलू सप्लाई को लेकर भी स्थिति नियंत्रण में है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक बाजार में तनाव और नहीं बढ़ता तो आने वाले दिनों में ईंधन बाजार में और राहत देखने को मिल सकती है।
फिलहाल सरकार ने अगले 15 दिनों के लिए नई टैक्स दरें तय की हैं। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की कीमतों की समीक्षा के आधार पर फिर फैसला लिया जाएगा। तेल बाजार से जुड़े कारोबारी और आम उपभोक्ता दोनों की नजर अब पश्चिम एशिया की स्थिति और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है क्योंकि यही तय करेगा कि आने वाले समय में ईंधन की कीमतें किस दिशा में जाएंगी।
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